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Fatehabad News: गोभी-आलू 6 रुपये किलो, किसान परेशान, लागत भी नहीं निकल रही

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फतेहाबाद की ​​शिवालय मार्केट में लगी सब्जी की रेहड़िया। संवाद - फोटो : सांकेतिक
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फतेहाबाद। जिले में इस वर्ष अनुकूल मौसम के चलते सब्जियों की पैदावार बढ़ गई है, लेकिन मंडियों में दाम गिरने से किसान आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं। अधिक आवक के कारण फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा और खेत से मंडी तक लाने का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है।
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सब्जी मंडियों में फुल गोभी की आवक अधिक होने के कारण थोक भाव 5 रुपये प्रति किलो तक गिर गए हैं। वहीं, माजरा गांव से आलू की आवक शुरू होने से इसके दाम 7 रुपये प्रति किलो पर हैं। किसान बताते हैं कि बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर प्रति किलो 3 से 5 रुपये खर्च आता है, जबकि बाजार में मिलने वाला भाव केवल लागत के बराबर है।

हालांकि रेहड़ी विक्रेता उपभोक्ताओं से सब्जियां 20 रुपये प्रति किलो से कम में नहीं बेच रहे, जिससे किसानों और खुदरा व्यापारियों के बीच असंतुलन पैदा हो रहा है। सब्जियों की बंपर पैदावार ने मंडियों में आपूर्ति बढ़ा दी है, लेकिन मांग में कमी और वितरण की लागत ने किसानों की आमदनी को प्रभावित किया है।
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किसान अब स्थानीय अधिकारियों और कृषि मंडी प्रबंधकों से उपाय की मांग कर रहे हैं ताकि फसल का सही मूल्य मिले और उत्पादन लागत पूरी हो सके। उन्होंने कहा कि यदि दाम स्थिर नहीं हुए तो कई किसानों की आर्थिक स्थिति और खराब हो सकती है।

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मांग में कमी और आवक में वृद्धि



सब्जी मंडी यूनियन के प्रधान सीताराम सैनी ने बताया कि सब्जियों के दामों में आई कमी का कारण मांग और आपूर्ति के बीच का असंतुलन है। जिले के लगभग हर क्षेत्र से स्थानीय सब्जियों की आवक साथ शुरू हो गई है। स्थानीय स्तर पर उत्पादन अधिक होने और बाहर की मंडियों से मांग कम होने के कारण स्थानीय बाजार में स्टॉक जमा हो रहा है, जिससे कीमतों में गिरावट आई है। वहीं मटर का निर्यात पंजाब से व गाजर का निर्यात श्रीगंगानगर से हो रहा है। इससे इन सब्जियों के भाव में गिरावट नहीं हुई है।

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किसानों ने की मांग भाव की मांग







जिले के सब्जी उत्पादक किसान रविंद्र, सुरेश, सुनील और जोगपाल आदि ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि सब्जियों के लिए भी एक न्यूनतम समर्थन मूल्य या भावांतर भरपाई योजना की व्यवस्था की जाए। यदि जल्द ही कीमतों में सुधार नहीं हुआ, तो आगामी सीजन में किसान सब्जियों की खेती का रकबा घट सकता है।

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इस बार फुल गोभी और पत्ता गोभी की खेती की थी, लेकिन मंडियों में इसका भाव 8 रुपये किलो से कम ही मिल सका है। पिछले सप्ताह गोभी की फसल में फंगस के रोग का प्रकोप हो गया था, जिसके कारण फसल को नष्ट करना पड़ा था। 5 से 7 रुपये प्रति किलो में तो लेबर का खर्चा भी पूरा नहीं होता।

सुरेंद्र सैनी, किसान।

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मटर और गाजर के भाव तेज

सब्जियों के दाम गिरे हैं, वहीं दूसरी ओर मटर, अदरक और गाजर के भाव कम नहीं हो रहे हैं। जिले में इन दोनों फसलों की पैदावार नहीं है। शहर की सब्जी मंडी में मटर, गाजर और अदरक का निर्यात दूसरे राज्यों से होता हैं, जिस कारण इनके भाव में लगातार तेजी बनी हुई है। मटर की आवक पंजाब से व गाजर की आवक श्रीगंगानगर से हो रही है।
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-मनोज कुमार, सब्जी व्यापारी

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सब्जियों के भाव प्रति किलोग्राम

आलू-6

गाजर-10

मटर-20 से 25

मूली- 5 से 6

धनिया हरा-15

पालक- 10 से 15

अदरक-40 से 60

फुल गोभी-7

पत्ता गोभी-9

प्याज-10

टमाटर-30
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