फतेहाबाद। पुलिस अधीक्षक (एसपी) सिद्धांत जैन ने आमजन को आधुनिक तकनीक के युग में अपराधी तत्व लगातार नए-नए हथकंडे अपनाकर मासूम नागरिकों को धोखा देने की कोशिश कर रहे हैं। वर्तमान समय में उभरता हुआ नया साइबर फ्रॉड डिजिटल अरेस्ट स्कैम लोगों को मानसिक रूप से डराकर उनसे राशि ठगने का नया तरीका बन गया है। इस ठगी के तहत अपराधी खुद को सीबीआई, एनआईए, साइबर सेल या स्थानीय पुलिस का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल या फोन कॉल के माध्यम से पीड़ित से संपर्क करते हैं।
उन्हें यह झूठी जानकारी दी जाती है कि उनके नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी या आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तता पाई गई है। अपराधी नकली पहचान पत्र, वारंट या सरकारी दस्तावेज़ भेजकर डर का माहौल बनाते हैं। वे पीड़ित को डिजिटल रूप से गिरफ्तार करने की बात कहते हैं, जिसका अर्थ है कि पीड़ित को मोबाइल कैमरे के सामने लगातार ऑनलाइन रहना पड़ता है और यह कहा जाता है कि वह अब जांच पूरी होने तक निगरानी में है। इस दौरान उनसे बैंक डिटेल, पासवर्ड, ओटीपी और यूपीआई जैसी संवेदनशील जानकारी ली जाती है।
इससे वे अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई खो बैठते हैं। एसपी ने कहा कि भारत में किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी या पूछताछ केवल वैधानिक प्रक्रिया के तहत, प्रत्यक्ष रूप से की जाती है। न ही कोई सरकारी अधिकारी वीडियो कॉल पर आपको गिरफ्तार कर सकता है, और न ही किसी भी स्थिति में पैसे की मांग कर सकता है। ऐसे किसी भी संदेहजनक कॉल पर घबराएं नहीं, सतर्कता से काम लें और किसी भी प्रकार की ठगी या संदेह की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज करें या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।