ईरान पर अमेरिका द्वारा लगाए प्रतिबंध के कारण यहां से निर्यात की गई बासमती किस्म के चावल की पेमेंट का भुगतान न होने से निर्यातकों ने वहां चावल भेजने से हाथ पीछे खींच लिए है। इसके अलावा चावल की मांग भी नहीं आ रही है। जिस कारण 1121 व 1401 किस्म के धान के दाम 2600 व 2900 रुपये प्रति क्विंटल के बीच स्थिर होकर रह गए हैं जबकि बीते वर्ष इसके दाम 3200 व 3600 रुपये प्रति क्विंटल थे। पिछले चार महीने से किसान तेजी के इंतजार में धान की फसल अपने घरों में रखकर बैठे थे जिनको अब जनवरी बीत जाने के बाद भी निराशा हो रही है। वजह है दो महीने बाद किसान गेहूं की फसल में व्यस्त हो जाएगा ऐसे में उसके पास न तो समय होगा और ना ही भंडारण की जगह।
अक्तूबर मास में जब मंडियों में धान की फसल की आवक हुई थी इसके दाम 2400 से 2600 रुपये प्रति क्विंटल के बीच घूमते रहे। किसानों व व्यापारियों दोनों को उम्मीद थी कि जनवरी आते-आते इसके दाम पिछले साल की तरह 3600 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच जाएंगे लेकिन इस बीच अमेरिका व ईरान के बीच हुए विवाद से यहां की पेमेंट ईरान में फंस गई। इसके अलावा ईरान से चावल की डिमांड नहीं आ रही। निर्यातकों का मानना है भारत से करीब 40-42 लाख एमटी बासमती किस्म का चावल निर्यात होता है। इसमें से 14 लाख एमटी अकेले ईरान जाता है। प्रतिबंध के कारण तथा पेमेंट न आने से दोनों देशों के बीच निर्यात बंद हो गया है। अक्तूबर मास में 1121 व 1401 किस्म के धान के भाव 2400 से 2600 रुपये प्रति क्विंटल थे जो धीरे-धीरे बढ़ रहे थे। दिसंबर के पहले सप्ताह तक इनके दाम 2600 से 2800 रुपये तक पहुंच गए। किसानों ने इस उम्मीद के साथ धान का अपने घरों में भंडारण कर लिया कि इसके दाम ओर बढ़ेंगे। पिछले साल इसके दाम 2900 से 3600 रुपये प्रति क्विंटल थे। भंडारण करने से किसान के पास अभी 30 से 35 फीसदी धान पड़ा हुआ है।
दोहरा नुकसान हुआ किसानों को
इस बार धान उत्पादन में किसानों को पिछले साल की बजाय दोहरा नुकसान हुआ है। पिछले साल 1121 धान का 18 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन हुआ ओर दाम 3600 रुपये क्विंटल था। इस बार 1121 का उत्पादन घटकर 15 क्विंटल रह गया है और रेट 2900 रुपये प्रति क्विंटल है। ऐसे ही 1401 का उत्पादन बीते वर्ष 20 क्विंटल था और रेट 3200 रुपये प्रति क्विंटल तो इस बार उत्पादन 18 क्विंटल तो रेट 2600 रुपये प्रति क्विंटल है।
ईरान पर प्रतिबंध के कारण वहां से पेमेंट नहीं आ रही और ना ही ईरान से चावल की डिमांड आ रही है। जिस कारण चावल के दाम नहीं बढ़ रहे।’ अजय जिंदल, एक्सपोर्टर, जिंदल राइस मिल, फतेहाबाद।
पिछली बार मंडी में 12 लाख 95 हजार क्विंटल धान मंडी में आया था जो कि इस बार कम होकर 11 लाख क्विंटल रह गया है। इस कारण किसानों भाव बढ़ने के इंतजार में अभी भी धान का स्टॉक कर रखा है।
संजीव सचदेवा, सचिव मार्केट कमेटी, फतेहाबाद।