फतेहाबाद। उपायुक्त धीरेन्द्र खडग़टा ने जिला के किसानों से आह्वान किया है कि वे पर्यावरण की रक्षा के लिए फसल प्रबंधन योजना को अपनाएं। अपने खेतों में पराली न जलाएं, ताकि पर्यावरण संरक्षित हो। उन्होंने कहा कि जो किसान पर्यावरण को दूषित करते हुए पराली जलाने का काम करते हैं, ऐसे किसानों पर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के दिशा निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी। उपायुक्त ने बताया कि हरसेक के डाटा की रिपोर्ट के अनुसार पराली जलाने वाले किसानों पर स्वयं ही एफआईआर दर्ज हो जाएगी, इसलिए किसान पराली न जलाकर फसल प्रबंधन योजना का लाभ उठाएं।
उन्होंने कहा कि फसलों के कटाई के बाद खेतों में पराली को आग लगाना आईपीसी की धारा 188 सहपठित वायु बचाव और प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम, 1981 के तहत दंडनीय अपराध है तथा इसका उल्लंघन करने पर यदि व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो वह दंड का भागी होगा। पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है व दुर्घटना होने की भी संभावना बनी रहती है। इसके अतिरिक्त जहरीली गैसों का उर्सजन होता है जिससे भविष्य में मौसम में बदलाव के कारण बारिश में कमी व धुएं के कारण एलर्जी जैसी बीमारियां होने की संभावना बनी रहती है। मिट्टी में विद्यमान मित्र कीटों की कमी होने के कारण जमीन में उपजाऊ शक्ति घटने के साथ-साथ पशुओं के चारे में कमी होती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के दिशा निर्देशानुसार पराली जलाने वाले किसानों पर जुर्माने का भी प्रावधान है।
उपायुक्त ने फसल प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को भी निर्देश दिए है कि फसल प्रबंधन योजनाओं को सफल बनाने के लिए किसानों को अधिक से अधिक जागरूक किया जाए और उन्हें तथा नए कृषि यंत्र उपयोग में लाने के लिए प्रेरित करें। पराली को किसी भी सूरत में न जलाएं तथा इसे कृषि यंत्रों की मदद से जमीन में ही खाद के तौर पर ही इसका उपयोग करें।