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लोकेशन जांचने में भी प्रशासन की खामियां, सकुशल घर बैठी छात्रा, रिपोर्ट में दिखाया नो-रिप्लाई

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गांव समैन में अपने परिवार के साथ यूक्रेन से लौटा अमित गिल। - फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। यूक्रेन में फंसे और वहां से लौट रहे नागरिकों की स्थिति जांचने में भी प्रशासन खामियां बरत रहा है। जो विद्यार्थी सकुशल घर लौट चुके हैं, उनकी स्थिति में नो-रिप्लाई दिखाया जा रहा है। वहीं, कुछ विद्यार्थी ऐसे भी हैं, जिनकी जानकारी ही प्रशासन नहीं जुटा पाया है। प्रशासन द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में भट्टू निवासी छात्रा आन्या के बारे में नो-रिप्लाई लिखा हुआ है जबकि वह सकुशल अपने परिवार के साथ है। उसे घर लौटे हुए भी एक सप्ताह हो चुका है। इसी तरह रत्ताखेड़ा गांव के विपिन पवार यूक्रेन से हंगरी में पहुंचे हुए हैं जबकि प्रशासन की सूची में उसका नाम ही नहीं है। जिले के 71 नागरिकों में से अभी तक 32 नागरिक घर लौट चुके हैं।
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गौरतलब है कि यूक्रेन से लौट रहे और वहां रुके हुए लोगों का पता लगाने के लिए उपायुक्त प्रदीप कुमार की ओर से तहसीलदारों की ड्यूटी लगाई गई है। रोजाना ग्राउंड लेवल से जानकारी लेकर रिपोर्ट तैयार करके सरकार को भेजी जा रही है। वहीं प्रशासन की सूची के मुताबिक अभी भी 9 लोग यूक्रेन में ही फंसे हुए हैं। इनमें से तीन लोग तो खारकीव शहर में है, जहां काफी गोलीबारी हुई है। बाकी यूक्रेन से निकलकर ज्यादातर लोग पोलैंड, रोमानिया और हंगरी में रुके हुए हैं। प्रशासन के अनुसार फतेहाबाद के रहने वाले राजन कुमार, अंकित, जसप्रीत यूक्रेन के खारकीव शहर में हैं। इसके अलावा हरिपुरा के मुकेश, टोहाना के कुनाल, कमल सैनी, मुनीष, सुमित और भट्टू कलां के सुशील कुमार यूक्रेन के अन्य शहरों में हैं।
छोटे भाई से वीडियो कॉल करके पूछ रहे हालात
गांव रत्ताखेड़ा निवासी विपिन पवार कुछ दिन पहले ही एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए यूक्रेन गए थे। ताजा हालातों के बाद वह यूक्रेन से निकलकर हंगरी पहुंच चुके हैं। विपिन के बड़े भाई हरीश पवार दिन में कई बार वीडियो कॉल करके अपने छोटे भाई का हाल जान रहे हैं। हरीश कहते हैं कि यूक्रेन से निकलने के बाद परिवार को राहत मिली है। फिलहाल विपिन कुछ दिन हंगरी में ही रहेगा। इसके लिए परिवार ने व्यवस्था कर दी है। वहीं यूक्रेन के ओडेसा शहर में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा गांव समैन का छात्र अमित गिल भी घर लौट आया है। अमित बुधवार रात करीब 10 बजे अपने गांव पहुंचा। बेटे को अपने बीच पाकर परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अमित गिल ने बताया कि वह यूक्रेन के ओडेसा शहर में फंसा हुआ था। सोमवार को वह अपने दोस्तों के साथ हंगरी बॉर्डर पर पहुंचा था। वहां मंगलवार को हंगरी में प्रवेश किया। इसके बाद वहां से भारत सरकार के निर्देशानुसार फ्लाइट में सवार होकर दिल्ली पहुंचा।
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यूक्रेन से लौटे पोते को देखकर भावुक हुए दादा-दादी
