धान की खरीद न होने के कारण भड़के एक दर्जन गांवों के सैकड़ों किसानों ने बुधवार को जमकर बवाल काटा। गुस्साए किसानों ने नायब तहसीलदार और कानूनगो सहित पांच अधिकारियों को जबरदस्ती हैफेड कार्यालय में घुसाकर बंधक बना लिया।
किसानों ने अधिकारियों को कार्यालय में बंद कर बाहर से ताला लगा दिया। बाद में मौके पर पहुंची भारी पुलिस फोर्स ने हस्तक्षेप करते हुए सभी अधिकारियों को छुड़वाया। किसानों द्वारा बंधक बनाए गए अधिकारियों में नायब तहसीलदार होशियार सिंह, कानूनगो सुशील कुमार, पटवारी राजेंद्र सिंह, हैफेड के प्रबंधक और एफसीआई के इंस्पेक्टर ओमप्रकाश शामिल थे। गुस्साए किसानों ने इससे पहले भूना में धान की नियमित खरीद न होने के चलते प्रदर्शन करते हुए रोड भी जाम किया था।
बंधक बनाए गए अधिकारियों के आश्वासन पर ही किसानों ने एकबारगी तो जाम खोल दिया था, लेकिन कुछ ही देर बाद फिर से इन्हीं अधिकारियों को बंधक बना लिया गया।
इससे पूर्व प्रदर्शन के दौरान किसान सभा के जिला प्रधान रामस्वरूप ढाणी गोपाल, सीटू नेता रमेश जांडली, भारतीय किसान यूनियन नेता एडवोकेट अजय कुमार झांझड़ा ने आरोप लगाया है कि अनाज मंडी में पिछले कई दिनों से किसानों की धान की खरीद नहीं हो रही है। जबकि सरकार के चहेते व्यापारियों के किसानों का हाथों-हाथ धान बिक्री हो रहा है। राइस मिल मालिकों और अधिकारियों की सांठ गांठ के कारण किसानों का धान 1510 रुपये प्रति क्विंटल खरीदने की बजाए औने-पौने दामों पर ले रहे हैं।
पिछले 15 दिनों से मंडी में डेरा लगाए बैठे किसानों को मजबूरन अपनी धान की फसल लूट के भाव देनी पड़ रही है। जिन किसानों ने 1200 रुपये प्रति क्विंटल देने से इंकार कर दिया, उनके धान की खरीद नहीं हो रही है। इससे परेशान होकर किसानों ने बुधवार को मार्केट कमेटी कार्यालय के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया। किसान गेट के बाहर सुबह 10 बजे से एक बजे तक धरने पर बैठे रहे। किंतु कोई भी प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा तो किसानों ने सिरसा-चंडीगढ़ रोड पर दरी बिछाकर बैठ गए और जाम लगा दिया। किसानों ने सरकार विरोधी नारे भी लगाए।
काफी कोशिश के बाद माने किसान
जाम की सूचना पर एसएचओ जयभगवान सिंह पुलिस दल बल के साथ मौके पर पहुंच गए। उन्होंने किसानों को समझाकर जाम खुलवाने की कोशिश की। लेकिन किसानों ने एसएचओ की एक नहीं सुनी और विरोध प्रदर्शन स्थल पर डटे रहे। नायब तहसीलदार होशियार सिंह ने डीसी व एसडीएम फतेहाबाद को फोन पर मामले से संबंधित रिपोर्ट दी। इसके बाद धान खरीद एजेंसी हैफेड, वेयर हाउस, डीएफएससी व हरियाणा एग्रो के प्रबंध व इंस्पेक्टर किसानों के बीच पहुंचे। जिन्होंने किसानों को नियमानुसार धान खरीदने का आश्वासन दिया। किसान धान खरीद शुरू करने के बाद जाम खोलने पर अड़ गए। इसके बाद धान खरीद शुरू कर दी गई। सिरसा-चंडीगढ़ रोड काफी देर तक पूर्ण रूप से बाधित रहा और किसानों ने खरीद एजेंसियों के कार्य के बाद जाम खोल दिया।
15 दिनों में चार बार लगा जाम :-
धान खरीद न होने के कारण किसानों और विभिन्न पार्टियों ने मात्र 15 दिनों में चार बार सिरसा-चंडीगढ रोड जाम करना पड़ा। लेकिन जाम के बाद ही खरीद एजेंसियों के अधिकारी धान की खरीददारी क्यों करते हैं। भाजपा के नेताओं संदेह है कि उपरोक्त अधिकारी सरकार को कही बदनाम तो नहीं कर रहे हैं।