बुधवार को गांव महमदकी में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापा मार कर एक झोलाछाप महिला चिकित्सक और उसके सहयोगियों को काबू किया है। झोलाछाप महिला डॉक्टर एवं उसकी टीम फर्जी पहचान पत्र और फर्जी मशीनों के जरिए ग्रामीणों का इलाज करने के नाम पर उनसे रुपये ऐंठ रहे थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम को इस दौरान फर्जी चिकित्सकों से हजारों रुपये की दवाइयां भी बरामद हुई हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से एसएमओ विजय जैन ने आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही के लिए पुलिस विभाग को पत्र भेजा है।
स्वास्थ्य विभाग के एसएमओ विजय जैन को बुधवार सुबह गांव सरदारेवाला की एक महिला ने आकर बताया कि मंगलवार को गांव सरदारे वाला में एक महिला चिकित्सक नैंसी सहित कुछ अन्य चिकित्सकों की टीम आई थी। यह टीम अपने आप को पंजाब के सीनियर डॉक्टरों की टीम बताती थी। उसने अल्ट्रासाउंड जैसी मशीन से उक्त महिला की बीमारी की जांच के लिए 750 रुपये ले लिए। रिपोर्ट दिखाकर उन्हें विभिन्न बीमारियां बताते हुए कहा कि इनका महंगा इलाज चलेगा, तुम पैसों का इतजंाम कर लो। इतना सुनते ही महिला घबरा गई और बुधवार सुबह होते ही सरकारी अस्पताल पहुंचीं।
डॉ. जैन ने महिला की रिपोर्ट लेकर जांच की तो वह रिपोर्ट अल्ट्रासाउंड मशीन की न होकर वैसे ही कंप्यूटर से तैयार की हुई थी, जिस पर डॉ. जैन को शक हुआ, तो उन्होंने रिपोर्ट पर अंकित लेडी चिकित्सक नैंसी के नाम के नीचे लिखे फोन नंबर को मिलाया और कहा कि वह गांव से एक बीमार व्यक्ति बोल रहे है तथा अपना इलाज करवाना चाहते हैं। दूसरी तरफ से बोल रही महिला चिकित्सक ने बताया कि उन्होंने अपना कैंप गांव महमदकी में लगाया है, इसलिए आप गंाव महमदगी में आ जाएं। वहां पर उनकी जांच कर लेंगे। इस पर डॉक्टर जैन ने उच्चाधिकारियों को सूचित कर भिरडाना के सरकारी डॉक्टर घनश्याम, जीएनएम डॉ. वीरपाल के नेतृत्व में टीम गठित की और उक्त टीम गंाव महमदगी पहुंच गई।
डॉ. जैन के अनुसार उक्त महिला डॉक्टर और उसका एक सहयोगी गांव के एक कमरे के बाहर बैठकर मरीजों का इलाज कर रहे थे। डॉ. जैन ने बताया कि जब उन्होंने देखा कि अल्ट्रासाउंड की मशीन के नाम पर उनके पास एक चुंबकनुमा मशीन और लैपटॉप था, जिस पर मरीजों की विभिन्न बीमारियो की जांच की जा रही थी। जब स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उक्त महिला चिकित्सक और उसके सहयोगियों से डिग्री और अन्य दस्तावेजों को दिखाने की बात की, तो पहले तो झोलाछाप चिकित्सकों की टीम से उलझ पड़े, लेकिन मौके पर अपनी डिग्री भी नहीं दिखा पाए। इस पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उक्त मशीन, हजारों रुपये की दवाईयां और मरीजों से एकत्रित दो हजार रुपये झोला छापों के कब्जे से बरामद किए ।
क्या कहना है मुख्य चिकित्सक का।
रतिया अस्पताल के मुख्य चिकित्सक डॉ. विजय जैन का कहना है कि पंजाब की फर्जी एक चिकित्सकों की टीम गांव-गांव जाकर मरीजों की जांच और दवाइयां दे रहे थे। उनके पास कोई भी डिग्री और मान्यता के कागज नहीं थे। हमारे द्वारा भेजी गई टीम ने उक्त मशीन, हजारों रुपये की दवाइयां और मरीजों से एकत्रित किये हुए दो हजार रुपये कब्जे में लेकर इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस को लिख दिया है।