लूटपाट के केस में गिरफ्तार गांव खूनन निवासी चरणजीत ने हिसार जेल में फंदा लगाकर जान दे दी। चरणजीत सिंह को रतिया कोर्ट ने शनिवार को न्यायिक हिरासत में भेजा था। अगले दिन उसने फंदा लगा लिया। हिसार जेल में आत्महत्या करने के कारण वहां की पुलिस ही मामले की जांच कर रही है।
आठ जनवरी को रतिया पुलिस ने लूटपाट के आरोप में गांव खूनन निवासी 25 वर्षीय चरण जीत को गिरफ्तार किया था। नौ जनवरी को उसका मेडिकल चेकअप करवाने के बाद कोर्ट में पेश किया। नागरिक अस्पताल में जब पुलिस चरणजीत का मेडिकल करवाने के लिए आई थी तो वहां भी उसने हंगामा किया। उसने कोविड टेस्ट के लिए सैंपल देने से मना कर दिया था। उसने उसी समय धमकी दी थी कि वह सैंपल लेने पर खुदकुशी कर लेगा। उस वक्त पुलिस उसे फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल में ले गई और उसका कोविड टेस्ट और मेडिकल करवाया गया।
इसके बाद उसे कोर्ट के आदेश पर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। बताया गया है कि जेल भेजने के दूसरे दिन ही 10 जनवरी की शाम को चरणजीत ने जेल के अंदर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। हिसार जेल प्रशासन ने इसकी सूचना रतिया पुलिस को दी। रतिया पुलिस से सूचना मिलने पर चरणजीत के परिजन गांव के सरपंच सुखविंदर सिंह के साथ शव लेने के लिए हिसार गए। सोमवार शाम तक हिसार में ही थे। सरपंच सुखविंदर सिंह ने फोन पर बताया कि वे अग्रोहा मेडिकल में हैं और शव का पोस्टमार्टम करवाया जा रहा है। हिसार पुलिस मामले की जांच कर रही है।
हिसार पुलिस जांच में जुटी
हिसार आजाद नगर थाना के हेड कांस्टेबल नरेंद्र कुमार ने फोन पर बताया कि चरणजीत के शव का अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों के गठित पैनल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया जा रहा है। मामले की जांच चल रही है।
आत्महत्या की जानकारी मिली : थाना प्रभारी
चरणजीत को लूटपाट के केस में आठ जनवरी को गिरफ्तार किया था। अगले दिन कोर्ट के आदेश पर उसे जेल भेज दिया गया। जानकारी मिली है कि चरणजीत ने हिसार जेल में फांसी लगाकर जान दे दी। उसने फंदा कैसे लगाया, इस पर हिसार पुलिस जांच कर रही है।
- रूपेश चौधरी, थाना प्रभारी रतिया।