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कोरोना वायरस ः चीन निर्यात नहीं होने से नरमा का भाव गिरा

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फतेहाबाद। पहले चीन-अमेरिका ट्रेडवार और अब कोरोना वायरस के कारण निर्यात पर असर पड़ने से जिले में नरमे के भाव गिर गए हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। अनाज मेें नरमे के भाव गिरकर 5200 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। अक्तूबर में जब नरमे की फसल आई थी, तब इसके भाव 5500 रुपये प्रति क्विंटल के करीब थे। बीते वर्ष इस समय नरमा 6 हजार से ऊपर बिक रहा था। नरमे के भाव न बढ़ने से किसानों ने अपना नरमा गोदामों से निकालकर मंडियों में लाकर बेचना शुरू कर दिया है। यही वजह है इन दिनों मंडियों में नरमे की आवक तेज हो गई है।
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कॉटन बेल्ट के नाम से विख्यात फतेहाबाद में अक्तूबर 2019 में जब मंडियों में नरमे की फसल आई थी तब यह 5500 रुपये प्रतिक्विंटल बिका था। किसानों को उम्मीद थी कि हर वर्ष की तहर अबकी बार भी नरमे के भाव 6 हजार से पार पहुंचेंगे। इसी उम्मीद से किसानों ने नरमा निकालकर स्टॉक कर दिया। अब दो माह बाद नरमे की बिजाई का समय आने वाला है। ऐसे में किसानों ने अपने गोदाम खाली करने हैं। इसलिए किसानों को फरवरी मार्च में नरमा बेचना होता है।
बीते 3 साल में मार्च के आस-पास नरमे के भाव 6 हजार के पार पहुंच गए थे। अब फरवरी मास में नरमे की फसल के दाम फिर 200 रुपये टूटकर 5250 रुपये प्रतिक्विंटल रह गए। इससे पूर्व दिसम्बर माह में नरमें के भाव 5800 तक पहुंच गए थे, तब एक ही दिन में इसके भाव 400 रुपये गिर गए थे। जिसकी वजह अमेरिका, चीन ट्रेडवार बताया गया था। कॉटन व्यापार से जुड़े ब्रोकर बतातेे है कि भारत में फैली मंदी में टेक्सटाइल उद्योग ने अपना बिजनेस 30 फीसदी के करीब कम कर दिया है, जिससे नरमा की डिमांड 30 फीसदी कम हो गई। तीसरा कारण अब चाईना में फैले वायरस के चलते चाईना ने धागे की खरीब बंद कर दी है, जिसका भी सीधा असर टेक्सटाइल पर पड़ा है। अब किसानों ने नरमे के भाव बढ़ने की उम्मीद छोड़कर मंडियों में नरमा लाना शुरू किया तो डिमांड कम होने से इसके दाम गिर गए।
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रुई के दाम गिरने से गिरे नरमे के भाव
कॉटन ब्रोकर प्रदीप कुमार के अनुसार 2019 में रुई की गांठ 4390 रुपये के करीब बिक रही थी। जिसके दाम अब 4050 है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि नरमे के रेट में कितनी कमी होगी। सबसे बड़ी बात है कि जिला में 2019 में अब तक 2 लाख 83 क्विंटल नरमें की आवक हुई थी। इस बार यह बढ़कर 5 लाख क्विंटल के करीब पहुंच गई है।
जिले के पांचों खंडों में होती नरमे की खेती
जिला में फतेहाबाद, भट्टू कलां, रतिया, भूना, जाखल व टोहाना में नरमा की फसल की बिजाई की जाती है। इस बार जिला में 68 हजार हेक्टेयर भूमि में नरमा की बिजाई हुई थी।
इस बार 68 हजार हेक्टेयर भूमि पर हुई नरमे की बिजाई
4 वर्ष पूर्व जिला में नरमा करीब 76 हजार हेक्टेयर भूमि पर बीजा जाता था, लेकिन सफेद मक्खी की प्रकोप से नरमे की फसल नष्ट हुई तो किसानों का नरमे की फसल से मोह भंग हो गया। तब नरमे का क्षेत्रफल टूटकर 60 हजार हेक्टेयर रह गया था। 2018 व 2019 में नरमे के भाव बढ़ने से इसका क्षेत्रफल पुना: 68 हजार हेक्टेयर भूमि तक पहुंच गया है।
वर्जन
पहले मंदी और अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डिमांड न होना तथा अब चीन में कोरोना वायरस के कारण नरमे के भाव नहीं बढ़ पा रहे। रुई के दाम पिछले साल से कम है।
- प्रदीप कुमार, कॉटन ब्रोकर फतेहाबाद।
बीते वर्ष अब तक 2 लाख 83 हजार क्विंटल नरमे की आवक हुई थी। अबकी बार रेट ना बढ़ने से किसानों ने नरमा निकालना शुरू कर दिया है। इस बार अब तक करीब 5 लाख क्विंटल नरमे की आवक हो चुकी है।
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- संजीव सचदेवा, सचिव मार्केट कमेटी फतेहाबाद।
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