फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Fatehabad News: किसानों की उम्मीदों पर बिछी सफेद चादर

Sun, 18 Jan 2026 12:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
विज्ञापन
सेमग्रस्त भूमि में जमा शोरा। संवाद
विज्ञापन
फतेहाबाद। मेरे पास 15 एकड़ कृषि भूमि है, लेकिन सेम के कारण खेत दलदल में तब्दील हो गया है। इसमें किसी भी फसल की पैदावार नहीं होती। बीते 15 साल से खेत वीरान है। भूजल स्तर कुछ कम होता है तो मानसून की बारिश फिर से समस्या बढ़ा देती है। कहीं से समाधान की किरण नजर नहीं आ रही...। यह पीड़ा गांव ठुइयां के किसान देवेंद्र की ही नहीं, जिले के 36 गांवों के हजारों किसानों की है जो सेम का दंश झेल रहे हैं।
विज्ञापन


सेम के कारण हालात इतने विकट हैं कि किसान दूसरे गांवों की जमीन बंटाई या ठेके पर लेकर खेती करने को मजबूर हैं। कई किसान खेतीबाड़ी छोड़कर अन्य काम करने लगे हैं। कृषि एवं कल्याण विभाग के मुताबिक जिले के 36 गांवों की 50 हजार एकड़ भूमि सेमग्रस्त हो चुकी है। संवाद न्यूज एजेंसी की टीम सेमग्रस्त ठुइयां और चिंदड़ गांव पहुंची तो लोगों ने बताया कि वर्षों से फसलें नहीं ली हैं। हल्की सी बारिश होने पर जलभराव हो जाता है और महीनों तक नहीं सूखता। कहीं-कहीं भूजल इतना ऊपर है कि पानी सड़ रहा है। खेतों में जहां तक नजर जाती है सफेद नमक की परत दिखाई देती है। संवाद



इन गांवों में सेम से बंजर हो चुकी जमीन

गांव शेखुपूर, भट्टू कलां, ठुइयां, जांडवाला बागड़, ढ़ाबी खुर्द, ढ़ाबी कलां, रामसरा, खाबड़ा कलां, बनमंदोरी, पीलीमंदोरी, मेहूवाला, सूलीखेड़ा, बड़ोपल, धांगड़, खाराखेड़ी, चिंदड़, गदली, दहमन और कुम्हारियां में सेम की वजह से खेत बंजर हो चुके हैं। खेतों में बने मकान गिरने के कगार तक पहुंच गए हैं।
विज्ञापन




क्या है सेमप्राकृतिक जल निकासी में रुकावट, अत्यधिक सिंचाई और भूजल स्तर बढ़ने के कारण मिट्टी में मौजूद लवण ऊपर की सतह पर आ जाते हैं। मिट्टी में लवणीयता इतनी बढ़ जाती है कि धीरे-धीरे खेत बंजर हो जाते हैं। किसी भी फसल की पैदावार नहीं हो पाती।

क्या हो सकता है उपाय

सेम से बचने के लिए कुछ संभावित उपाय किए जा सकते हैं लेकिन परिणाम के संबंध में स्पष्ट रूप से कह पाना मुश्किल है। अस्थाई तौर पर प्रभावित क्षेत्रों की पहचान, सतही जल निकासी में सुधार, सिंचाई का बेहतर प्रबंधन, मिश्रित गुणवत्ता के पानी का उपयोग और नमक सहनशील फसलों की पैदावार पर प्रयोग किया जा सकता है। स्थाई समाधान के लिए भूमिगत जल निकासी प्रणाली, गहरी जड़ों वाले वृक्षों के जरिए बायो-ड्रेनेज और नमक सहनशील पेड़ों के साथ कृषि वानिकी मॉडल अपनाया जा सकता है।



करोड़ों खर्च के बाद भी नहीं बदले हालात

जिले के 36 गांवों में से अधिक सेमग्रस्त 14 गांवों के लिए सरकार की ओर से तकरीबन 46.61 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट मंजूर किए जा चुके हैं। समस्या के स्थाई समाधान के लिए सोलर पंप लगाकर पाइप लाइन के जरिए ड्रेन और नहरों में पानी डाला जा रहा है, लेकिन फिर भी हालात नहीं बदले हैं। कृषि विभाग की मृदा एवं लवणता विंग ने 285 सूर्य ऊर्जा ट्यूबवेल लगवाए थे। लोगों का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी के करीब 50 फीसदी ट्यूबवेल बंद पड़े हैं।

-

अधिक सेम प्रभावित इन गांवों में चल रहा काम

गांव राशि

शेखुपुर दड़ौली 2.70 करोड़

गदली 2.6 करोड़

बनमंदोरी 2.79 करोड़

ढाबी खुर्द 3.26 करोड़

रामसरा 1.50 करोड़

भट्टू कलां 4.8 करोड़

ढाबी कलां 4.23 करोड़

ठुइयां 3.72 करोड़

पीलीमंदोरी 3.81 करोड़

खाबड़ा कलां 3.10 करोड़

बड़ोपल 3.29 करोड़

चिंदड़ 8.5 करोड़

जांडवाला बागड़ 1.85 करोड़

दहमन 2.17 करोड़

कुल राशि 46.61 करोड़ रुपये





क्या कहते हैं किसान

मेरे पास 15 एकड़ कृषि योग्य भूमि है, लेकिन सेम की समस्या होने से खेत पूरी तरह से दलदल बन गया है। इस भूमि में किसी भी फसल की पैदावार नहीं होती। खेतों में चारा न होने के कारण पशुपालन भी बंद कर दिया है। प्रशासन से अपील है कि किसानों को आर्थिक सहायता दी जाए। - देवेंद्र बैनिवाल, गांव ठुइंया।

-

मैं 15 सालों से अपने खेत में फसल नहीं ले सका हूं। जो जमीन कभी मेरे परिवार का पेट पालती थी, अब सफेद नमक की परत और दलदल में तब्दील हो चुकी है। सेम से खराब हो चुकी भूमि की विशेष गिरदावरी करवाकर किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए। - शंकरलाल, गांव ठुइंया।

-

प्रशासन की ओर से लगाए गए सोलर पंपों की मरम्मत करके तुरंत ठीक कराया जाए ताकि जल निकासी शुरू हो सके। सेम की समस्या से जलस्तर काफी ऊंचा हो चुका है। इसमें बिजाई कर पाना मुश्किल हो गया है। - मांगेराम, गांव ठुइंया।

-

हम अन्नदाता हैं, लेकिन हमारे पास अपने परिवार को पालने के लिए भी अन्न नहीं है। गेहूं खरीदकर लाते हैं। चुनावी दिनों में नेता सेम की समस्या को हल करवाने का आश्वासन देते हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हो पाया है। - रामसिंह, गांव ठुइंया।

-

पिछले सात वर्षों से सेम के कारण खेत में कोई भी फसल नहीं हुई। अब गांव में किरयाना की दुकान कर परिवार का गुजारा चला रहा हूं। मानसून के दौरान जलभराव होने पर परिवार सहित दो महीने तक गांव बड़ोपल में रिश्तेदार के यहां शरण लेनी पड़ी। - इंद्राज ऐचरा, गांव चिंदड़।

-

गांव में सेम निवारण के लिए लगे ट्यूबवेल खराब हो चुके हैं। जलनिकासी के लिए बिछाई गई पाइप लाइन घटिया गुणवत्ता की है। ऐसे में बार-बार लीकेज की समस्या बनती है। मानसून के दौरान पानी भरने पर परिवार के साथ अपने ससुराल सदूलपुर में शरण ली थी। सेम से मेरी ढाणी जर्जर हो चुकी है। - संस्करण, गांव चिंदड़।

-

सेम की समस्या पिछले सात सालों से ज्यादा हैं। निवारण के लिए साल 2022 में 8.5 करोड़ की लागत से 18 सोलर पंप लगाए थे जो कि खराब हैं। सिंचाई विभाग ने जलनिकासी का अस्थाई प्रबंध करके पानी निकलवाया था, लेकिन अब गेहूं की बिजाई नहीं हो सकी है। -कृष्ण, गांव चिंदड़।

-

गांव में कृषि योग्य 3300 एकड़ जमीन है, जिसमें से करीब 2000 एकड़ जमीन पर गेहूं की बिजाई नहीं हो सकी है। गांव में 150 ढाणियां हैं जो सेम के कारण जर्जर हो चुकी हैं। किसानों ने खेती व पशुपालन छोड़कर अन्य काम शुरू कर दिया है।- फतेहसिंह, गांव चिंदड़

-



सेम समस्या के समाधान के लिए लगाए गए सोलर ट्यूबवेल में मानसून के दौरान जलभराव होने से पानी चला गया था। इससे पंप खराब हो गए थे। हिसार ड्रेन ओवरफ्लो होने के कारण पंपों को बंद किया गया था। खराब पंप को ठीक करवाने में थोड़ा समय लग गया। पानी कम होने के बाद कुछ और पंप भी ठीक करवाए गए हैं। अभी लगभग सभी पंप ठीक हैं। - डॉ. राजेश कुमार, मृदा एवं लवणता सरंक्षण अधिकारी, फतेहाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें