अमित रूखाया। सीएम मनोहर लाल खट्टर की तरह शायद उनकी घोषणाओं ने भी फतेहाबाद का रास्ता भुला दिया है। अपने दो दौरों में सीएम मनोहर लाल खट्टर 42 घोषणाएं कर चुके हैं, लेकिन इनमें सात घोषणाओं की फाइल को नॉट फिजिबल बताकर बंद कर दिया गया है। वहीं, 13 योजनाओं को चंडीगढ़ से बैठे उच्चाधिकारियों की मंजूरी का इंतजार है। कुछेक योजनाओं को मंजूरी मिली है उनके रास्ते में जिले के अफसरों ने रोड़े अटका रखे हैं। फतेहाबाद सिविल अस्पताल का पत्ता सीएम घोषणाओं से पहले ही कट चुका है। वहीं, चिल्ली झील के सौंदर्यीकरण की घोषणा के दो साल से अधिक समय बाद भी धरातल पर कोई काम शुरू नहीं किया गया है।
टोहाना हलके को सबसे ज्यादा इंतजार
सीएम घोषणाओं के तहत जिले में सड़कों से संबंधित सात योजनाओं में से छह टोहाना हलके की थी। ये सभी नॉट फिजिबल बताकर रद्द कर दी गई हैं। इसमें सिधानी से कहानगढ़, नरवाना-टोहाना रोड से कर्मवीर ढाणी, कमालवाला से ढाणी लालचंद, सिधानी से कुलेरिया, बढ़ईखेड़ा से मालाहेरी रोड की सड़कें शामिल हैं।
टोहाना हलके से इतर घोटडू से एमपी सोतर जाने वाली सड़क की फाइल भी बंद कर दी गई है। इसके अलावा टोहाना के समैण में बनने वाला अतिरिक्त वाटर वर्क्स भी नॉट फिजिबल बताकर फाइल को रोक दिया गया है। जाखल मंडी में ड्रेन वाटर डिस्पोजल बनाने के लिए जिला प्रशासन को जमीन ही नहीं मिली। इतना ही नहीं, टोहाना के नए बस स्टैंड के लिए मुख्यमंत्री की मंजूरी 21 दिसंबर से पहले मिल चुकी है, लेकिन फतेहाबाद जिला प्रशासन अब तक इस दिशा में छह एकड़ जगह ही अधिग्रहीत नहीं कर सका है।
एक साल से फतेहाबाद नहीं आए हैं सीएम
सीएम मनोहर लाल खट्टर पिछले एक साल से अधिक समय में एक बार भी फतेहाबाद नहीं आए हैं। फतेहाबाद में बतौर सीएम उनका पहला दौरा 30 दिसंबर 2014 को था तो दूसरा 31 मई 2015 को टोहाना में रहा। विपक्षी नेता समय-समय पर सीएम की फतेहाबाद से दूरी के मुद्दे को उठाते रहे हैं। हालांकि, भाजपा नेता पिछले माह यह कहते रहे कि जुलाई माह में सीएम मनोहर लाल फतेहाबाद के दौरे पर आएंगे, लेकिन अभी तक सीएम के दौरे की चर्चा फतेहाबाद में शुरू नहीं हुई है।
जिले की ये महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कागजों में अटकी
घोषणा यहां अटकी
1. प्रदूषण मुक्त घग्गर नदी प्रदेश प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड
2. रतिया अस्पताल सरकार के पास लैंड ट्रांसफर पेंडिंग
3. टोहाना नया बस स्टैंड 21 दिसंबर को सीएम से मंजूरी, अभी तक छह एकड़ जमीन अधिग्रहीत नहीं
4. पेरिफेरल बाईपास टोहाना बीएंडआर हिसार
5. ब्लॉक स्टेडियम दमकौरा चीफ इंजीनियर सिंचाई, पंचकूला
6. सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट निजी कंपनी से डीपीआर का इंतजार
7. जाखल आईटीआई टेंडर पेंडिंग
8. टोहाना शहर में विकास चीफ इंजीनियर डीयूएलबी के पास मंजूरी के लिए
9. कुलां सब-तहसील इमारत प्रशासनिक मंजूरी लंबित
10. जाखल बस स्टैंड बीएंडआर चंडीगढ़ में लंबित
11. पीएचसी जाखल अपग्रेडेशन स्वास्थ्य निदेशक के पास लंबित, दो रिमाइंडर
12. धोलू से भूंदड़ा रोड एसएचएएम बोर्ड चंडीगढ़
13. एसडीएम कार्यालय रतिया चीफ आर्किटैक्ट के पास लंबित
इस बारे में बात करने के लिए जब एडीसी जेके अभीर और डीसी एनके सोलंकी से बात करने के लिए फोन किया गया तो बार-बार फोन करने के बावजूद दोनों अधिकारियों ने फोन नहीं उठाया।
जिन सड़कों को नॉन फिजिबल किया गया है, उन गांवों के किसानों ने पहले सड़क को चौड़ा करने के लिए थोड़ी-थोड़ी जमीन देने का वादा किया था। लेकिन बाद में वे वादे से मुकर गए। इस कारण यह योजना नॉन फिजिबल हो गई। समैण में जनसंख्या अतिरिक्त वाटर वर्क्स के लिए पर्याप्त नहीं थी, फिलहाल विभाग को वर्तमान जगह पर ही एक अतिरिक्त टैंक बनाने का निर्देश दिया है। जिन योजनाओं की गति धीमी है, उन्हें और तेज किया जाएगा।
सुभाष बराला, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष
पहले फतेहाबाद में सरकारी अस्पताल को सीएम घोषणाओं की लिस्ट से निकालना ही गलत कदम था। इसके बाद सीएम घोषणाओं का पूरा ना होना फतेहाबाद वासियों के साथ धोखा है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष का गृह जिला होने के बावजूद फतेहाबाद जिले के साथ भेदभाव हो रहा है। सवा साल से सीएम जिले में ना आएं, इससे साफ पता चलता है कि जिन हलकों ने भाजपा विधायक नहीं बनवाए, उनको विकास के मामले में पीछे धकेला जा रहा है।’
अशोक तंवर, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष