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ऑनलाइन ठगी के मामले अभी तक अनट्रेस, साइबर क्रिमिनल्स के आगे पस्त पुलिस महकमा

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अमित रूखाया
फतेहाबाद।
नोटबंदी के एक साल बाद कैशलेस व्यवस्था भले ही धीमी पड़ गई हो लेकिन साइबर क्राइम के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। एटीएम बदलकर पैसे निकालने से शुरू हुए मामले अब फतेहाबाद में ऑनलाइन फ्रॉड्स और एटीएम बदलकर शापिंग करने में बदल गए हैं। पिछले एक साल में ऑनलाइन फ्रॉड्स के तकरीबन 22 मामले सामने आ चुके हैं लेकिन अभी तक एक भी मामले में पुलिस को कामयाबी हासिल नहीं हुई है।
जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार लोगों को कैशलेस व्यवस्था अपनाने पर लगातार जागरुकता अभियान चला रहे हैं लेकिन कैशलेस ट्रांजेक्शन को सुरक्षित कैसे रखा जा सकता है, इस बारे अभी तक कोई जागरूकता अभियान ना तो प्रदेश सरकार की ओर से और ना ही जिला प्रशासन की ओर से चलाया गया है। जमीनी धरातल की बात की जाए तो प्रशासन का अभी इस ओर ध्यान ही नहीं गया है। पुलिस विभाग की ओर से आए दिन हिदायतें जारी की जाती हैं कि लोग अपना एटीएम पिन किसी को ना दें, इसके अलावा ना तो साइबर सैल की ओर से और ना जिला प्रशासन की ओर से इस तरह की कोई तकनीकी जानकारी लोगों को उपलब्ध करवाई गई है। अगर साइबर सेल की बात की जाए तो पिछले महीनों में हुई बहुत ज्यादा वारदातों को ये सेल सुलझा नहीं सका है।
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विशेष सॉफ्टवेयर से करते हैं फोन, कई बार फोन हैक करके करते हैं इस्तेमाल
पुलिस विभाग के सूत्रों की मानें तो बैंक कर्मी बनकर ऑनलाइन ठगी करने वाले ठग इस तरह की वारदातों में अक्सर एक विशेष सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं। इसके जरिए ये लोग किसी साधारण व्यक्ति के मोबाइल नंबर को हैक कर लेते हैं और फोन नंबर के मालिक को पता भी नहीं चलता कि उसका फोन हैक कर लिया गया है। व्यक्ति को तो तब पता चलता है जब उसके पास पुलिस या अन्य व्यक्ति का पूछताछ के लिए फोन जाता है।
एक साल में 22 के करीब वारदातें, अभी तक एक भी मामले का समाधान नहीं
पिछले साल नवंबर में नोटबंदी लागू होने के बाद फतेहाबाद जिले में भी लोगों को कैशलेस करने की बकायदा ट्रेनिंग दी गई। कई जागरूकता शिविर भी लगाए गए जिसके चलते अनेक लोगों ने एटीएम और डेबिट कार्ड इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। लेकिन इसी के साथ ऑनलाइन ठगी का काम भी शुरू हो गया है। पुलिस विभाग के आंकड़ों के मुताबिक फतेहाबाद में पिछले एक साल में ऑनलाइन ठगी के तकरीबन 22 मामले आए हैं। इन सभी मामलों में 5 हजार से लेकर पचास हजार तक की चपत लोगों को लगी है। लेकिन उनका कोई समाधान नहीं हो सका है। कुछ दिन पहले दौलतपुर निवासी देवीलाल ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि वो रतिया चुंगी स्थित एटीएम से पैसे निकालने गया तो पैसे ना निकलने पर एक युवक ने उससे एटीएम लेकर मदद की थी, लेकिन जब वो घर पहुंचा तो खाते से 21 हजार रुपये की शॉपिंग का मैसेज आ गया। इसके अलावा भी एटीएम का पिन पूछकर ऑनलाइन ठगी करने के भी कई मामले सामने आ चुके हैं।
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इन तरीकों से होता है ऑनलाइन फ्रॉड
1. बैंक कभी नहीं करता फोन : रिजर्व बैंक और अन्य सभी बैंक भी समय-समय पर ये बयान जारी करते रहते हैं कि बैंक की ओर से कभी भी किसी उपभोक्ता को उसके कार्ड का पिन, खाता नंबर जानने के लिए फोन नहीं करते। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि उपभोक्ता ऐसे फ्रॉड कॉल्स के झांसे में आकर अपना एटीएम पिन और अन्य डिटेल दे बैठता है और फिर शॉपिंग व ट्रांसफर के जरिये उनका खाता खाली कर दिया जाता है। ऑनलाइन फ्रॉड का यही सबसे प्रचलित तरीका है।
2. नकली सिम के जरिये फ्रॉड : इस तरह के फ्रॉड में ठग किसी तरह से आपका आईडी-प्रूफ हथियाता है और उस आई-डी प्रूफ के जरिए नंबर का नया सिम कार्ड अप्लाई कर देता है। इससे उपभोक्ता का असली सिम कार्ड ब्लॉक हो जाता है और ओटीपी ठग के पास मौजूद सिम पर आ जाता है। ओटीपी मिलने के बाद खाते से कैश निकलना महज एक औपचारिकता ही बचता है। इसलिए अपना आईडी-प्रूफ को संभाल कर रखें।
3. सिर्फ मान्य शॉपिंग वेबसाइट से शॉपिंग करना सेफ : आजकल ऑनलाइन शॉपिंग का जमाना है। लेकिन लापरवाही के चलते उपभोक्ता किसी भी शॉपिंग वेबसाइट से सामान खरीदकर वहां पर अपने अकाऊंट्स डिटेल डाल देते हैं। इस तरह की वेबसाइट्स पर एटीएम पिन या क्रेडिट कार्ड के नंबर सेव हो जाते हैं। जो बाद में लीक हो जाते हैं। इसलिए मान्य शॉपिंग वेबसाइट से खरीददारी करना ही सेफ होता है।
4. एटीएम में मददगार बन बदलते हैं एटीएम : ये समस्या ज्यादातर बुजुर्ग या ग्रामीण उपभोक्ताओं को आती है। एटीएम का इस्तेमाल करने में उनकी जानकारी थोड़ी कम होती है तो उन्हें एटीएम पर परेशानी आती है। ऐसी स्थिति में अक्सर ठग किस्म के लोग एटीएम के बाहर ऐसे ही तरह के शिकार की ताक में होते हैं और शिकार दिखने पर उसकी मदद करने के नाम पर चुपके से एटीएम बदल लेते हैं।
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इस तरह उपभोक्ता कर सकते हैं बचाव
1. कोई भी बैंक आपको फोन कर आपसे आपके बैंक खाते का नंबर और एटीएम का पिन कभी नहीं पूछता। ऐसे में इस प्रकार के फोन कॉल्स को ऐसी कोई भी जानकारी सांझा करने से साफ तौर पर बचें।
2. अक्सर घर बदलने की सूरत में बैंक को अपडेट नहीं करते, जिसके चलते बैंक स्टेटमेंट और अन्य जानकारियां पुराने पते पर आते रहते हैं, वहां से भी आवश्यक जानकारियां लीक हो सकती हैं। बैंक को तुरंत जगह बदलने की अपडेट दें।
3. एटीएम या कार्ड से पेमेंट करते समय सीवीवी (आपके एटीएम कार्ड के पिछली तरफ स्थित आखिरी तीन नंबर) डालते समय ध्यान दें, कि वेबसाइट के पेमेंट आप्शन पर अगर स्टार की जगह नंबर दिखाई दे रहे हैं तो तुरंत उस वेबसाइट को बंद कर दें। किसी अज्ञात व्यक्ति को या फोन पर किसी को भी ये नंबर ना दें।
4. स्वाइप मशीन पर पेमेंट करते समय पेमेंट की राशि का ध्यान रखें और लापरवाही में किसी के सामने पिन नंबर नहीं डालें। साथ ही स्वाइप मशीन से निकली पेमेंट स्लिप की एक कॉपी अवश्य लें, ये आपका हक है।
5. एटीएम में कैश अटक जाए तो तुरंत बैंक को कॉल करें। संभव हो तो गार्ड को तुरंत सारी घटना बताएं ।
6. एटीएम कार्ड गुम या चोरी हो जाए तो सबसे पहले बैंक के कस्टमर केयर पर फोन कर अपना कार्ड ब्लॉक करवाएं। इसके बाद नजदीकी पुलिस स्टेशन और बैंक की शाखा में लिखित रूप से सूचना दें। ताकि आपके कार्ड से कोई और पेमेंट नहीं की जा सके।
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सीआईए प्रभारी को मिली विशेष ट्रेनिंग
जिले में लगातार बढ़ते साइबर क्राइम को देखते हुए सीआईए प्रभारी को कुछ दिन पहले ही चंडीगढ़ में विशेष ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था। सीआईए प्रभारी लगभग दस दिन की साइबर क्राइम की ट्रेनिंग ले आए हैं। जिला पुलिस अब बहुत जल्द फोर्स स्किल बिल्डिंग कार्यक्रम आयोजित करने वाला है। सीआईए प्रभारी इस कार्यक्रम की अगुवाई करते हुए फतेहाबाद जिले के बाकी थाना और चौकी इंचार्जों को साइबर क्राइम के बारे में विस्तार से ट्रेनिंग देंगे।
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फतेहाबाद पुलिस साइबर क्राइम को लेकर भी पूरी तरह गंभीर है। दरअसल पहले लोग इस तरह के मामलों की शिकायत ही नहीं करते थे। इस किस्मत का दोष मान लेते थे। लेकिन अब शिकायत करते हैं जिसके कारण मुकदमे बढ़े हैं। निश्चित तौर पर ये एक चुनौती हैं जिनके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पीछे मैने सीआईए इंचार्ज को चंडीगढ़ मुख्यालय में विशेष ट्रेनिंग पर भेजा था और अब पूरी फोर्स को अपडेट किया जाएगा।
दीपक सहारण, पुलिस अधीक्षक, फतेहाबाद
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