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दो मंजिला इमारत को कागजों में चल रही थी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान बनाने की तैयारियां

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जांच करते एसडीएम उपमंड़लाधीश सुरजीत सिह नैन। - फोटो : Fatehabad
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भूना। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान मंजूरी में फर्जीवाड़े की जांच के लिए एसडीएम फतेहाबाद ने शुक्रवार को घर-घर जाकर निरीक्षण किया। जांच प्रक्रिया के दौरान योजना में जो मकान बनाने के लिए स्वीकृत किए गए हैं उन्हें देखकर एसडीएम भी हैरान रह गए। क्योंकि ये मकान पक्के जैसे थे। मामले को लेकर उपरोक्त प्राइवेट कंपनी के कारिंदों को भी एसडीएम ने फटकार लगाई। जिन्होंने लोगों का चयन किया था।
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नगरपालिका के 13 पार्षदों ने 2 महीने पहले कंपनी के ठेकेदार पर योजना के तहत प्रति मकान की स्वीकृति देने की एवज में 50 हजार रुपये तक वसूलने के आरोप लगाए थे। डीसी ने मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की थी। कमेटी के अध्यक्ष एसडीएम सुरजीत सिह नैन के नेतृत्व में शुक्रवार को लगभग 12 मकानों की जांच की जो सभी योजना में शामिल होने के पात्र नहीं है। जिसकी रिपोर्ट तैयार करके एसडीएम ने डीसी को सौंप दी है।
यह है मामला
नगर पालिका भूना में करीब 11 महीने पहले प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनाने के लिए करीब 6000 बीपीएल व एपीएल धारकों ने आवेदन किया था। इसको लेकर 1067 लोगों को पात्र पाया गया था। योजना का लाभ देने के लिए सरकार ने एक प्राइवेट कंपनी को सर्वे एवं जिओ ट्रैकिंग की जिम्मेवारी सौंपी थी। प्राइवेट कंपनी ने अब तक कुल 67 मकान बनाने के लिए फाइनल लिस्ट जारी कर दी है। मगर प्राइवेट कंपनी के ठेकेदार ने नगर पालिका को दरकिनार करके टोहाना रोड पर अपना कार्यालय बना लिया था। नगर पालिका के पार्षद एवं वाइस चेयरमैन अनिल नड्डा, नरेंद्र बागड़ी, सुदेश दहिया, सरोज बाला, भूपेंद्र कौर, रिंपी सोनी, नीलम गर्ग, ओमप्रकाश कंबोज, डॉक्टर कश्मीरी लाल सहित कई पार्षदों ने ठेकेदार पर गरीब परिवारों से मकान को मंजूर करने को लेकर हजारों रुपये लेने के आरोप लगाए थे। पार्षदों का आरोप है कि गरीब लोगों को मकान देने की बजाय ठेकेदार ने पैसा देने वालों के मकान स्वीकृत कर दिए।
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डीसी ने बनाई थी जांच कमेटी
डीसी फतेहाबाद में मामले की जांच के लिए एक निगरानी कमेटी बनाई थी। इस कमेटी में एसडीएम अध्यक्ष नियुक्त किया था। जबकि नगरपालिका के सचिव व एमई तथा जेई को सदस्य बनाकर मंजूर हुए मकान की जांच के आदेश दिए थे। शुक्रवार को एसडीएम ने सर्वप्रथम पुराने बाजार में वार्ड नंबर 11 में रवि कुमार नामक व्यक्ति के घर की जांच की जिसको प्राइवेट कंपनी ने मकान बनाने के लिए चयनित किया हुआ था। जिसको मौके पर देख कर एसडीएम भी अचंभित रह गए। क्योंकि वह दो मंजिला इमारत थी जहां पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनाने की तैयारी कागजों में चल रही थी। इसी तरह वार्ड नंबर 5 में तीन मकानों की जांच की गई जो मौके पर अच्छी हालत में पक्के मकान थे। वार्ड नंबर 3 व 9 में भी स्वीकृत किए गए मकानों में फर्जीवाड़ा निकला।
दबाव में हस्ताक्षर किए
नगरपालिका की चेयरपर्सन राखी बाल्मीकि ने बताया कि योजना के तहत कुछ मकान गलत मंजूर हुए हैं। लेकिन क्या करें ऊपर से दबाव था। इसलिए ठेकेदार की फाइल पर साइन कर दिए।
योजना में गलत मकान मंजूर हुए हैं : एसडीएम
एसडीएम सुरजीत सिंह नैन ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मंजूर हुए मकानों का जांच की गई थी जो योजना के पात्र नहीं है। इसलिए जरूरतमंद को ही योजना का लाभ मिलना चाहिए। मामले की रिपोर्ट डीसी को दे दी गई है।
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