भूना। प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर लाभार्थियों को मिलने वाली राशि में अधिकारी को नजराना देने के नाम पर बड़ा गड़बड़झाला हुआ है। जिला नगर आयुक्त संजय बिश्नोई के आदेश पर योजना के लाभार्थियों के खाते में जैसे ही पक्का घर बनाने के लिए पहली, दूसरी और तीसरी किस्त डाली गई तो कमीशन की राशि निकाल ली गई।
कुछ पार्षद व अधिकारी के दलालों ने बीपीएल परिवारों के पहले ही बैंक अकाउंट का खाता खुलवाकर डेबिट कार्ड, साइन किए हुए चेक, बैंक पासबुक व आधार कार्ड अपने पास रख लिए। योजना की किस्त डलते ही लाभार्थियों के बैंक खाते से एक लाख की राशि में से 30 हजार से लेकर 60 हजार तक का कमीशन काट लिया गया। इससे लाभार्थियों में आक्रोश फैल गया। मामला विवादित होते देखकर एक पार्षद ने लाभार्थी के घर पर जाकर 60 हजार रुपये व दस्तावेज लौटा दिए। योजना में भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारी, कुछ पार्षदों और दलालों के खिलाफ वीरवार को पीड़ित बीपीएल परिवार विजिलेंस व नगर आयुक्त को शिकायत देंगे।
पीड़ित बिमला देवी, मोना देवी, कृष्णा देवी, शशिबाला, संतोष, राखी आदि ने आरोप लगाया कि वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर सर्वे हुआ था, जिसमें मकान की जिओ टैगिंग की गई थी। उनके कच्चे घर पक्के बनाने के लिए मंजूर हो गए। परंतु बैंक खातों में किस्त नहीं डाली गई। तभी से लेकर आज तक नगरपालिका कार्यालय में लगातार धक्के खा रहे थे। वर्ष 2022 में जलभराव के कारण उनका रिकॉर्ड नष्ट होने का हवाला देकर उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया गया। सितंबर के पहले सप्ताह में उनके घर पर पार्षद व कुछ लोगों ने आकर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत किस्त देने के लिए बताया था। जिन्होंने उनका आधार कार्ड लेकर फिनो बैंक उकलाना में उनके नए खाते खोल दिए।
लाभार्थियों ने बताया कि दो दिन बाद उनके मोबाइल नंबर पर प्रधानमंत्री आवास योजना की एक लाख की राशि आने का मैसेज आया। जब वे फिनो बैंक उकलाना में चार दिन बाद गए तो उनके खाते से अलग-अलग रुपये निकाले हुए मिले। पीड़ितों का आरोप है कि एक लाख रुपये की राशि में से 30 हजार से लेकर 60 हजार तक का कमीशन काट लिया गया। वीरवार को भ्रष्टाचारियों के खिलाफ शिकायत देकर अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की जाएगी।
-
भ्रष्टाचार के आरोपों में सुर्खियों में रही है नगरपालिका भूना
नगरपालिका भूना में प्रधानमंत्री आवास योजना में 2100 परिवारों के नाम वर्ष 2017 में मंजूर हुए। योजना में अधिकारियों की मिलीभगत और पार्षदों के चहेतों को लाभ पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए गए। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर तत्कालीन एसडीएम सुरजीत नैन ने जांच की तो गड़बड़ी मिली थी। जिओ टैगिंग करने वाली कंपनी की सूची को निरस्त कर दिया था और आधिकारिक तौर पर मौके पर जाकर जांच की गई थी। उसमें लगभग 500 परिवार पात्र पाए गए थे। परंतु 2022 में शहर में जलभराव होने के कारण नगरपालिका अधिकारियों ने पुराना रिकॉर्ड नष्ट घोषित कर दिया। इसलिए अचानक 170 परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली व दूसरी तथा तीसरी किस्त डाले जाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
-
उकलाना के बैंक में खाते खोले और दो दिन बाद आई किस्त
लाभार्थियों का आरोप है कि भूना के बजाय उनके बैंक खाते उकलाना में क्यों खुलवाए गए। उन्हें शहर से 25 किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है। भूना में 15 से ज्यादा सरकारी व गैर सरकारी बैंक हैं। बैंक के अधिकारी भी उनके घर को रात को पहुंचे थे और साइन व अंगूठा लगवा कर दस्तावेज लेकर चले गए। उनके डेबिट कार्ड, बैंक कॉपी तथा चेक पार्षद व दूसरे लोगों ने अपने पास रख ली थी। जब हमने पार्षद व दूसरे लोगों से पूछा तो बताया कि अधिकारियों को उनके हिस्से का कमीशन दिया गया है क्योंकि तुम्हारी किस्त 2017 से रुकी हुई थी।
-
सम्मिलित अधिकारी व अन्य लोगों पर होगी कार्रवाई : डीएमसी
प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर नगरपालिका भूना में लाभार्थियों की लिखित में कोई शिकायत नहीं आई है। मगर फिर भी योजना में गड़बड़झाला हुआ है तो भ्रष्टाचार में सम्मिलित अधिकारी, पार्षद या दलालों पर कानूनी कार्रवाई होगी। इसकी जांच तत्काल प्रभाव से की जाएगी।
संजय बिश्नोई, जिला नगर आयुक्त