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सुबह बैंक मैनेजर तो शाम को बन जाते हैं शिक्षक, युवाओं का बना रहे भविष्य

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गांव भिरड़ाना में युवाओं को पढ़ाते बैंक मैनेजर सुनील रायका - फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। भागदौड़ भरी जिंदगी में अधिकतर लोग जहां अपने कार्य में व्यस्त हैं वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपने काम के बाद समय निकालकर युवाओं का भविष्य बनाने की काम कर रहे हैं। ऐसे ही व्यक्ति हैं गांव भिरड़ाना के रहने वाले सुनील रायका। ये ऑरियंटल बैंक में मैनेजर के पद पर हैं लेकिन शाम को गांव में आते ही शिक्षक बन जाते हैं। रोजाना करीब 50 युवाओं को नौकरी के लिए फ्री प्रतियोगिता की तैयारी करवा रहे हैं। करीब 20 युवा ऐसे हैं जो यहां से कोचिंग लेने के बाद सरकारी नौकरी को पा चुके हैं।
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इन युवाओं को नौकरी के लिए कोचिंग देने के पीछे भी बैंक मैनेजर सुनील रायका की अपनी कहानी है। सुनील रायका का कहना है कि जिस तरह उन्होंने आर्थिक तंगी में पढ़ाई करके मुकाम पाया है। ऐसी आर्थिक तंगी में किसी युवा का सपना न टूटे, इसलिए 15 सालों से लगातार अपने खर्च पर गांव के युवाओं को कोचिंग दे रहे हैं। यहां तक कि हर सप्ताह इन युवाओं का टेस्ट भी ले रहे हैं और उसमें सबसे आगे रहने वाले युवा को सम्मानित भी अपने स्तर पर कर रहे हैं।
भूना के ओबीसी में मैनेजर के पद तैनात सुनील रायका बताते हैं कि वर्ष 2000 में पिता की मौत हो गई थी। इसके बाद जिम्मेदारी का बोझ मां पर आ गया। मां बहनों को लेकर गांव भिरड़ाना में आ गईं। यहां पर मां ने उन्हें आर्थिक तंगी के बीच पढ़ाया। खुद रेगुलर की जगह घर पर ही पढ़ाई की और 2005 में गांव के बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। ओबीसी में 2009 में सफीदों में क्लर्क के पद पर ज्वाइनिंग हुई। इसके बाद 2014 में मोहाली में ऑफिसर के पद तैनात हो गए। इसके बाद 2017 में पदोन्नत होकर मैनेजर बन गए और नकोदर में तैनात हुए। इसके बाद अब जुलाई 2018 से भूना में बैंक मैनेजर के पद पर सेवाएं दे रहे हैं।
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ऐसे करवाते हैं तैयारी
सुनील रायका का कहना है कि गांव के युवाओं को कोचिंग देने के लिए गांव भिरड़ाना में अपने खर्च पर दुकान किराए पर ले रखी है। सुबह साढ़े 6 बजे से साढ़े 8 बजे और इसके बाद शाम को साढ़े 6 बजे से साढ़े 7 बजे तक पढ़ाते हैं। इस कार्य में जेबीटी धर्मपाल भी उनका साथ देते हैं। छुट्टी वाले दिन 7 से 8 घंटे कोचिंग दी जाती है और टेस्ट भी लिए जाते हैं। सुनील रायका बताते हैं कि वर्ष 2005 से पढ़ा रहे हैं, बीच में जब बाहर ड्यूटी रही थी तो व्हाट्सएप पर बच्चों को पढ़ाते थे।
ये भी जानिए
कोचिंग ले रहे 50 युवा
ग्रुप डी में सेलेक्शन 5
क्लर्क 6
एचटेट पास 4
पुलिस 2
जेबीटी 3
वर्जन
मैं जब पढ़ाई कर रहा था तो देखा कि गांव के बच्चों के पास शहर जाकर पढ़ने के लिए किराये के लिए भी रुपये नहीं थे। खुद भी आर्थिक तंगी में पढ़ाई कर रह था, इसके बाद प्रण लिया कि अपने स्तर पर इन युवाओं को पढ़ाऊंगा। इसके बाद पिछले 15 सालों से युवाओं को अपने स्तर पर पढ़ा रहा हूं।
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- सुनील रायका, बैंक मैनेजर, ओबीसी भूना

कोचिंग के दौरान सम्मानित करते बैंक मैनेजर सुनील रायका।- फोटो : Fatehabad

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