फतेहाबाद। शहर के शिव चौक में बंदरों के झुंड के हमला करने के बाद जान बचाने के लिए छत से कूदी शिक्षिका को परिजन व गली निवासी एंबुलेंस पर हिसार से सीधा नगर परिषद कार्यालय में शाम चार बजे लेकर पहुंचे। यहां पर परिजनों ने घायल महिला को नगर परिषद प्रधान राजेंद्र सिंह खिंची के कक्ष के बाहर स्ट्रेचर पर लिटा दिया और जमकर नगर परिषद प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। लेकिन नगर परिषद का कोई भी अधिकारी डेढ़ घंटे तक नहीं पहुंचा। देर शाम तक लोग धरने पर थे।
नगर परिषद उपप्रधान सविता टुटेजा मौके पर पहुंची और इस दौरान लोगों ने खूब खरी-खोटी सुनाई और कहा कि कुर्सी छोड़ दें और जनता खुद संभाल लेगी। शर्म की बात है कि नगर परिषद कार्यालय में बात सुनने को कोई अफसर नहीं है। मौके पर पार्षद मोहन लाल नारंग, प्रतिनिधि किट्टू बजाज, योगी हंसराज, पार्षद निर्मल सिवाच और ज्योति मेहता पहुंचे। लेकिन 6 बजे तक कोई अफसर न आने पर परिजनों और गुस्साए लोगों ने नगर परिषद के मुख्य गेट के आगे मौजूद पार्षदों के साथ धरना शुरू कर दिया है। धरने में कांग्रेस नेता डॉ. वीरेंद्र सिवाच, आनंदवीर गिल्लाखेड़ा, श्रीश्याम गो सेवा समिति के सदस्य भी पहुंचे। घायल महिला आशु के पति नीरज का कहना है कि नगर परिषद अधिकारियों की लापरवाही के कारण ये हादसा हुआ है। तीन माह से बंदर पकड़ने के लिए नगर परिषद अधिकारियों के चक्कर काट रहा था। लापरवाह अधिकारियों खिलाफ कार्रवाई की जाए। पत्नी शिक्षिका थी, हादसे के बाद वह अब नौकरी नहीं कर पाएगी, छोटे बच्चों को भी वह नहीं संभाल पाएगी। इसके अलावा इलाज पर भी खर्चा हुआ है। इसलिए उसे मुआवजा दिया जाए।
ईओ को शिकायत देने आए तो वह हंसते रहे
नगर परिषद कार्यालय में हंगामा कर रहे शिव चौक निवासी दिव्या, नीरज, राकेश, बिट्टू ने कहा कि शिव चौक क्षेत्र में बंदरों का आतंक है। इसको लेकर कई बार अफसरों से मिले हैं लेकिन बार-बार आश्वासन दिया गया। पिछले दिनों कार्यकारी अभियंता से मिले थे तो उन्होंने एसआई महेश को पकड़वाने के आदेश दिए थे लेकिन नहीं पकड़ा गया। रविवार शाम को आशु घर मौजूद थी तो बंदरों के झुंड ने हमला कर दिया। जान बचाने के लिए वह छत से कूद गई। जिससे उसकी दोनों टांगें टूट गईं और ऑपरेशन हुआ है। युवती दिव्या ने कहा कि जब हादसे के बारे में ईओ राजेंद्र सोनी को बताने के लिए आए तो वह हंसने लगे और कहा कि बंदर पकड़ने के लिए अनुमति लेनी होगी।
पार्षद बोले- हमारी भी नहीं होती है सुनवाई
नगर परिषद कार्यालय में पहुंचे पार्षद मोहन लाल नारंग, निर्मल सिवाच, ज्योति मेहता, प्रतिनिधि किट्टू बजाज ने कहा कि उनकी भी यहां पर सुनवाई नहीं होती है। काम करवाने के लिए जो एजेंडे दिए जाते हैं उनकी तरफ ध्यान नहीं दिया जाता है। तीसरी बार पार्षद चुनी गई ज्योति मेहता ने कहा कि पहली बार ऐसा हाउस देखा है जिसमें पार्षदों की सुनवाई नहीं होती है।
डीएमसी भी नहीं पहुंचे आश्वासन देने
नगर परिषद कार्यालय में जब हंगामा शुरू हुआ तो ईओ राजेंद्र सोनी और कार्यकारी अभियंता अमित कौशिक नहीं थे। पार्षदों ने हंगामे की सूचना जिला नगर आयुक्त संजय बिश्नोई को दी। यहां तक उपप्रधान सविता टुटेजा ने भी अवगत करवाया। लेकिन वह भी नहीं पहुंचे।
मथुरा से पहुंची टीम हिसार में रुकी, नहीं शुरू हुआ अभियान
नगर परिषद ने बंदरों को पकड़ने के लिए एजेंसी को ठेका दे रखा है। 2150 रुपये प्रति बंदर के हिसाब से ठेका दिया गया है। नगर परिषद का दावा है कि 300 बंदर पकड़ने की अनुमति थी और 280 पकड़े जा चुके हैं। इसके अलावा इमरजेंसी अनुमति लेकर मथुरा से टीम बुलाई गई है। उप प्रधान सविता टुटेजा का कहना है कि एजेंसी बुधवार को मथुरा से चली थी और गाड़ी का हिसार में एक्सीडेंट हो गया। इसके चलते वीरवार को अभियान शुरू नहीं हुआ है। बंदरों को पकड़ने के लिए पिंजरा गाड़ी में ही है।
कोट
मामला मेरे संज्ञान में आया है। बंदरों को पकड़ने के लिए ईओ को अनुमति दी जा चुकी है। शहर में जितने भी बंदर है उन्हें पकड़वाया जाएगा। जहां तक मुआवजा की बात है। ये जांच का विषय है।
- संजय बिश्नोई, जिला नगर आयुक्त