फतेहाबाद।
स्मॉग के चलते फतेहाबाद जिले में एकाएक सड़क हादसों में खासी वृद्धि हुई है, लेकिन स्मॉग के नाम पर फतेहाबाद में अफसरी ढिलाई और लापरवाही को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। इसमें कोई दो राय नहीं कि स्मॉग के चलते पिछले चार-पांच दिन में तीन लोगों की मौत हो चुकी है जबकि पचास से अधिक घायल भी हो चुके हैं। लेकिन पिछले छह माह का आंकड़ा देखें तो शहर के आस-पास हुए हादसे 20 लोगों को लील चुके हैं और सौ से अधिक घायल हो चुके हैं। पिछले छह माह में ना तो कोई स्मॉग थी और ना ही कोई अन्य कारण। पिछले छह माह में 20 लोगों की जान लेने के बाद बावजूद सड़कों को और खूनी होने से रोकने के लिए कोई प्रयास करते अधिकारी नहीं दिखे हैं। 'अमर उजाला’ ने शुक्रवार को शहर में डैथ-प्वाइंट बन चुकी सड़कों और मोड़ों का जायजा लिया।
स्थान : भूना मोड़ फोरलेन पुल
हालात : सबसे संवेदनशील मोड़ और चौराहों में से एक, लेकिन इसके बावजूद इसके आसपास किसी प्रकार के कोई सूचनापट तक नहीं। इसके अलावा साइड में आने वाले वाहनों के आने का दूसरी ओर पता चलने का कोई संसाधन नहीं। मोड़ से थोड़ा पहले दोनों ओर छोटे-छोटे ब्रैकर बनाए गए हैं जो आमने-सामने के वाहनों की गति को धीमा करते हैं लेकिन साइड से आने वाले वाहनों की गति धीमी करने का कोई साधन नहीं।
अब तक : पिछले छह माह में इस पुल के आसपास छोटी बड़ी करीब 11 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं। इनमें अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 19 लोग घायल हुए हैं। इसमें ढाई माह पहले एक ही हादसे में दो बाइक सवार युवकों को ट्रक ने कुचल दिया था, जिसमें दोनों युवकों की मौत हुई थी।
स्थान : रतिया रोड़ फोरलेन पुल
हालात : फोरलेन बनने से पहले और इसके बाद सबसे अधिक ट्रैफिक इसी मार्ग पर होता है। तकरीबन दो माह पहले यहां पर एक रोडवेज बस और डंपर की टक्कर के बाद रोडवेज बस एक गड्डे में गिर गई थी। लेकिन इसके बाद सुरक्षा के नाम पर सिर्फ एक अवतल दर्पण सड़क के दोनों ओर लगा दिए गए हैं। लेकिन स्मॉग और धुंध की स्थिति में जब सामने खड़ी कार या बस भी नहीं दिखती तो ऐसी स्थिति में अवतल दर्पण कितने कारगर साबित होंगे, यह सोचने का विषय है।
अब तक : फोरलेन बनने के बाद पिछले छह माह में इस मार्ग पर 8 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं। दो माह पहले रोडवेज बस और डंपर में हुई टक्कर सबसे भीषण हादसा था। एक व्यक्ति की मौत हुई थी जबकि पचास से अधिक घायल हुए थे। पिछले छह माह में हुई 8 दुर्घटनाओं में 4 लोगों की मौत हुई है जबकि 65 के करीब लोग घायल हुए हैं।
स्थान : हांसपुर फोरलेन चौक
हालात : फतेहाबाद से होकर गुजरने वाले सभी फोरलेन पुलों और चौकों में सबसे खतरनाक इलाका। यहां पर हर दूसरे मिनट दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। वजह है इसकी बनावट और सुरक्षा साधनों का अभाव। दरअसल धांगड़ के पास से शुरू हुआ ओवरब्रिज यहां पर बिल्कुल फतेहाबाद-हांसपुर रोड़ पर उतरता है। पुल से उतरते ही ब्रैकर देना संभव नहीं होता जिसके चलते पुल से उतरते वाहनों की स्पीड अक्सर काफी तेज होती है और आए दिन इसी कारण यहां हादसे होते हैं। स्मॉग और धुंध की स्थिति में ये फोरलेन चौक सबसे ज्यादा जानलेवा साबित हुआ है।
अब तक : पिछले छह माह में फतेहाबाद शहर के फोरलेन एरिया में सबसे ज्यादा हादसे इसी जगह हुए हैं। तकरीबन 27 छोटे-बड़े हादसे इसी चौक के आसपास हुए हैं। इन हादसों में छह लोगों की मौत हुई है। इसमें बीते दिन तेज रफ्तार कार की चपेट में आए स्कूटी सवार रिटायर्ड कर्मचारी अवतार सिंह भी शामिल हैं जिनकी मौत हो गई और उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हुई थी। इस जानलेवा चौक पर पिछले छह माह में 38 के करीब लोग घायल हुए हैं।
स्थान : धांगड़ फोरलेन कट
हालात : शहर से बाहर की ओर धांगड़ गांव के पास बनाए गए इस बेतरतीब कट के कारण भी लगातार हादसे हो रहे हैं। नेशनल हाइवे पर स्थित धांगड़ गांव के पास अब तक कई बार हादसे हो चुके हैं लेकिन इसके बावजूद यहां पर नेशनल हाईवे अथोरिटी या जिला प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की है। ग्रामीणों की ओर से इस बारे में औपचारिक पत्राचार भी नेशनल हाईवे अथोरिटी को किया गया था। लेकिन महज आश्वासन के बावजूद अभी तक कुछ नहीं किया।
अब तक : पिछले छह माह में इस कट पर 17 हादसे हुए हैं। इनमें 4 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 27 के करीब लोग घायल हुए हैं। इसमें सबसे अधिक घायल एक ही हादसे में हुए थे जिसमें एक ट्रक और पिकअप के बीच हुई टक्कर में तकरीबन 8 लोग घायल हुए थे।
स्थान : एमएम कॉलेज मोड़
हालात : शहर के अंदर ये मोड़ सबसे संवेदनशील चौक माना जाता है। दरअसल मुख्य सड़क के साथ लगते इस सड़क पर आए दिन हजारों की तादाद में विद्यार्थी वाहन लेकर गुजरते हैं। इसके अलावा अन्य लोगों की भी खासी संख्या यहां से वाहनों पर गुजरते हैं। नेशनल हाइवे पर होने के कारण सामने से आते तेज रफ्तार वाहन इस मोड़ से आने वाले वाहनों को नहीं देख पाते और हादसे का शिकार हो जाते हैं। हालांकि पिछले कुछ माह से पुलिस ने यहां पर नाका लगाया है लेकिन वो नाका भी अब मोड़ से पहले सड़क के एक ही ओर है जो वाहनों को सड़क हादसों से बचाने में कम और चालान के लिए वाहनों को रोकने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाते हैं।
अब तक : पिछले छह माह में यहां पर तकरीबन 14 सड़क हादसे हुए हैं। इन हाजदसों में एक व्यक्ति की मौत हुई थी जबकि 17 लोग विभिन्न हादसों में घायल हो चुके हैं। पिछले साल शहर के जुझारू पूर्व पार्षद एवं समाजसेवी राजू मुंजाल की मौत भी इसी जगह हुए हादसे में हुई थी।
'एक बार फोरलेन जनता को सुपुर्द करने के बाद इसके साथ लगते इंटर्नल रोड की देखरेख स्थानीय प्रशासन को सौंप दी जाती है। इसमें अब नेशनल हाईवे अथोरिटी का कोई रोल नहीं है।’
आरके राठी, कार्यकारी अभियंता
नेशनल हाइवे अथोरिटी, हिसार।