गांव भोड़िया खेड़ा में स्थ्ति राजकीय महिला महाविद्यालय का नाम स्व.चौ मनीराम गोदारा के नाम पर रखने के मामले पर रार बढ़ती जा रही है। बुधवार को भोड़िया खेड़ा के हनुमान मंदिर के पास सरपंच जयसिंह की अध्यक्षता में पंचायत हुई। जिसमें सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि यदि सरकार ने अपना फैसला वापिस नहीं लिया तो गुरुवार को कॉलेज के मेन गेट पर ताला लगा दिया जाएगा। वहीं भोड़िया खेड़ा में एक दूसरे पक्ष ने भी पंचायत करके सरकार के फैसले को सही ठहराया है।
गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज का नाम पूर्व गृहमंत्री चौ. मनीराम गोदारा के नाम पर रखने पर भड़के भोड़िया खेड़ा के ग्रामीणों की पंचायत हनुमान मंदिर के बाहर सरपंच जयसिंह की अध्यक्षता में हुई। जिसमें गांव के 19 पंचों सहित काफी ग्रामीणों ने भाग लिया। पंचायत में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि यदि सरकार कॉलेज का नाम बदलने के फैसले को वापिस नहीं लेती है तो गुरुवार को भोड़िया खेड़ा के ग्रामीण एकत्रित होकर कॉलेज के बाहर ताला जड़ देंगे और जब तक सरकार फैसला वापिस नहीं लेगी तब तक वह कॉलेज में क्लासें नहीं लगने देंगे। सरपंच जयसिंह ने बताया कि कॉलेज के लिए जमीन ग्राम पंचायत ने उपलब्ध करवाई थी और कॉलेज को बनवाने में गोदारा परिवार का कोई योगदान नहंी था। सरकार स्व.चौ.मनीराम गोदारा के नाम पर कॉलेज का नाम रख रही है इससे भोड़िया खेड़ा का नाम खत्म हो जाएगा। जो कि भोड़िया खेड़ा की पहचान है। इस मौके पर पूर्व सरपंच संतलाल, महाबीर नंबरदार, दिनेश पंच, हंसराज पंच, साहबराम पंच, अशोक पंच, गुलाब सिंह पंच सहित काफी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।
गोदारा की देन ै कॉलेज
राजकीय कन्या महाविद्यालय का नाम स्व. चौ. मनीराम गोदारा के नाम पर रखने का स्वागत करते हुए भोड़िया ख्ेाड़ा का दूसरा पक्ष भी सामने आ गया है। नहर के पास एक ढ़ाणी में पंचायत कर रामस्वरूप सिहाग, साधूराम सिहाग, हरिसिंह कढ़ाला, ओमप्रकाश सैनी, ओमप्रकाश गहलोत, जगदीश कुमार तथा हंसराज गोदारा ने कहा कि गर्ल्स कॉलेज भोड़िया खेड़ा, राजकीय कॉलेज रतिया तथा भट्टू का कॉलेज स्व. चौ. मनीराम गोदारा की देन है जिनके सहयोग से ही ये कॉलेज बने थे। यदि सरकार कॉलेज का नाम उनके नाम पर रखना चाहती है तो इसमें दूसरों को एतराज नहीं हो चाहिए।
डीसी ने दखल से किया मना
कॉलेज का नाम बदलने को लेकर बुधवार को भोड़िया खेड़ा की पंचायत सरपंच जयसिंह की अध्यक्षता में उपायुक्त डी.के.बेहरा से मिली थी। जिसके बाद उपायुक्त ने साफ कह दिया था कि यह फैसला सरकार का है इसमें वह कुछ नहंी कर सकते हैं।