फतेहाबाद। गांव भट्टू खुर्द का रहने वाला प्रेम सिंह मेघवाल बीपीएल कार्ड धारक है। वह पिछले डेढ़ साल से बीपीएल कार्ड की कॉपी लेकर आंगनबाड़ी वर्कर्स से लेकर स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहा है कि उसका नाम आयुष्मान योजना की सूची में दर्ज किया जाए, लेकिन किसी ने उसकी ओर ध्यान नहीं दिया। हर गरीब को आयुष्मान भव: का आशीर्वाद देने वाली इस योजना के दरवाजे डेढ़ साल भी प्रेम सिंह मेघवाल के लिए बंद हैं। ये केवल एक प्रेम सिंह की कहानी नहीं है, बल्कि भट्टू खुर्द के तकरीबन 50 से अधिक लोग इस योजना के लाभ से महरूम हैं और अपनी दवाइयों पर गरीबी के बावजूद हर साल हजारों रुपये लगाने को मजबूर हो रहे हैं।
2006 से बीपीएल सूची में शामिल
सरकार ने गरीब लोगों को बेहतर उपचार उपलब्ध करवाने के लिए ही आयुष्मान योजना को लांच किया था। इसके लिए साल 2011 की आर्थिक, जातीय जनगणना को आधार बनाया गया था। गांव भट्टू खुर्द के प्रेम सिंह व उनके जैसे तकरीबन 50 से अधिक लोग साल 2006 से बीपीएल सूची में शामिल हैं। इसके बावजूद क्यों उनका नाम आयुष्मान योजना के लाभार्थियों की सूची में शामिल नहीं हुआ, इसका जवाब स्वास्थ्य विभाग के किसी अधिकारी या कर्मचारी के पास नहीं है। अधिकारी खुद भी ये मानते हैं कि बीपीएल सूची में शामिल व्यक्ति तो अपने आप इस योजना का लाभार्थी बन जाता है, लेकिन प्रेम सिंह व उनके गांव के लोगों के साथ ऐसा क्यों नहीं हुआ, इसको लेकर सभी अचंभित हैं।
घर बैठे जानें आप आयुष्मान योजना के लाभार्थी हैं या नहीं
आप आयुष्मान योजना के लाभार्थी हैं या नहीं, इसके लिए टोल फ्री नंबर 1800180044 या 14555 पर कॉल कर सकते हैं। इस दौरान कॉल आपरेटर आपसे राशन कार्ड नंबर और आधार लिंक मोबाइल नंबर मांगेगा। इसकी मदद से आपको तुरंत ये जानकारी मिल जाएगी कि आपका नाम आयुष्मान योजना के लाभार्थियों की सूची में है या नहीं। इसके अलावा मेरा डॉट पीएमजे डॉट जीओवी डॉट इन पर जाकर वेबसाइट से भी इस सूची को देखा जा सकता है।
लाभार्थी का गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए ये दस्तावेज चाहिए
1. राशन कार्ड की मूल प्रति ।
2. वोटर कार्ड या पहचान कार्ड की मूल प्रति
3. आधार कार्ड की मूल प्रति
4. पीएम दफ्तर से जारी पत्र की मूल प्रति ।
फतेहाबाद जिले में ढाई लाख हैं लाभार्थी, 50 हजार को ही मिला गोल्डन कार्ड
फतेहाबाद जिले में साल 2011 की सामाजिक जातीय जनगणना के आधार पर कुल ढाई लाख लोग आयुष्मान योजना के लाभार्थी हैं। लेकिन जागरूकता के अभाव के चलते डेढ़ साल में महज 50870 लोगों के ही गोल्डन कार्ड बनाए जा सके हैं। कुल लाभार्थियों के पांचवें हिस्से के ही गोल्डन कार्ड बनने से चिंतित स्वास्थ्य विभाग ने अब इसके लिए सक्षम युवाओं को फील्ड में उतारा है जो गांव-गांव जाकर लोगों को आयुष्मान योजना के लिए जागरूक कर रहे हैं और अपने गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं। इस योजना के तहत अभी तक फतेहाबाद जिले में 540 लोगों ने अपना उपचार करवाया है।
वर्जन
मेरे संज्ञान में यह मामला नहीं है। बीपीएल कार्डधारक होने के बाद तो आयुष्मान योजना की लाभार्थी सूची में नाम अपने आप आ जाना चाहिए। संबंधित पीड़ित इस बारे में मुझसे मिलें और हम उनका नाम सूची में शामिल करवाने का प्रयास करेंगे। मैंने हाल ही में कार्यभार संभाला है, स्टाफ से भी इस बारे में बात कर मामले का पता करूंगी।
- डॉ. संगीता अबरोल, नोडल अधिकारी, आयुष्मान योजना फतेहाबाद।