फतेहाबाद। हेपेटाइटिस सी और बी के आशंकित और उपचार ले चुके मरीजों की मुसीबत एक बार फिर से बढ़ गई है। नागरिक अस्पताल में सैंपलिंग बंद की गई है और अंबाला में जांच किट न होने के चलते सैंपल लेने से मना किया गया है। लैब में जांच के लिए सामान आने के बाद यहां मरीजों के सैंपल लेने की प्रक्रिया शुरू हो पाएगी। करीब 250 मरीजों के सैंपल लंबित है।
नागरिक अस्पताल की ओपीडी में आशंकित मरीजों का रजिस्ट्रेशन किया जाता है और इसके अलावा उपचार ले चुके मरीजों को अगर दिक्कत है तो तीन माह बाद दोबारा टेस्ट होता है। नागरिक अस्पताल से हेपेटाइटिस सी के 20 और बी के 5 सैंपल प्रत्येक मंगलवार को अंबाला लैब में भेजे जाते हैं। अंबाला लैब में जांच होती है और इसके बाद रिपोर्ट यहां भेजी जाती है। तीन माह से करीब 250 मरीज सैंपल देने के लिए इंतजार कर रहे हैं। पहले अंबाला लैब में सैंपल जांच बंद होने के चलते यहां रोक लगा दी गई थी। डेढ़ माह पहले सैंपल लेने की प्रक्रिया दोबारा शुरू हुई तो अब फिर सामान खत्म हो गया है। ऐसे में कई मरीज निजी लैब में टेस्ट करवाने को मजबूर हैं। इसके पीछे कारण ये भी है कि सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद ही विशेषज्ञ उपचार शुरू कर सकते हैं।
माइक्रोबायोलॉजिस्ट न होने से बंद है लैब
स्वास्थ्य विभाग ने हेपेटाइटिस सी और बी की जांच को लेकर निजी लैब से अनुबंध कर रखा था। लेकिन वर्ष 2022 में इस अनुबंध को खत्म कर दिया गया और आरटीपीसीआर लैब में जांच के आदेश दिए गए। जिले में पहले माइक्रोबायोलॉजिस्ट न होने से प्रक्रिया रूकी रही, यहां नियुक्ति हुई तो 6 माह बाद पद खाली हो गया। रोहतक पीजीआई में सैंपल भेजने शुरू किए गए लेकिन वहां वर्क लोड ज्यादा होने से रोक लगा दी और अंबाला भेजे जाने लगे, लेकिन अब अस्पताल में ही सैंपल किट नहीं है।
जिले में ये है हेपेटाइटिस मरीजों की स्थिति
जिला अस्पताल में शुरू हुआ उपचार : वर्ष 2017
हेपेटाइटिस सी के पॉजिटिव मिल चुके मरीज : 5950
हेपेटाइटिस बी के पॉजिटिव मिल चुके मरीज : 92
तीन से छह माह खानी होती है दवाई
डॉक्टरों के मुताबिक हेपेटाइटिस सी के मरीजों को तीन माह दवा खानी होती है। जिन मरीजों का लीवर खराब हो जाता है, उन मरीजों का 6 महीने दवाई दी जाती है। जिन मरीजों का उपचार पूरा हो गया है, उन्हें हेपेटाइटिस-सी का कार्ड टेस्ट दोबारा करवाने की जरूरत नहीं है, कार्ड टेस्ट 15 साल तक पॉजिटिव रह सकता है।
कोट
अंबाला लैब में जिले से सैंपल भेजे जाते हैं, लेकिन वहां पर जांच के लिए सामान खत्म होने के चलते रोक लगा दी गई है। लैब में सामान आने के बाद ही जांच शुरू हो पाएगी।
-डॉ. मनीष टुटेजा, विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल