पेशाब में दिक्कत की शिकायत लेकर आए एक युवक हरी उर्फ बबलू की सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने यहां के चिकित्सकों पर आरोप लगाया है कि इंजेक्शन लगाने के महज पांच मिनट के भीतर ही मरीज ने दम तोड़ दिया।
मृतक अविवाहित था और चार बहनों का इकलौता भाई था। गुस्साए परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को सूचना दी, जिस पर डीएसपी विजय जाखड़, सिटी एसएचओ हरबंस लाल, सदर एसएचओ बिजेंद्र सिहाग, महिला थाना प्रभारी पुष्पा सिहाग पुलिस फोर्स के साथ अस्पताल पहुंचे।
पुलिस के सामने परिजनों ने मांग रखी कि सामान्य अस्पताल के चिकित्सक निष्पक्ष पोस्टमार्टम नहीं होने देंगे, इसलिए अग्रोहा मेडिकल में पोस्टमार्टम करवाया जाए। इस दौरान अस्पताल में स्थित इमरजेंसी के मुख्य गेट को बंद कर वहां पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई।
मृतक हरी की बहन काजल, पुष्पा, बिछमा, शालू ने बताया कि हरी को तीन-चार दिन से पेशाब में दिक्कत आ रही थी। वीरवार शाम को वह अस्पताल में दाखिल हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि उसके भाई की दिक्कत बढ़ती जा रही थी। इस बारे में अस्पताल के स्टाफ से बात की लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की। बताया गया है कि इसी बीच चिकित्सकों ने उसके भाई को इंजेक्शन दिया।
इंजेक्शन देने के महज पांच मिनट बाद ही हरी की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने उन्हें चुप रहने के लिए कई प्रलोभन दिए। इसके अलावा उन्होंने चिकित्सकों पर घटिया दवाइयां इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
पुलिसकर्मियों से हाथापाई
पुलिस ने अस्पताल की इमरजेंसी के गेट को बंद कर रखा था। इस दौरान गुस्साए परिजनों ने इमरजेंसी में घुसने की कोशिश की। पुलिसकर्मियों ने उनको रोकना चाहा। आरोप है कि महिलाओं ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई करने की कोशिश की।
विज के दौरे से एक दिन पहले अस्पताल प्रशासन पर उठे सवाल
स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज शुक्रवार को जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। हालांकि, उन्होंने अभी तक के दौरों में एक बार भी यहां के सामान्य अस्पताल का निरीक्षण नहीं किया है। माना जा रहा था कि स्वास्थ्य मंत्री शायद इस बार भी सामान्य अस्पताल का निरीक्षण ना करें, लेकिन इलाज में लापरवाही के चलते एक युवक की मौत के मामले के बाद मंत्री के आने की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
इस बारे में जब डिप्टी सीएमओ डॉ. गिरीश से बात की गई तो उनका कहना था कि युवक की हालत गंभीर थी। इस बारे में उसके परिजनों को पहले ही बता दिया गया था। इंजेक्शन के चलते मौत की बात को नकारते हुए डॉ. गिरीश ने कहा कि मरीज का बीपी और पल्स रेट डाउन था। मरीज को रेफर करने की बात परिजनों को कही गई थी, लेकिन उन्होंने ही इंकार कर दिया। बाद में उपचार के दौरान युवक की मौत हो गई।