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मंदिर, नंदीशाला हटाने पहुंची जेसीबी के सामने लेटे लोग

Sun, 29 Jan 2017 11:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद
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अवैध कब्जा हटाने गई टीम के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए स्थानीय लोग। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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 न्यायालय के आदेश पर हिसार-चंडीगढ़ रोड स्थित लगभग 17 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे को छुड़ाने की कार्रवाई करने के लिए गई टीम को लोगों के भारी विरोध के चलते लौटना पड़ा। इस 17 एकड़ जमीन पर नंदीशाला, रविदास मंदिर एवं स्वर्गाश्रम स्थापित किया गया है जबकि प्रशासन के अनुसार ये जगह सरकारी अस्पताल के पीछे के रास्ते पर अवैध कब्जा किया गया है। हालात इस कदर गंभीर हो गए थे कि अवैध कब्जा हटाने पहुंची जेसीबी के आगे लोग लेट गए और चेतावनी दी कि अगर प्रशासन को कब्जा हटाना है तो उनकी लाशों के ऊपर से होकर गुजरना होगा।
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लोगों के इस विरोध और कम पुलिसकर्मी होने के चलते कब्जा हटाने गई टीम को लौटना पड़ा। गौरतलब है कि गांव गुल्लरवाला के एक व्यक्ति ने अवैध अतिक्रमण की शिकायत करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।  जिसके बाद कोर्ट ने यहां से अवैध कब्जा हटाने के निर्देश दिए थे। बीते दिनों फतेहाबाद में जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में भी ये मुद्दा उठा था और कमेटी अध्यक्ष सीपीएस सीमा त्रिखा ने भी कब्जे को हटाने के लिए जिला प्रशासन को निर्देश दिए थे।


रविवार दोपहर तहसीलदार नवदीप नैन के नेतृत्व में एक टीम अवैध कब्जा हटाने के लिए चंडीगढ़ रोड पहुंचा। इस टीम में दर्जनों की संख्या में पुलिसकर्मी भी मौजूद थे लेकिन जैसे ही स्थानीय निवासियों को प्रशासन की इस कार्यवाही का पता चला तो सैकड़ों की संख्या में लोग वहां पहुंच गए और प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। नारेबाजी करने वालों में भारी संख्या में महिलाएं भी शामिल थे। रविवार दोपहर लगभग 12 बजे ड्यूटी मजिस्ट्रेट तहसीलदार नवदीप नैन, थाना सदर प्रभारी प्रदीप कुमार, शहर प्रभारी संदीप कुमार, महिला चौकी प्रभारी मंजु सिंह की अगुवाई में पुुलिस बल कार्रवाई के लिए आगे बढ़ा, लेकिन लोगों के भारी विरोध के चलते जेसीबी मशीनों और प्रशासनिक अधिकारियों को कब्जा छुड़ाने की कार्यवाही से पीछे हटना पड़ा।
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प्रशासन से विचार-विमर्श के बाद ही नंदीशाला का हुआ था निर्माण : सैनी
अवैध कब्जे वाली जगह पर बनाई गई नंदीशाला के संयोजक धर्मपाल सैनी ने बताया कि कुछ समय पूर्व शहर में लावारिस एवं खतरनाक सांड़ों का आतंक अधिक हो गया था और सांड़ों की चपेट में आकर कई लोगों की जाने भी जा चुकी थीं। शहर के कई समाजसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रशासन से विचार विमर्श के बाद ही इस जगह पर नंदीशाला बनाकर सभी आवारा सांड़ों को पकड़कर नंदीशाला में अंदर करने का फैसला लिया था। जिसमें प्रशासन के साथ-साथ शहर के सैकड़ों लोगों ने सहयोग करते शहर में आवारा घूम रहे सांड़ों को पकड़कर नंदीशाला में डालने का काम किया था।

उन्होंने बताया कि इसी जगह स्थित श्मशान भूमि पर उनके सौ साल के मौजूदा बुजुर्ग भी अपने पूर्वजों के निधन पर यहीं पर संस्कार करते आ रहे हैं। इसके अलावा रविदास समाज की ओर से मंदिर बनाया गया है और पुराना जोहड़ और शिवमंदिर भी मौजूद हैं।  प्रशासनिक कार्यवाही का विरोध करने पहुंचे स्थानीय लोगों ने चेतावनी देते कहा कि चाहे उन्हें कोई भी कुर्बानी देनी पड़े लेकिन वे इस जगह से अपने धार्मिक मंदिर, स्वर्गाश्रम और नंदीशाला को नहीं हटाएंगे। उन्होंने न्यायालय एवं सरकार से अपील करते कहा कि उक्त मामले पर पुन: संज्ञान लें और समाज के हित में इस मामले में राहत दी जाए।


तहसीलदार उच्चाधिकारियों से बोले, सर यहां पशु ज्यादा हैं और फोर्स कम है, अगली बार हो जाएगी कार्रवाई
इस दौरान ड्यूटी मजिस्ट्रेट तहसीलदार नवदीप नैन ने नंदीशाला में जाकर निरीक्षण किया तथा देखा कि काफी लावारिस सांड़ घूम रहे हैं। तहसीलदार ने तुरंत उच्च अधिकारियों को फोन किया और कहा कि फिलहाल यहां लावारिस सांड़ों की संख्या काफी ज्यादा है। ऐसे में उन्हें एकदम बाहर निकाला गया तो शहर को खतरा हो सकता है। तहसीलदार नैन ने यह भी कहा कि इसके अतिरिक्त जाट आरक्षण के चलते उनके पास पुलिस फोर्स भी कम है। जिस कारण उन्हें कार्रवाई में दिक्कत आ रही है। इसलिए आगे इस कार्यवाही को अंजाम दिया जा सकता है। जिसके बाद प्रशासनिक टीम लौट गई।  
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