फतेहाबाद। जिले के नागरिक अस्पताल से लेकर सीएचसी और पीएचसी में जलने से झुलसे मरीजों के उपचार को लेकर सुविधा नहीं है। जिला नागरिक अस्पताल में भी बर्न केयर यूनिट नहीं है। यहां भी पीएचसी और सीएचसी की तरह झुलसे मरीजों को मरहम लगाकर अग्रोहा मेडिकल रेफर किया जा रहा है। यहां सर्जन के इंतजार में बर्न केयर यूनिट नहीं बन पाई।
कोरोना महामारी के दौरान जिला अस्पतालों में बर्न केयर यूनिट बनाने के निर्देश हुए थे लेकिन यहां पर शुरू नहीं हो पाई है। वजह ये है कि अस्पताल में जनरल सर्जन नहीं है। ऐसे मामले में सर्जन की जरूरत होती है। सर्जन द्वारा मरीज के जले स्थान की ड्रेसिंग की जाती है। इसके चलते नागरिक अस्पताल में बर्न केयर यूनिट शुरू करने का प्रस्ताव ही तैयार नहीं हुआ है।
यहां तक कम झ़ुलसे मरीजों के उपचार को लेकर भी वार्ड में कोई सुविधा नहीं है। ऐसे में झुलसे मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर किया जा रहा है। नागरिक अस्पताल फतेहाबाद में हर माह दो से तीन केस आते हैं।
पांच साल से नहीं है जनरल सर्जन
नागरिक अस्पताल में फिजिशियन और सर्जन के पद खाली है। जबकि दोनों विशेषज्ञों के पद महत्वपूर्ण है। सर्जन का पद अस्पताल में करीब पांच साल से खाली है। सर्जन न होने के चलते ऑपरेशन संबंधित केस नहीं हो रहे हैं और मरीजों को निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है।
सिलिंडर से लेकर बायलर फटने के हो चुके हैं हादसे :
नागरिक अस्पताल में सिलिंडर फटने या फिर गैस लीकेज के कारण आग लगने के कारण झुलसने के मामले आ चुके हैं। हुडा सेक्टर तीन में वर्ष 2020 में सिलिंडर फटने से बुजुर्ग झुलस गया था, जिसे नागरिक अस्पताल लाया गया और फिर रेफर कर दिया गया था लेकिन उपचार के दौरान मौत हो गई थी। वर्ष 2022 में नागपुर में एक टायर फैक्टरी में बायलर फटने से सात मजदूर झुलस गए थे, उन्हें भी नागरिक अस्पताल में सिर्फ प्राथमिक उपचार ही मिल पाया था और रेफर करना पड़ा था।
बर्न केयर यूनिट को लेकर सर्जन होना चाहिए। लेकिन यहां पर सर्जन नहीं है। इसके चलते संबंधित केस को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर किया जा रहा है। सर्जन को लेकर डिमांड मुख्यालय को भेजी गई है। यहां सर्जन आने के बाद बर्न केस मरीजों को सुविधा मिल सकती है।
- डॉ.बुधराम, एसएमओ, नागरिक अस्पताल
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फोटो नंबर 7 और 8