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अपील खारिज : मां-बेटे सहित पांच लोगों को भुगतनी होगी 3 साल की कै द

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अमर उजाला ब्यूरो
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फतेहाबाद। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संदीप गर्ग की अदालत ने धोखाधड़ी के मामले में सजायाफ्ता मां बेटे सहित पांच लोगों की अपील ठुकराते हुए निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा है। हालांकि कोर्ट ने दोषियों को तीन सजाएं अलग-अलग भुगतने में राहत दी है। पहले उनको 6 साल सजा काटनी थी, लेकिन कोर्ट ने उनको 3 साल की सजा भुगतने के आदेश दिए हैं।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार, रतिया की कोर्ट में शेर सिंह नामक व्यक्ति ने एक याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि रतिया निवासी पीयूष कुमार, उसकी मां ऊषा रानी, बंसीलाल, बुर्ज निवासी ओमप्रकाश व जींद निवासी राजेश कुमार ने उसके साथ प्लाट का एग्रीमेंट किया था। इसके बाद उपरोक्त आरोपियों ने यह प्लाट किसी और को बेच दिया। जिस पर अदालत ने सभी पांचों आरोपियों पर केस दर्ज करने के आदेश दिए थे। 4 मार्च 2013 को रतिया की कोर्ट ने तीनों आरोपियों को धोखाधड़ी की तीन अलग-अलग धाराओं में 3 साल कैद व 10 हजार जुर्माना, 2 साल कैद व 10 हजार रुपये जुर्माना तथा 1 साल कैद व 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। यह सजा उन्हें अलग-अलग भुगतनी थी। सजा मिलने के बाद आरोपियों को कोर्ट से जमानत मिल गई थी, लेकिन उन्होंने निचली अदालत के फैसले को सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी। अब सत्र न्यायालय ने निचली कोर्ट के फैसले को तो बरकरार रखा है, लेकिन सभी दोषियों को सजा में राहत दी है। कोर्ट ने सभी आरोपियों को 3 साल की कैद भुगतने के आदेश दिए हैं। उनको अब अलग-अलग सजा भुगतने की बजाए 3 साल तक ही सजा भुगतनी होगी।
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