एक नजर दौड़ाएं तो पिछले कुछ दिनों में थोक बाजार में सरसों के तेल में लगभग 20 रुपये प्रति लीटर का उछाल आया है जिसके चलते फुटकर बाजार में भी सरसों का तेल काफी महंगा हो गया है।
थोक बाजार में सरसों के तेल का भाव 100 रुपये प्रति लीटर से ऊपर निकल गया है। जिसका भाव महज दो माह पहले 80 रुपये प्रति लीटर था।
अब आम दुकानों पर सरसों के तेल की कीमत 120 रुपये प्रति लीटर तक जा पहुंची है। सरसों के तेल के अलावा सोयाबीन, रिफाइंड और डालडा घी के दामों में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है।
कमजोर फसल और कालाबाजारी से दामों में उछाल
थोक व्यापारियों की मानें तो सरसों की कमजोर फसल के चलते भाव महंगे हुए हैं। इसके अलावा त्योहारी सीजन से पहले तेल की कालाबाजारी की आशंका भी जताई गई है।
थोक विक्रेताओं के अनुसार दीवाली के बाद दामों में कमी आने की संभावना तो है लेकिन अगर कालाबाजारी जारी रही तो आने वाले काफी समय तक दाम काबू में नहीं आएंगे।
कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पिछले साल जिले में सरसों बिजाई रकबा लगभग 12 हजार हेक्टेयर था। लेकिन बेमौसमी बारिश और पिछले साल पड़े पाले ने भी सरसों की फसल को नुकसान पहुंचाया था।
इस बार अभी बिजाई शुरू हुई है। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस बार विभाग का लक्ष्य पिछले साल से अधिक रकबे पर सरसों की बिजाई करवानी है।
सैंपलिंग नहीं होने से मिलावटखोरी भी चरम पर
सरसों के तेल का इस्तेमाल अधिकतर घरों में सब्जियां और आचार आदि बनाने के लिए होता है। इसके अलावा दिवाली पर भी सरसों के तेल से दीये भी जलाए जाते हैं।
ऐसे में इसकी मांग बढ़ने के कारण दाम आसमान पर पहुंच गए हैं। दामों में हुई बढ़ोतरी के चलते सरसों के तेल में मिलावट का खतरा भी बढ़ गया है। सरसों के तेल में रिफाइंड तेल की मिलावट की जा सकती है।
जिसके कारण बाजार में मिलावटी सरसों तेल भी उपलब्ध हो सकता है। इस प्रकार के तेल की कीमत कम है। दिवाली पास आते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शहर में खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग तो शुरू कर दी है लेकिन खाद्य तेलों की सैंपलिंग नहीं ली जा रही है।
जिस कारण मिलावटी तेल का कारोबार भी बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में सरकारी ढिलाई के चलते आम आदमी को पीसना पड़ रहा है।
क्या कहते हैं थोक व्यापारी
मांग में आई है कमी
कमजोर सरसों की फसल के कारण सरसों के तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। हालांकि रिफाइंड एवं सोयाबीन के दामों में बहुत ज्यादा तेजी नहीं है। सरसों के तेल की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के चलते मांग में भी कमी आई है।
श्रवण कुमार, छाबड़ा ट्रेडिंग कंपनी, पुरानी सब्जी मंडी ।
त्योहारी सीजन में बढ़ जाते हैं दाम
पिछले दो-तीन माह में अचानक ही सरसों का तेल महंगा हुआ है। हालांकि अभी सरसों की बिजाई शुरू हुई है। नई फसल आने पर सरसों के दामों में काफी कमी आने की संभावना है। त्योहारी सीजन के कारण भी दाम अक्सर बढ़ जाते हैं।
बंटी सरदाना, थोक विक्रेता ।
रिटेल कारोबारियों को भी आ रही परेशानी
ग्राहक हो रहे नाराज
दामों में आई बढ़ोतरी से परेशानी तो हो ही रही है। जिस ग्राहक ने एक माह पहले 110 रुपये प्रति लीटर सरसों का तेल खरीदा हो, वो अब 125 से 135 रुपये प्रति लीटर खरीद रहा हो तो सवाल उठाएगा ही।
इसके चलते बिक्री पर भी असर पड़ा है। ग्राहक नाराज होता है वो अलग। रिफाइंड, डालडा और सोयाबीन के तेल के दामों में भी वृद्धि हुई है।
रमेश कुमार, संचालक, पंकज वैरायटी स्टोर ।
बंद करनी पड़ेगी सरसों तेल की बिक्री
सरसों के तेल की मांग कम हुई है। सरसों की बजाए अब ग्राहक रिफाइंड को तरजीह दे रहा है। भाव इसी तरह बढ़ते रहे तो सरसों के तेल की बिक्री ही बंद करनी पड़ेगी। सरकार कालाबाजारी पर रोक लगाए ताकि खाद्य तेलों के दामों में बढ़ोतरी पर अंकुश लग सके।
रमन नारंग, संचालक नारंग वैरायटी स्टोर, फतेहाबाद ।
गृहणियों का बिगड़ा बजट
अब कम करते हैं सरसों तेल का इस्तेमाल
पहले महीने में औसतन पांच लीटर सरसों के तेल की खपत थी लेकिन अब एक दम से 20 से 25 रुपये प्रति लीटर दाम बढ़ने से सरसों के तेल को कम इस्तेमाल करना पड़ रहा है। डालडा, रिफाइंड और सोयाबीन के तेल भी कम खपत कर रहे हैं।
सुनीता, गृहिणि, फतेहाबाद ।
बजट में 250 की हुई बढ़ोत्तरी
रिफाइंड और सोयाबीन के तेल के दाम कम बढ़े हैं लेकिन सरसों के तेल के दामों ने बजट ज्यादा बिगाड़ा है। पहले सब्जी आदि सरसों के तेल में बनाते थे लेकिन अब काफी बदलाव हुआ है।
इसके अलावा आचार आदि बनाने के लिए भी सरसों के तेल का कम से कम इस्तेमाल करते हैं। बजट मेें लगभग 200 से 250 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
नीलम, गृहिणि, फतेहाबाद ।
महंगाई काबू करने में असफल भाजपा सरकार
भाजपा सरकार महंगाई को काबू नहीं कर पा रही है। दाल के बाद अब सरसों के तेल में भी आग लगने लगी है। किसानों को मंडी में भाव मिल नहीं रहे जबकि उपभोक्ताओं को बाजार में अनापशनाप भाव देने पड़ रहे हैं। बिचौलियों और कालाबाजारी पर लगाम लगाने में असफल साबित हुई है सरकार
चरणजीत सिंह रोड़ी, सांसद, सिरसा संसदीय क्षेत्र।