रतिया। नगर पालिका रतिया के पार्षदों ने अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि वे डोर टू डोर सफाई सेवा के नाम पर फर्जी बिल बनाकर लाखों रुपये की घोटाला कर रहे हैं। पार्षदों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को शिकायत भेजकर विजिलेंस या मुख्यमंत्री उड़नदस्ता से मामले की जांच कराने की मांग की है।
पार्षद गौरव शर्मा, विजय कुमार, मिट्ठू सैनी, मनदीप सिंह और अन्य शहरवासियों ने मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में कहा कि नगर पालिका के कुछ अधिकारियों ने डोर टू डोर सेवा के नाम पर कई महीने से फर्जी बिल बनाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस सेवा के लिए टेंडर तो पहले ही खत्म हो चुका था, लेकिन इसके बावजूद नगर पालिका के अधिकारियों ने चार गाड़ियों को कागजों में चलने का दिखावा किया।
असलियत में शहर में केवल एक ही गाड़ी काम कर रही है, जबकि तीन गाड़ियां खराब बताकर अलग-अलग मेकेनिकों के पास खड़ी कर दी गई हैं। पार्षदों के मुताबिक, नगर पालिका के अधिकारी इन खराब गाड़ियों के लिए फर्जी बिल बनाते हैं और इन्हें तकनीकी शाखा से अनुमोदित करवा लेते हैं। इस तरह से लाखों रुपये की घोटालेबाजी हो रही है।
उन्होंने कहा कि शहर में पिछले कुछ महीने से डोर टू डोर सफाई की सेवा बंद हो चुकी है और लोग खुद अपना कचरा दो पहिया वाहनों से डंपिंग प्वाइंट पर लेकर जा रहे हैं, लेकिन नगर पालिका के अधिकारियों ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की है। पार्षद गौरव शर्मा ने कहा कि इस मुद्दे पर पहले भी शिकायत एसडीएम रतिया और सीएम विंडो में की जा चुकी है, लेकिन नगर पालिका के अधिकारियों ने कोई जांच नहीं की।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जांच नहीं की जाती तो पार्षद धरने पर बैठने को मजबूर होंगे। पार्षदों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं, जब नगर पालिका सचिव शुभम कुमार से मोबाइल फोन पर इस मामले पर प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।