लेकिन वहां कोई डॉक्टर न मिलने के कारण समय पर इलाज नहीं हो पाया।
बाद में पहुंचे चिकित्सक ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। जिससे परिजनों में
काफी रोष फैल गया।
परिजनों ने मौत के लिए अस्पताल प्रशासन को
जिम्मेदार ठहराते हुए अस्पताल के गेट पर ताला जड़ दिया और स्वास्थ्य विभाग
के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
परिजनों ने आरोप लगाया कि गंभीर रूप से
घायल बच्चे को लेकर वह करीब आधे घंटे तक चिकित्सक का इंतजार करते रहे
लेकिन कोई भी नहीं आया। जिस कारण बच्चे की मौत हो गई।
मामले की जानकारी मिलते ही क्षेत्र के मौजिज लोगों ने मौके पर पहुंच कर ताला खुलवाया और लोगों को शांत कराया।
जाखल
थाना पुलिस ने बच्चे की मां के बयान दर्ज कर कार्रवाई करते हुए शव को
पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया। फिलहाल पुलिस घटना की जांच कर
रही है।
बठिंडा से शादी समारोह में मां के साथ आया था मासूम
जाखल
गांव की नई बस्ती में बठिंडा के प्रताप नगर निवासी रानी देवी अपने दो
वर्षीय मासूम प्रभजोत के साथ चाचा की लड़की की शादी में आई हुई थी।
रानी
ने बताया कि बुधवार सुबह करीब 8 बजे उसका बेटा प्रभजोत घर से बाहर खेल रहा
था। इस दौरान साथ लगते एक मकान की दीवार अचानक उस पर आ गिरी।
हादसे
में प्रभजोत गंभीर रूप से घायल हो गया। पड़ोसियों की सहायता से प्रभजेात
को तुरंत जाखल मंडी के एक निजी अस्पताल लाया गया जहां से चिकित्सकों ने
बच्चे को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेफर कर दिया।
परिजन गंभीर
रूप से घायल मासूम को लेकर 9 बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे लेकिन
वहां कोई डॉक्टर नहीं मिला। करीब आधे घंटे तक वे डॉक्टर का इंतजार करते
रहे।
बाद में पहुंचे डॉक्टर अमरदीप ने बच्चे को मृत घोषित कर दिय।
मौत की खबर सुनते ही परिजनों में अस्पताल प्रशासन के खिलाफ रोष फैल गया।
गुस्साए परिजनों ने अस्पताल के मेन दरवाजे पर ताला जड़ दिया व स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
मामले
की जानकारी मिलते ही हरीश गर्ग सहित व गांव के सरपंच पति जीवन गर्ग, जगबीर
सिंह इत्यादि कई मौजिज लोगों ने मौके पर पहुंच कर परिजनों को संभालते हुए
ताला खुलवाया।
परिजनों ने कहा कि समय पर इलाज मिल जाता तो आज उसके कलेजे का टुकड़ा जिंदा होता।
नहीं है चिकित्सक तो बंद कर दो अस्पताल...
बच्चे
के परिजनों ने रोष जताया कि अस्पताल में जब चिकित्सक ही नहीं हैं तो उसे
बंद कर दें। उन्होंने कहा कि जाखल के एसएमओ अपने दफ्तर पर कभी नहीं रहते।
परिजनों ने विलाप करते हुए अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाया कि समय पर उपचार न मिलने के कारण ही उनके बच्चे की मौत हुई है।
डॉक्टरों की है कमी, छोड़ी देर के लिए गया था घर- चिकित्सक
वहीं
केंद्र के चिकित्सक डॉ. अमरदीप ने कहा कि वह नहाने के लिए घर गए थे। बच्चे
की जानकारी मिलते ही वह आनन फानन अस्पताल पहुंचे तो बच्चे की मौत हो चुकी
थी।
उन्होंने कहा कि अस्पताल में चिकित्सकों की प्रयुक्त
नियुक्तियां नहीं होने के कारण यह नौबत आई है। उन्होंने दावा ठोकते हुए कहा
कि अपना कार्य पूरी निष्ठा के साथ और भरपूर समय दे रहे हैं।
जब बच्चे को लाए, हो चुकी थी मौत- केंद्र प्रभारी
सामुदायिक
स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. सुशील कुमार ने कहा कि डॉ अमरदीप लगातार
ड्यूटी कर रहे थे। अस्पताल में चिकित्सकों की कमी है। वे कुछ समय के लिए ही
घर गए थे।
इतनी ही देर में बच्चे की घटना हुई। उन्होंने कहा कि
मामले की जानकारी ले ली गई है। जब बच्चे को अस्पताल लेकर आए तो उसकी मौत हो
चुकी थी।