यूक्रेन में एमबीबीएस के ही छात्र भूना निवासी मितेंद्र सोनी भी सकुशल घर लौट आए हैं। मितेंद्र वीरवार को रोमानिया से फ्लाइट में दिल्ली और उसके बाद भूना पहुंचे। दादा धर्मपाल व दादी सावित्री से मितेंद्र मिले तो पूरा परिवार भावुक हो गया। मितेंद्र पिछले तीन दिनों से रोमानिया बॉर्डर पर ठहरे हुए थे। सकुशल घर पहुंचने पर परिवार ने मिठाइयां तक बांटी। मितेंद्र ने बताया कि वह पिछले चार वर्षों से ओडेसा नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। वर्ष 2018 में उन्होंने यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया था। पिछले 3 साल में वह अच्छे अंक लेकर उत्तीर्ण रहा है। मितेंद्र ने बताया कि रोमानिया बॉर्डर पर उन्हें कोई ज्यादा परेशानी नहीं हुई। 26 व 27 फरवरी को लगातार दो दिनों तक ट्रेन के लिए इधर-उधर भटकते रहे। मगर ट्रेन सुविधा नहीं मिली तो 28 फरवरी को टैक्सी से मालदोहा तक पहुंचा। 1 मार्च को मालदोहा से रोमानिया बॉर्डर तक बस से गए। फिर रोमानिया से फ्लाइट के माध्यम से दिल्ली पहुंचे। दिल्ली एयरपोर्ट से पिता विनोद कुमार, मां सरोज व चाचा भूपेंद्र सोनी कार से लेकर आए।
रतिया की दो छात्राएं व एक छात्र भी रोमानिया से आए
रतिया के तीन छात्र वीरवार शाम तक दिल्ली पहुंच गए। जहां उनके परिजन दिल्ली एयरपोर्ट से लेकर अपने घरों की तरफ रवाना हुए। एयरपोर्ट पर अपनी बेटी को लेने पहुंचे लवली अरोड़ा ने बताया कि उसकी बेटी गरिमा अरोड़ा और उसके साथ पढ़ने वाली सुखा अरोड़ा की बेटी सुमन रोमानिया में थी। वहां से भारत सरकार के सहयोग से दिल्ली पहुंची। अपने बच्चों से मिलकर परिवार खुश हैं। पिछले आठ दिनों के बाद राहत की सांस ली है। वहीं, नागपुर निवासी विनोद भी रोमानिया से दिल्ली पहुंचा है।
पोलैंड में रुके चंदोकला निवासियों ने किया आने से इनकार
यूक्रेन में रतिया क्षेत्र के गांव चंदो कलां निवासी सतनाम सिंह के दो बेटे अमनदीप व गगन के अलावा अमनदीप की पत्नी दीक्षा और उनका एक साल का बेटा गांव के ही कुलविंदर कौर, गुरुदत्त सहित पोलैंड में अपने रिश्तेदारों के पास ठहरे हुए हैं। उन्होंने फिलहाल भारत आने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि वे अभी पोलैंड ही रहेंगे।
लाली का युवक यूक्रेन में फंसा, परिजनों ने की वापस लाने की मांग
गांव लाली निवासी युवक राजन कुमार यूक्रेन व रूस के बीच छिड़ी जंग में फंसा हुआ है। राजन कंबोज यूक्रेन की खारकीव यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई करने 10 दिसंबर 2021 को गया था। मगर वहां भीषण बमबारी के बीच फंसा हुआ है। कल खारकीव को खाली करने के आदेश भी दिए गए थे। कल से हो रही बमबारी के बीच जहां खारकीव में भारी तबाही हुई है, वहीं राजन का परिवार काफी भयभीत है। परिजनों ने सांसद सुनीता दुग्गल के जरिये केंद्र सरकार से गुहार लगाई है कि उनके बच्चे की मदद कर उसे तुरंत देश वापस लाया जाए।
कोट
प्रशासन जिले के यूक्रेन या दूसरे देशों में ठहरे हुए लोगों की जानकारी जुटा रहा है। परिजनों से बातचीत भी हुई है। कुछ लोगों से संपर्क नहीं हुआ है। प्रयास लगातार जारी हैं।
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-प्रदीप कुमार, डीसी, फतेहाबाद

भूना में परिवार के साथ यूक्रेन से लौटा छात्र मितेंद्र सोनी।- फोटो : Fatehabad

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