नगर पालिका कार्यालय को तालाबंदी कर विरोध करते पार्षद
रतिया। शहर के वार्डों में गलियों के निर्माण को लेकर लगाए गए करीब चार करोड़ के टेंडरों में भेदभाव के आरोप लगाते हुए सोमवार सुबह शहर के कुछ पार्षदों ने नगरपालिका के गेट पर ताला जड़ दिया। इस दौरान नगरपालिका प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। हालांकि बाद में नगरपालिका सचिव दीपक कुमार के आश्वासन पर पार्षदों ने गेट को खोल दिया।
इसके बाद नगरपालिका सचिव के कार्यालय में हुई बैठक के बाद पार्षद थोड़ा शांत हुए। मगर उन्होंने चेतावनी दी कि उनके वार्ड में भी अन्य वार्डों की तरह विकास कार्य के टेंडर नहीं लगाए तो वह कॉलोनीवासियों के साथ मिलकर नगरपालिका कार्यालय में धरने पर बैठ जाएंगे। पार्षदों के विरोध प्रदर्शन को रतिया के पूर्व विधायक जरनैल सिंह ने भी समर्थन देते हुए नगरपालिका अधिकारियों और प्रदेश सरकार को जमकर कोसा।
वार्ड नंबर 2 और 6 में एक भी टेंडर नहीं लगाया
पार्षद गुरप्रीत गोपी, गुरविंद्र सिंह व हैप्पी सैनी ने नगरपालिका अधिकारियों पर आरोप लगाया कि गत दिनों नगरपालिका द्वारा शहर के 17 वार्डों के विकास कार्यों के लिए करीब चार करोड़ के टेंडर लगाए गए थे। अधिकारियों ने उन टेंडरों में शहर के वार्डों और पार्षदों के साथ भेदभाव करते हुए टेंडरों में वार्ड नंबर 2 और 6 में एक रुपये का भी टेंडर नहीं लगाया बल्कि कई वार्डों में 40 लाख से लेकर 90 लाख तक के टेंडर लगाए गए। वहीं वार्ड नंबर 8, 14, 15 में मात्र तीन से पांच लाख के टेंडर लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि टेंडरों के भेदभाव के चलते पार्षदों में भारी रोष है। इसलिए उन्होंने बजट बैठक में शामिल होने के बजाय नगरपालिका के गेट पर तालाबंदी कर विरोध जताया है। विरोध प्रदर्शन कर रहे पार्षदों ने कहा कि लगाए गए सभी टेंडरों को रद्द करके दोबारा से सभी वार्डों में 1-1 करोड़ के समान रूप से विकास कार्यों के टेंडर लगाए जाए। पार्षदों द्वारा नगरपालिका कार्यालय को ताला लगाए जाने की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे पूर्व विधायक जरनैल सिंह ने पार्षदों का समर्थन किया और कहा कि नगरपालिका वार्डों के साथ पक्षपात कर रही है। शहर में अधिकांश गलियां ऐसी हैं, जो पहले बनी हुई हैं। उन्हीं गलियों को कागजों में नई बनी दिखाकर घोटाला किया जा रहा है। पूरे मामले की जांच होनी चाहिए।
कुछ पार्षदों को उनके वार्ड के विकास कार्य को लेकर समस्या थी। इसको लेकर उन्होंने पार्षदों को समझाया है कि उनके विकास कार्यों की लिस्ट बनाकर कमेटी को भेजकर पास करवाएंगे। उसके बाद विकास कार्य शुरू करवा दिए जाएंगे।
दीपक कुमार, सचिव, नगरपालिका रतिया