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आंगनबाड़ी केंद्र बने प्ले वे स्कूल, पर सुविधाएं वही

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ठाकर बस्ती में आंगनवाड़ी वर्करों द्वारा बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए कार्ड पर बनाई गई आकृतिया? - फोटो : Fatehabad
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फतेेहाबाद/टोहाना/रतिया। सरकार ने नई शिक्षा नीति के तहत प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों को प्ले वे स्कूलों में बदलने का फैसला तो ले लिया, लेकिन इन प्ले वे स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं देना भूल गई। इस योजना को लागू हुए करीब 40 दिन हो गए हैं, लेकिन अभी तक सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को प्ले वे स्कूल में नहीं बदला जा सका है। जहां प्ले वे स्कूल बने हैं, वहां पर बच्चों के लिए पूरी सुविधाएं भी नहीं हैं।
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बता दें कि जिले में लगभग एक हजार आंगनबाड़ी केंद्र हैं 234 आंगनबाड़ी केंद्रों को प्ले वे स्कूलों में बदला गया है। अधिकतर आंगनबाड़ी केंद्रों में बिजली की समस्या है। पीने के पानी के आरओ भी अभी तक नहीं लगाए जा सके हैं। हालात यह हैं कि बच्चों के लिए टॉयलेट की सुविधा भी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए जो जरूरी सामान चाहिए, वह भी नहीं पहुंच पाया है। कुर्सियां व मेज भी कई आंगनबाड़ी केंद्रों तक नहीं पहुंची हैं। कई आंगनबाड़ी केंद्र तो ऐसे हैं, जहां कमरे किराये पर लिए हुए हैं और यह काफी छोटे हैं। जिले के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत काफी खस्ता है। ऐसे में सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को पलीता लगता दिखाई दे रहा है।
केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति के तहत 1 अप्रैल 2022 से सरकार ने शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों को प्ले वे स्कूल में तब्दील करने का फैसला लिया है। ताकि छोटे बच्चे जिनकी उम्र 3 से 6 साल है, उनको प्रथम कक्षा में दाखिले से पहले प्राथमिक शिक्षा का ज्ञान दिया जा सके। उनके बौद्धिक विकास को भी बढ़ावा दिया जा सके। इस योजना को आरंभ हुए सवा महीना होने को हैं, लेकिन अभी तक सरकार सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को प्ले वे स्कूलों में स्थानांतरित नहीं कर पाई हैं। अकेले फतेहाबाद जिले में 234 आंगनबाड़ी केंद्रों को प्ले वे स्कूलों में बदला गया है।
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न मेज पहुंची न कुर्सियां, बिजली भी गुल
फतेहाबाद में प्ले वे स्कूलों में अभी तक अधिकांश स्कूलों में मेज व कुर्सियां तक नहीं पहुंची हैं। सबसे बड़ी समस्या बिजली की भी है। अधिकांश आंगनबाड़ी केन्द्रों में बिजली का कनेक्शन नहीं है। यही नहीं शहरी क्षेत्र में अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्र किराए के घरों या दुकानों में चलाए जा रहे हैं, जहां पूरा स्पेस बच्चों के लिए नहीं मिल पा रहा है। आंगनबाड़ी वर्कर्स को किराए के संस्थानों के लिए मात्र 500 रुपये किराए का भुगतान होता है, जो नाकाफी है। पानी की समस्या भी कुछेक स्थानों पर है। अभी तक जहां प्ले वे स्कूल बने हैं, वहां आरओ तक नहीं लगाए गए हैं।
बच्चों के खेलने व बौद्धिक विकास का सामान भी नहीं पहुंचा
