पिछले चार माह से सिर्फ और सिर्फ कोरोना और इसके दुष्प्रभावों को लेकर ही चर्चा हो रही है। लेकिन इस बीच कोरोना के चलते एक राहत भरी खबर भी निकल कर सामने आई है। स्कूलों के बंद रहने से बच्चे घरों के अंदर ही रहते हैं जिसके कारण बच्चे जंक फूड से दूर हो गए हैं। इसका सीधा असर उनकी सेहत पर सकारात्मक रूप से पड़ रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर में बाल रोग विशेषज्ञों के पास बच्चों की ओपीडी काफी कम हो गई है। शहर के दो प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सतीश बंसल व डॉ. पवन मेहता ने इसकी पुष्टि की है।
पहले रोजाना थी 50 से 60 ओपीडी, अब 5-10 पर सिमटी
बाल रोग विशेषज्ञ अस्पतालों का ओपीडी रजिस्टर देखा जाए तो लॉकडाउन से पहले इन अस्पतालों में जहां बच्चों की रोजाना ओपीडी की संख्या कम से कम 50-60 हुआ करती थी, वो अब घटकर महज 5-10 पर आ गई है। जयपुर बच्चों के अस्पताल के संचालक डॉ. पवन मेहता की मानें तो अनलॉक के बावजूद बच्चों में इन दिनों बिमारियों के लक्षण नहीं दिख रहे। इसी तरह बच्चों को लगाए जाने वाले टीकाकरण में भी काफी कमी आई है। बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अभिभावकों से आह्वान किया है कि टीकाकरण को लेकर लापरवाही बरतने से बचें और सुरक्षित तरीकों का इस्तेमाल करते हुए बच्चों को लगने वाले आवश्यक टीका अवश्य लगवाएं ।
बच्चों की ओपीडी कम होने के ये प्रमुख कारण
1. बच्चे अधिकतर समय घर के अंदर तो बाहर का संक्रमण से बचाव
2. घर पर बना हुआ ताजा खाना खा रहे तो जंक फूड से दूरी बड़ा कारण
3. स्कूल बंद होने के चलते एक-दूसरे से होने वाले रूटीन संक्रमण से भी बचाव
4. मामूली खांसी-जुकाम होने पर अब बच्चों को अस्पताल लाने से बच रहे हैं अभिभावक, घरेलु उपचार
घर पर नियमित व्यायाम की सलाह
हालांकि इन दिनों बच्चों में बीमारियां काफी कम देखने में आ रही हैं। लेकिन घर पर लगातार बैठने और सिर्फ खाने-पीने की आदत को भी चिकित्सक सही नहीं मान रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञों की मानें तो घर पर रहने के बावजूद ज्यादा तला खाने से परहेज रखना चाहिए । बड़ों के साथ साथ बच्चों में भी घर पर रहते हुए नियमित व्यायाम की आदत डालनी चाहिए। इससे बच्चों की इम्युनिटी मजबूत होगी और कारोनाकाल के बाद भी बच्चा स्वस्थ रहेगा।
पिछले चार माह में बच्चों की ओपीडी में नाटकीय तरीके से कमी आई है। इसके पीछे जंक फूड से बच्चो ं का दूर रहना और घर के अंदर ही बने रहना है। बाहर निकलने पर वो रूटीन संक्रमण की चपेट में आता है, लेकिन अब इससे भी बच्चे बचे हुए हैं।’
डॉ. सतीश बंसल, आईएमए अध्यक्ष एवं बाल रोग विशेषज्ञ फतेहाबाद ।
पहले बच्चों की ओपीडी रोजाना 50-60 हुआ करती थी, जो अब 5-6 पर आ गई है। हालांकि ये अच्छी बात है कि बच्चों को बिमारियां कम लग रही हैं। लेकिन कोरोना के डर के चलते आवश्यक टीकाकरण में देरी अच्छी बात नहीं है। इस बारे में अभिभावकों को लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
डॉ. पवन मेहता, बाल रोग विशेषज्ञ, फतेहाबाद ।