बीते वर्ष धान कटाई के बाद पराली जला पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की एवज में 410 किसानों को जुर्माना भरना पड़ा है। इन किसानों से प्रशासन ने 10 लाख 20 हजार 500 रुपये की रिकवरी की है। करीब 260 किसान ऐसे भी रहे हैं, जिन्होंने जुर्माना नहीं भरा। उनके खिलाफ केस दर्ज हुए हैं।
सरकार का प्रयास रहा कि किसानों में जागरूकता लाई जाए। इसलिए ज्यादातर किसानों पर 2500 रुपये से अधिक जुर्माना नहीं लगाया। हालांकि एक्ट में 15 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। आंकड़ों पर गौर करें तो प्रशासन के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम आया है। वर्ष 2020 के आंकड़े बताते हैं कि किसानों की रुचि पराली प्रबंधन के प्रति बढ़ी है। लोग कानून के प्रति सचेत हुए हैं।
पिछले साल कम हुआ कार्रवाई का विरोध
वर्ष 2017 से पहले पराली जलाने को लेकर सरकार ज्यादा सख्त नहीं थी। वर्ष 2017 में धान कटाई के बाद प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ गया था। हरियाणा व पंजाब से दिल्ली तक करीब एक महीना तक धुआं छाया रहा और लोगों को सांस लेना मुश्किल हो गया। इसके बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सख्ती बढ़ाई। वर्ष 2018 में प्रशासन ने सख्ती दिखाई तो विरोध प्रदर्शन हुए और कई जगह सरकारी टीमों पर हमले भी हुए। मगर वर्ष 2020 में पराली के अवशेष जलाने वालों ने बिना किसी विरोध जुर्माना भर दिया।
पराली प्रबंधन बढ़ा
गत वर्ष के आंकड़े बताते हैं कि पराली प्रबंधन बढ़ा है। कुल 1 लाख 55 हजार हेक्टेयर में धान बोया गया। वर्ष 2020 एक लाख हेक्टेयर जमीन में पराली की गांठें तैयार की और खाली जगह पर रखवा दिया। बाकी बचे कुछ किसानों ने पराली की खेत में ही बुआई कर दी।
ये रही जुर्माने की दर
पराली जलाने पर एयर एक्ट 1981 के तहत जुर्माना लिया जाता है। प्रावधान के अनुसार दो एकड़ तक 2500 रुपये, 5 एकड़ तक 5000 रुपये जुर्माना है। इससे ज्यादा जमीन में पराली जलाने पर 15000 रुपये जुर्माना लिया जाता है।
जुर्माना वसूलना प्रयास नहीं : उप निदेशक
सरकार का प्रयास किसानों से जुर्माना वसूलना नहीं रहा। सरकार चाहती है कि किसान पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं। इसलिए न्यूनतम जुर्माना लगाया गया है, ताकि किसानों को चेताया जा सके। पहले की अपेक्षा किसानों में जागरूकता भी बढ़ी है, जिससे पराली प्रबंधन बढ़ रहा है।
- राजेश सिहाग, कृषि उप निदेशक, फतेहाबाद।