प्ले वे स्कूलों में बच्चों के बौद्धिक विकास, शारीरिक विकास व उनको बेसिक एक्टिविटीज करवाने का निर्णय लिया गया है। उनको खेल-खेल में शिक्षा देना, बातचीत का तरीका समझाना, रस्सी कूदना व अन्य गतिविधियां करवाना शामिल हैं। लेकिन इनसे संबंधित सामान इन प्ले वे स्कूलों में नहीं पहुंच रहा है। फतेहाबाद के ठाकर बस्ती में प्राइमरी स्कूल में दो प्ले वे स्कूलों के लिए दो कमरे प्राइमरी स्कूल की ओर से दिए गए हैं। लेकिन यहां पर मूलभूत सुविधाओं की कमी साफ दिखाई दी। आंगनबाड़ी वर्कर्स अपने हाथों से कार्डबोर्ड पर चित्र व ड्राइंग आदि बनाकर बच्चों को पढ़ाती दिखाई दी। यही हालात रतिया ब्लॉक का है।
रतिया में 247 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 50 आंगनबाड़ी केंद्रों को प्ले वे स्कूल बनाया गया है। जिसमें रतिया शहर में 17 वार्ड हैं और उनमें 49 आंगनबाड़ी केंद्र बने हैं, जिसमें वार्ड नंबर 4, 8 और 9 सहित तीन आंगनबाड़ी केंद्र को ही प्ले वे स्कूल का दर्जा मिला है, लेकिन इन प्ले वे स्कूलों में किसी तरह की कोई सुविधा नहीं दी गई है। शहर के वार्ड नंबर-4 में जिस बिल्डिंग में प्ले वे स्कूल चल रहा है, उसे विभाग ने कंडम घोषित किया हुआ है। हालत ऐसी है कि वह नए बने कमरों से 2 फुट नीचे हैं और आगे बरामदा का फर्श भी कच्चा है, जब भी बारिश आती है तो आंगनबाड़ी केंद्र में पानी भर जाता है। इस पर बच्चों की मजबूरन छुट्टी करनी पड़ती है। वहीं वार्ड नंबर 8 और 9 के प्ले वे स्कूलों पेंटिंग करवाई गई है और कुर्सी मेज भी भेजे गए हैं, लेकिन अभी तक दोनों केंद्रों में आरओ की सुविधा नहीं पहुंची है। रतिया में इस समय 44 आंगनबाड़ी केंद्र किराए पर हैं।
टोहाना में भी प्ले वे स्कूल के हालात खराब
टोहाना शहर से 17 किलोमीटर दूर उत्तर दिशा में स्थित है गांव पारता। इस गांव की आंगनबाड़ी को हरियाणा सरकार ने प्ले वे स्कूल में बदल दिया है। सरकार ने आंगनबाड़ी को प्ले स्कूल में बदलते वक्त इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को सुविधाओं देने के बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन धरातल पर तस्वीर बिल्कुल उलट है। आंगनबाड़ी में न पीने के पानी की सुविधा है, न बिजली का प्रबंध। प्ले स्कूल में मात्र 15 बच्चों का दाखिला है। उनमें से प्रतिदिन मात्र 10 से 12 बच्चों की संख्या रहती है। आंगनबाड़ी वर्कर उर्मिला ने बताया कि सरकार ने आंगनबाड़ी को प्ले स्कूल में तो बदल दिया है, लेकिन अभी तक सिर्फ प्ले स्कूलों में बच्चों के खिलौने ही आए हैं, इसके अलावा अन्य सुविधाओं में कोई इजाफा नहीं हुआ है। यहां पर बिजली पानी की कोई सुविधा नहीं है। भीषण गर्मी में बच्चे बिजली के बिना ही यहां बैठे रहते हैं।
फतेहाबाद ब्लॉक के लिए आए हैं 58 आरओ
फतेहाबाद की महिला एवं बाल विकास विभाग की सुपरवाइजर स्नेहलता ने बताया कि फतेहाबाद में 58 प्ले वे स्कूलों के लिए 58 आरओ आ चुके हैं, जहां-जहां पानी के कनेक्शन नहीं हैं, वहां पर पानी का कनेक्शन करवाकर आरओ लगवा दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों में बिजली की समस्या है, जिसे दूर किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इन स्कूलों में टॉयलेट आदि की सुविधा का भी प्रबंध किया जा रहा है। अभी कई आंगनबाड़ी केन्द्र काफी छोटे हैं, जिनके लिए स्थानों का चयन किया जा रहा है।
कोट
जिन स्थानों पर आंगनबाड़ी केन्द्र चल रहे हैं और इमारतें जर्जर हैं, उनके सुधार के लिए शिक्षा विभाग से बजट जारी हो गया है। मूलभूत सुविधाएं बढ़ाने के लिए प्रयास जारी हैं। सुविधाएं तो बढ़ेंगी, मगर इसमें समय लगेगा।
-सीमा रोहिल्ला, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग

रतिया के वार्ड नंबर-4 का प्ले वे स्कूल, जिसे कंडम घोषित किया गया है।- फोटो : Fatehabad

ठाकर बस्ती के प्ले वे स्कूल में पढ़ने आए बच्चे।- फोटो : Fatehabad

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