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आवारा पशु : ढाई साल, 90 हादसे, 30 मौत, अफसर फिर भी मौन

Thu, 30 Jun 2016 11:41 PM IST
fatehabad
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फतेहाबाद के नेशनल हाइवे पर एसडीएम आवास के बाहर बैठे आवारा सांड - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अमित रूखाया। अफसरी ढिलाई के चलते जिले की सड़कों पर बेलगाम घूमते आवारा पशु पिछले ढाई साल में 90 हादसों का सबब बने हैं। इनमें 30 लोगों की मौत हो चुकी है और 70 से अधिक घायल हो चुके हैं। ये खुलासा पुलिस विभाग ने एडवोकेट अमित वढ़ेरा द्वारा दायर आरटीआई के जवाब में किया है। वैसे भी ये सरकारी आंकड़े हैं, आधे से अधिक हादसे तो पुलिस रिकॉर्ड में आज तक दर्ज ही नहीं हुए। मौत का ये आंकड़ा अभी थमा नहीं है। प्रशासनिक लापरवाही के चलते ये आंकड़ा निरंतर बढ़ता रहेगा, क्योंकि ढाई साल बीतने के बाद भी अभी तक जिला प्रशासन इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई तो दूर, एक कदम आगे नहीं बढ़ पाया है। अलबत्ता बीते दिनों बीघड़ रोड पर बनी नंदीशाला की ग्रांट भी बंद कर दी गई। ऐसे में हालात अभी तक वही है, जो ढाई साल पहले थे। शहर की सड़कों-गलियों में आवारा सांडों का साम्राज्य है। लोग घरों के छोटे बच्चों को गली में खेलने के लिए नहीं भेज सकते, क्योंकि उन्हें अपने लाडलों की जिंदगी से प्यार है।
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फतेहाबाद ब्लॉक में सबसे ज्यादा 21 मौतें
आवारा पशुओं का कहर जिले में सबसे ज्यादा फतेहाबाद ब्लॉक पर टूटा है। पुलिस विभाग द्वारा आरटीआई के जवाब में बताया गया है कि जिले की कुल 30 मौतों में से 21 अकेले फतेहाबाद ब्लॉक में हुई हैं। इनमें फतेहाबाद शहर में आवारा पशुओं के चलते 10 हादसे हुए हैं, जिसमें 11 लोगों की जान गई है। इसके अलावा फतेहाबाद के अलग-अलग गांवों में हुए 36 सड़क हादसों में भी 10 लोगों की जानें गई हैं। आवारा पशु रतिया के लोगों के लिए जानलेवा साबित हुए हैं। पिछले ढाई सालों में अकेले रतिया ब्लॉक में तकरीबन सात लोग आवारा पशुओं का शिकार हुए हैं। भूना में भी दो लोग आवारा पशुओं के कारण हुई दुर्घटना में मारे गए।

फतेहाबाद सदर थाने में 54 लोगों के घायल का रिकार्ड, जिले में आधे से ज्यादा घायल रिकार्ड में ही दर्ज नहीं
आवारा पशुओं के कारण जिले में हुए 90 हादसों में 70 घायल तो पुलिस रिकार्ड में दर्ज हैं। वैसे ये भी बता देें कि पुलिस विभाग द्वारा आरटीआई के जवाब में सिर्फ जाखल, शहर फतेहाबाद, सदर फतेहाबाद और रतिया ने ही घायलों की जानकारी दी है। टोहाना और भट्टू ने तो अपने इलाके में घायलों की संख्या शून्य बताई है, जबकि बीते साल टोहाना में आए दिन आवारा सांडों के कारण हादसों की सूचना आती रही है। ऐसे में इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि आवारा सांडों के कारण हुए काफी हादसे और घायलों की संख्या अभी तक सरकारी रिकार्ड में ही दर्ज नहीं है।
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 बीघड़ रोड गौशाला को सितंबर के बाद से नहीं मिली ग्रांट
आवारा पशुओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने लगातार बैठकें की। लेकिन वो बैठकें कागजी कार्यवाही से निकलकर वास्तविकता के धरातल पर कभी उतर ही नहीं पाई। डीसी एनके सोलंकी ने ही कई बार अधिकारियों की बैठक में ये दावा किया कि जल्द ही मताना वाली नंदीशाला बनकर तैयार हो जाएगी, लेकिन वो नंदीशाला भी आजतक तैयार नहीं हो पाई।

हिसार रोड पर प्रशासन द्वारा चलाई जा रही अस्थाई नंदीशाला में भी आवारा सांडों की संख्या संदिग्ध परिस्थितियों में कम होती जा रही है। इतना ही नहीं, बीघड़ रोड पर स्थित गौशाला को सांडों के रखरखाव के लिए दी जाने वाली ग्रांट भी पहले तो चक्कर कटवा-कटवा कर दी गई। लेकिन सितंबर के बाद से इस गौशाला को मिलने वाली ग्रांट भी संसाधनों के अभाव का बहाना बनाकर रोक दी गई।
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पिछले ढाई साल में फतेहाबाद जिले में आवारा सांडों के कारण हुए हादसों, मृतकों एवं घायलों का सरकारी रिकार्ड
ब्लॉक        सड़क हादसे        मृतक        घायल
फतेहाबाद शहर    10           अ 11        11
सदगर फतेहाबाद    36            10        54
रतिया        10            7        -
जाखल        6            0        6
भूना        02            02        -
टोहाना        00            00        00
भट्टू            00            00        00    


आश्वासन के अलावा अफसरों के पास कुछ नहीं
 नगर परिषद आवारा पशुओं की समस्या के समाधान के लिए लगातार प्रयासरत है। जल्द ही इस समस्या के स्थाई समाधान की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
ओपी सिहाग, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद, फतेहाबाद ।

 
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