रतिया। गांव ब्राह्मणवाला के राजकीय प्राथमिक विद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी के कारण शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि अभिभावकों का सरकारी स्कूल से भरोसा उठने लगा है। नाराज ग्रामीणों ने अपने दो बच्चों के नाम स्कूल से कटवा दिए हैं जबकि गांव की सरपंच ने भी अपनी बेटी का नाम विद्यालय से हटाने के लिए स्कूल मुखिया को पत्र सौंप दिया है।
विद्यालय में पहली से पांचवीं तक कुल छह कक्षाएं संचालित होती हैं। इनमें 146 विद्यार्थी नामांकित हैं। स्कूल में शिक्षकों के सात स्वीकृत पद हैं लेकिन वर्तमान में मुख्य शिक्षक सहित केवल तीन ही कार्यरत हैं। इनमें से एक शिक्षक की ड्यूटी एसआईआर समेत अन्य सरकारी कार्यों में लगी हुई है। ऐसे में छह कक्षाओं का पूरा शैक्षणिक कार्य केवल दो शिक्षकों के भरोसे चल रहा है।
सरपंच कर्मजीत कौर की अध्यक्षता में हुई बैठक में शिक्षकों की कमी पर रोष व्यक्त करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखा है। पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि सरकार बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध नहीं करा सकती तो मजबूर होकर अपने बच्चों के नाम सरकारी स्कूल से कटवा देंगे। पत्र में सरपंच ने कहा कि विद्यालय में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे अनुसूचित जाति परिवारों से हैं। पिछले दो वर्षों से लगातार शिक्षकों की कमी बनी हुई है लेकिन शिक्षा विभाग ने समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। संवाद
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शिक्षकों की नियुक्ति के बारे में कई बार उच्च अधिकारियों से मुलाकात की गई और लिखित शिकायतें भी दी गईं लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। गांव के अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं और निजी स्कूलों की महंगी फीस वहन करने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
- हरजीवन सिंह, सरपंच प्रतिनिधि।
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दो विद्यार्थियों के नाम कटवाए जा चुके हैं तथा सरपंच ने भी अपनी बेटी का नाम हटाने के लिए आवेदन दिया है। शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अतिरिक्त स्टाफ की मांग की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जा चुकी है। स्कूल में जल्द ही नए शिक्षकों की नियुक्ति की उम्मीद है।
- गुरदीप सिंह, मुख्य शिक्षक
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विद्यालय में स्टाफ की कमी है। फिलहाल अधिकांश शिक्षक 15 जुलाई तक मतदान प्रक्रिया से संबंधित ड्यूटी में व्यस्त हैं। मतदान कार्य पूरा होने के बाद विद्यालय में अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति कर दी जाएगी।
- शशि प्रकाश, खंड शिक्षा अधिकारी
बिना अध्यापक कक्षा में बैठे हुए विद्यार्थी,स्त्रोत ग्रामीण