फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Fatehabad News: सफाई पर करोड़ों खर्च करके भी साफ नहीं रख सके जिला

विज्ञापन
फतेहाबाद के बीघड़ रोड पर पड़ा कचरा, यहां कोई डस्टबिन नहीं है।
विज्ञापन
फतेहाबाद। स्वच्छता पर हर साल करोड़ों रुपये का बजट खर्च करने के बाद भी अधिकारी जिले के शहरों को साफ नहीं रख सके। स्वच्छता सर्वेक्षण परिणाम में जिले के पांचों शहर पिछड़ गए हैं। शहरी एवं आवास मंत्रालय ने स्वच्छता सर्वेक्षण के जारी हुए परिणाम में उत्तर भारत में जिले के फतेहाबाद, टोहाना, रतिया, भूना, जाखल शहर की रैंकिंग पिछले साल के मुकाबले फिसल गई है। प्रदेश स्तर पर फतेहाबाद शहर दूसरे से छठे, रतिया 14वें से 21वें और टोहाना शहर तीसरे से सीधा 38वें स्थान पर चला गया है।
विज्ञापन

जिले का कोई भी शहर 9500 में से 4000 से ज्यादा अंक नहीं ले पाया है। इसके अलावा प्रदेश स्तर पर भी जिले के शहर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएं हैं। जबकि फतेहाबाद शहर में डोर-टू-डोर कचरा उठान और शौचालयों की सफाई पर करोड़ों रुपये का बजट खर्च हो रहा है। लेकिन एजेसियों के सही ढंग से काम न करने के चलते रैंकिंग बिगड़ी है। हाल ही में कमियां मिलने पर नगर परिषद फतेहाबाद डोर-टू-डोर कचरा उठाने वाली एजेंसी को तीन बार और सार्वजनिक शौचालयों की सफाई करने वाली एजेंसी को दो बार नोटिस भी जारी हो चुके हैं, लेकिन हालात नहीं सुधरे। यहां तक नगर परिषद एजेंसियों को जुर्माना भी लगा चुकी है। वहीं शहर में करीब एक साल से नाइट स्वीपिंग बंद है। मशीन के द्वारा रात के समय सफाई करवाई जाती थी लेकिन पार्षदों के विरोध के चलते मशीन को बंद कर दिया गया। ये मशीन अभी तक बिना लिखित आदेश बंद है।

छह सालों के स्वच्छता सर्वेक्षण का परिणाम (उत्तर भारत में)
शहर 2023 2022 2021 2020 2019 2018
फतेहाबाद 42
13 27 30 177 191
टोहाना 84
21 60 26 329 289
भूना 174 116 178 105 399 172
रतिया 142
62 130 137 984 572
जाखल 375 303 552 000 000 000

प्रदेश स्तर पर भी पिछड़े जिले के शहर
शहर 2022 में स्थान 2023 में स्थान
फतेहाबाद 2 6
रतिया 14 21
टोहाना 3 38
भूना 17 40
जाखल 11 55

स्वच्छता सर्वेक्षण में शहरों को 9500 में से ये मिले हैं अंक
शहर अंक मिले
फतेहाबाद 3781
टोहाना 2595
रतिया 3162
भूना 2584
जाखल 2046
ये मुख्य वजह जिससे हमारा शहर रैंकिंग में पिछड़ा
- शहर में मुख्य रोड पर कचरा संग्रह स्थल का होना
- शहर में मुख्य रोड और चौराहों पर डस्टबिन न होना
- एजेंसी द्वारा गीला और सूखा कचरा का अलग-अलग उठान न करना
- स्वच्छता को लेकर सिटीजन द्वारा फीडबैक न देना
- शहर में नगर परिषद द्वारा लोगों को कचरा प्रबंधन को लेकर जागरूक न करना

मुख्य शौचालय बनकर तैयार नहीं, बाकी में व्यवस्था खराब
शहर में करीब 14 सार्वजनिक शौचालय है। नगर परिषद ने इन शौचालयों की सफाई का ठेका करीब 43 लाख रुपये में निजी एजेंसी को दिया है। लेकिन बावजूद इसके शौचालयों की सफाई नहीं हो रही है और न ही सामान रखा जा रहा है। ये ही नहीं शहर के पुराना बस स्टैंड के सामने और थाना रोड पर कंडम घोषित करने के तीन साल बाद भी शौचालय बनकर तैयार नहीं हुए है।
विज्ञापन


सिटी टीम लीडर हटाने से डाटा नहीं हुआ पोर्टल पर दर्ज
स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले में सिटी टीम लीडर लगाए गए थे जिन्हें पिछले साल जून माह में हटा दिया गया। इससे पहले जो यहां पर सीटीएल तैनात थे उन्होंने डाटा पोर्टल पर अपलोड नहीं किया और लापरवाही बरती। इसे भी अधिकारी पिछडऩे का कारण मान रहे है।
कोट
मैंने अभी तक रिजल्ट नहीं देखा है : डीएमसी
स्वच्छता सर्वेक्षण का परिणाम जारी हुआ है लेकिन मैं व्यस्त होने के कारण देख नहीं पाया हूं। स्वच्छता सर्वेक्षण में अगर पिछड़ है तो कारणों को लेकर समीक्षा भी की जाएगी।
विज्ञापन

- संजय बिश्नोई, जिला नगर आयुक्त
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें