जिला में हवा चाहे कितनी भी जहरीली हो गई हो, लेकिन किसान है कि पराली जलाना बंद नहीं कर रहे। पराली जलाने के कारण फतेहाबाद में सांस व दमा के मरीजों का जीना मुश्किल हो गया है। शुक्रवार रात को जिला में 7 जगह पर फिर धान की पराली जलाई गई। जिसके साथ ही अबतक 557 जगह पर पराली जलाने के मामले सामने आ गए है। यह आंकड़ा कृषि विभाग को हरसेक द्वारा सेटेलाइट से लेकर दिया गया है। विभाग ने शनिवार को 9 और किसानों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया है। अब कुल 165 किसानों पर मुकदमा दर्ज हो चुका है।
दमघोटू हवा के चलते सांस व दमा के मरीजों का जीना मुश्किल हो गया है। आंखों में जलन, शरीर में खारिस की बीमारियों के मरीजों में भी इजाफा हुआ है। मदान अस्पताल के चिकित्सक डॉ. गुलशन मदान इन दिनों सांस, खांसी, आंखों में जलन के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। अभी तक ना कही पटाखे बज रहे है और ना ही शादियों कोई बम बज रहे हैं, लेकिन हवा में स्मॉग नजर आर ही है। हवा धुएं के कारण जहरीली होती जा रही है। शनिवार को फतेहाबाद में एक्यूआई 450 के करीब रहा। यानि वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहद खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है।