अमित रूखाया । गोरखपुर परमाणु संयंत्र के लिए अधिग्रहीत विवादित जमीन का मुआवजा मंजूर करने के लिए अधिकारियों ने लाखों की घूस ली थी। ये चौंकाने वाला खुलासा एडीसी की इससे संबंधित एक मामले की जांच के दौरान हुआ है। इसके अनुसार आरोपी नंबरदार ने स्वीकार किया है कि गोरखपुर के रिश्ते में भाई लगने वाले दो लोगों की विवादित जमीन का मुआवजा एक को दिलवाने की एवज में उसने 12 लाख रुपये लेकर तत्कालीन तहसीलदार को दिए। तत्कालीन डीसी के नाम के भी 2 लाख रुपये लिए गए। हालांकि एडीसी डॉ. अभीर ने अपनी जांच रिपोर्ट को महज नंबरदार द्वारा पैसे लेने की बात स्वीकार करने तक ही सीमित रखा है।
ये था मामला
गोरखपुर परमाणु संयंत्र के लिए गोरखपुर निवासी सुरेश कुमार, अनिल, अजीत और सुनील की कुल छह एकड़ जमीन का अधिग्रहण हुआ था। इसमें से चार एकड़ जमीन का मुआवजा तो इन लोगों को मिल गया लेकिन बाकी दो एकड़ जमीन इनकी बुआ ओमी देवी के पास थी। इन लोगों का दावा था कि ओमी देवी ने जुबानी वसीयत इनके नाम कर रखी थी लेकिन ओमी देवी के बेटे बलवान ने उन दो एकड़ जमीन का मुआवजा लेने के लिए अर्जी लगा दी। इस बीच नंबरदार सज्जन कुमार ने सुरेश और उसके भाइयों को भरोसा दिलाया कि अगर वे लोग 10 से 12 लाख दे दें तो इस दो एकड़ का मुआवजा भी उनको दिलवा देगा। उनके हां करने के दो दिन बाद सज्जन नंबरदार का संदेश आता है कि प्रशासन के बड़े अफसरों से बात हो गई है और कुल 14 लाख में सेटिंग होगी। एडवांस के तौर पर चार लाख रुपये सज्जन को 14 अगस्त 2012 को दे दिए गए। इसके बाद 25 अगस्त 2012 को सज्जन नंबरदार को फिर से 8 लाख रुपये दे दिए गए। उसी साल 26 अक्तूबर को तत्कालीन डीआरओ ने दो एकड़ जमीन का इंतकाल चारों भाइयों के नाम करने के आदेश जारी कर दिए लेकिन बलवान ने डीसी कोर्ट में इस मामले को चैलेंज कर दिया। सुरेश और उसके भाइयों ने आरोप लगाया है कि डीसी कोर्ट में मामला जाने के बाद सज्जन नंबरदार ने तत्कालीन डीसी को देने के नाम पर भी दो लाख और ले लिए। हालांकि डीसी की कोर्ट ने बलवान के हक में फैसला दिया। सिविल अदालत ने भी बलवान के ही हक में फैसला दिया तो सुरेश और उसके भाइयों ने सज्जन नंबरदार से पैसे वापस मांगे। बार-बार मांगने पर तीन साल के बाद 3 जुलाई 2015 को सज्जन ने ढाई लाख रुपये ये कहते हुए वापस कर दिए कि ये रुपये तहसीलदार ने वापस कर दिए हैं। अन्य अधिकारियों से पैसा वापस मिलते ही लौटा देगा।
एडीसी के सामने नंबरदार और तत्कालीन तहसीलदार ने पैसे लेने की बात कबूली
इस मामले की जांच कर रहे एडीसी जेके अभीर ने दोनों पक्षों के बयान भी दर्ज किए। एडीसी के अनुसार उनको दिए गए बयानों में सज्जन नंबरदार ने माना है कि उसने वसीयत का इंतकाल करवाने के नाम पर 12 लाख रुपये लिए थे और 12 लाख रुपये तहसीलदार रामचंद्र को दे दिए थे। इसके बाद डीआरओ ने सुरेश आदि के पक्ष में फैसला सुना दिया था। लेकिन डीसी कोर्ट से खारिज हो गया। दूसरी ओर एडीसी के पास बयान दर्ज करवाने पहुंचे तत्कालीन तहसीलदार रामचंद्र ने अपने बयानों में ये कहा है कि उसने नंबरदार से ढाई लाख रुपये निजी तौर पर लिए थे क्योंकि उसकी बीवी की तबियत खराब थी। ये ढाई लाख रुपये उसने वापस कर दिए थे।
एडीसी ने नंबरदार को माना है दोषी, बाकी अफसरों के नाम के लिए केस जरूरी
एडीसी जेके अभीर ने सज्जन नंबरदार को इंतकाल करवाने के नाम पर पैसे लेने का दोषी तो माना है लेकिन इस मामले में किस किस अधिकारी को पैसे दिए गए इसका कोई ब्योरा नहीं दिया गया। एडीसी अभीर का कहना है कि उनके पास जांच ही इस बात की आई है कि सज्जन ने पैसे लिए या नहीं? उन्होंने ये भी कहा कि पूरी जांच रिपोर्ट डीसी साहब को भेज दी है। इस बारे में बात करने के लिए जब डीसी एनके सोलंकी को फोन किया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।
बैंकों को चेक दिलवाने के नाम पर पैसा लेने की बातें भी आई थी सामने
गोरखपुर में परमाणु संयंत्र के लिए जमीन अधिग्रहण होने के बाद जब किसानों को मुआवजा देने की बात आई तो उस समय के कई अधिकारियों पर ये भी आरोप लगे थे कि उन्होंने किसानों के मुआवजे का करोड़ों रुपये फतेहाबाद के बैंकों में डलवाने के लिए भी पैसे लिए हैं लेकिन इस मामले में औपचारिक शिकायत ना होने के चलते ये मामला दब गया था।