गांव बड़ोपल की सेम ग्रस्त जमीन के मामले को लेकर ग्रामीणों का धरना रविवार को भी जारी रहा। कुम्हारिया रोड पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे किसानों ने विधानसभा चुनाव के बहिष्कार की घोषणा कर दी है। धरने पर बैठे किसानों की मांग है कि उनके गांव में सेमग्रस्त भूमि के मामले में जल्द से जल्द कोई समाधान किया जाए, नहीं तो वे उपायुक्त कार्यालय पर धरना देना शुरू कर देंगे। तीसरे दिन भी कोई नेता या अधिकारी धरनास्थल पर नहीं पहुंचा। इससे किसानों में रोष बना हुआ है।
धरने पर बैठे किसान बल्लूराम खोड़, हीरालाल, आत्माराम, पिरथी डेलू, चानन सिळ पटवारी, तत्थूराम मांजू, कृष्ण कड़वासरा, नरेश जांगू ने बताया कि कुम्हारिया रोड के दोनों तरफ लगभग 1500 एकड़ का रकबा सेम की समस्या से ग्रस्त है। जलस्तर मात्र 1 से 2 फुट की गहराई पर है। नीचे से पानी ऊपर आने के कारण सारी जमीन में शोरा और अम्ल की पपड़ी जमी हुई है, जिससे फसल तो दूर की बात, घास-फूस भी नहीं पनप सकती है। पिछले कई सालों से खेतों में कोई भी फसल नहीं हुई। इससे किसानों के सिर पर लाखों रुपये का कर्जा है और इस जमीन को खरीदने के लिए कोई भी किसान तैयार नहीं है।
किसानों ने बताया कि 250 परिवारों की जमीन पर 25 सालों से कोई भी फसल नहीं हुई है। न ही इस जमीन को कोई खरीदता है। फसल न होने से वह कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं। अब उनके पास खाने को भी लाले पड़ गए हैं। बच्चों की पढ़ाई के लिए भी पैसे नहीं है। अनेक बार सरकार से फरियाद लगा चुके हैं। लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
धरने पर बैठे सेम ग्रस्त किसान समिति के बल्लूराम ने बताया कि पिछले कई सालों से किसान दर्जनों बार नेताओं और प्रशासन के चक्कर लगा चुके हैं। जिनको दी हुई हजारों शिकायतों की कापियों उनके पास है। पिछले साल एक टीम सर्वे करने के लिए आई थी। लेकिन दोबारा उस टीम ने मुंह नहीं दिखाया। उन्हें शुरू से अब तक आश्वासन ही मिल रहे हैं लेकिन सेम की समस्या का समाधान नहीं हुआ।
सरकार चाहे तो करवा सकती थी समाधान
किसानों ने कहा कि सरकार चाहती तो इस समस्या का सामाधान करवा सकती थी। इस इलाके में कम से कम दस सबमर्सिबल ट्यूबवेल लगाकर पानी नहर में डाला जाए तो जलस्तर नीचे जा सकता है और सेम खत्म हो सकती है। जलस्तर 20 से 30 फुट नीचे जाने पर जमीन नहर या बरसात का पानी तो सोखेगी तो सोरा, लवण व अम्ल नीचे चला जाएगा।
नहीं करेंगे मतदान
धरने पर बैठे किसानों ने दो टूक कहा कि सरकार को जब उनकी जरूरत ही नहीं है तो उन्हें भी सरकार जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि विधानसभा के चुनाव में कोई भी किसान वोट नहीं डालेगा और चुनाव का बहिष्कार करेगा। यदि उनकी समस्या का सामाधान न हुआ तो वह उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे जाएंगे।