प्रदेश सरकार की शिक्षा नीति राजकीय स्कूल हांसगा में दम तोड़ी नजर आ रही है। यहां बच्चों को बैठने के लिए कमरे तक नहीं हैं। तपती दोपहरी में बच्चों को पेड़ की छांव का ही सहारा है। खुले आसमान तले पढ़ने को मजबूर बच्चे कई तरह की परेशानियों से जूझ रहे हैं।
बरसात या आंधी के समय तो स्कूल की छुट्टी तक करने की नौबत आ जाती है। स्कूल के कमरे कंडम घोषित करके गिराए जा चुके हैं, लेकिन उन्हें दोबारा बनवाने की ओर किसी का ध्यान नहीं है।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हांसगा में चार कमरे और बरामदे पिछले छह माह पहले कंडम घोषित कर दिए थे। शिक्षा विभाग ने उपरोक्त चारों कमरों और बरामदों की नीलामी तीन माह पहले लाखों रुपये में कर दी। ठेकेदार कमरों को तोड़कर उसका मलबा स्कूल से उठा ले गया, लेकिन विभाग ने कमरों की व्यवस्था उनकी जगह नहीं की।
कमरों के अभाव की सूचना स्कूल के तत्कालीन प्रधानाचार्य जीवन सिंह ने खंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से उच्च अधिकारियों को भेज दी थी, लेकिन कमरों का निर्माण कार्य नहीं हुआ। इसके कारण बच्चों को खुले आसमान में पेड़ों के नीचे तपती हुई धूप में पढ़ाई करनी पड़ रही है।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हांसगा के प्राचार्य कर्ण सिंह कड़वासरा ने बताया कि स्कूल में चार कमरे खस्ता हालत में थे, जिन्हें विभाग ने कंडम घोषित करके नीलाम करवा दिया, लेकिन कमरों की आवश्यकता है। इसके कारण बच्चों को बड़ी परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है। समस्या समाधान के लिए उच्च अधिकारियों को पत्र भेजकर अवगत करवाया जा चुका है।
जिला शिक्षा अधिकारी आशा ग्रोवर ने बताया कि हांसगा स्कूल में कमरों की कमी से संबंधित उन्हें कोई जानकारी नहीं है। अगर स्कूल में ऐसी स्थिति है तो बीईओ रतिया के माध्यम से लिखित प्रस्ताव भेजकर कमरों की मांग करनी चाहिए। प्रस्ताव पत्र मिलने के बाद हांसगा स्कूल में कमरों की व्यवस्था की जाएगी।