बच्ची का उपचार हिसार के एक निजी अस्पताल में चल रहा था जहां शुक्रवार
सुबह उसने दम तोड़ दिया। इधर अस्पताल की रिपोर्ट में डेंगू से मौत होने की
पुष्टि की गई है लेकिन जिला स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि रिपोर्ट आने के
बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
आनन फानन में आसपास के क्षेत्रों सर्वे
करवाया जा रहा है। दूसरी ओर टोहाना में डेंगू के और दो पॉजिटिव केस मिलने
से लोगों में दहशत का माहौल है। इसी के साथ दिनों दिन बढ़ती डेंगू के
मरीजों की संख्या टोहाना में 28 और पूरे जिले में 37 हो गई है।
गुप्ता
कॉलोनी निवासी सरकारी टीचर सतबीर सिंह की 7 वर्षीय बेटी सिमरन कई दिनों से
बुखार से पीड़ित थी। पहले तो टोहाना के ही एक निजी अस्पताल में बच्ची का
उपचार चल रहा था।
जिसके बाद कोई सुधार न होता देख पिता सतबीर ने
सिमरन को हिसार के निजी अस्पताल में दाखिल करवाया। जहां अस्पताल की रिपोर्ट
में डेंगू बताते हुए उसका उपचार चल रहा था। शुक्रवार अहले सुबह तीन बजे के
लगभग सिमरन ने डेंगू से संघर्ष करते हुए दम तोड़ दिया।
टोहाना में डेंगू का सबसे ज्यादा प्रकोप
जिले
में डेंगू के अभी तक 37 मरीजों में पुष्टि हो चुकी है। जिसमें सबसे ज्यादा
मरीज टोहाना से हैं। विभाग के आंकड़ों के अनुसार टोहाना में 28, फतेहाबाद
में 5, भूना में 2, रतिया में 1 और जाखल में 1 पाया गया है।
इससे
पहले 2013 में 23 सबसे ज्यादा मरीज डेंगू के मरीज मिले थे। इस आधार पर किसी
भी साल से अब तक मिले मरीजों की संख्या इस साल सबसे ज्यादा है।
लगातार बढ़ रहे मरीज, विभाग है कि फॉगिंग से आगे बढ़ नहीं पा रहा
डेंगू
का प्रकोप भले ही तेजी से बढ़ता जा रहा है लेकिन विभाग है कि फॉगिंग
करवाने से आगे बढ़ ही नहीं पा रहा। शुक्रवार को हुई मौत के बाद टोहाना के
लोगों में डेंगू के प्रकोप को लेकर भय फैल गया है।
14 में दस पद खाली, टेस्ट की भी सुविधा नहीं
टोहाना
में डाक्टरों की 14 पोस्ट स्वीकृत हैं लेकिन वहां 4 डॉक्टर ही मौजूद हैं,
जिनमें से एसएमओ भी शामिल हैं। ऐसे में आप अंदाजा लगा सकते हैं डेंगू को
लेकर विभाग कितना गंभीर है।
टोहाना में टेस्ट करवाने तक की सुविधा नहीं है। सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं न होने के कारण लोगों में रोष भी है।
उनका
कहना है कि मरीजों को उपचार करवाने के लिए हिसार जाना पड़ रहा है जहां
भारी भरकम राशि खर्च करनी पड़ रही है। टोहाना के सरकारी अस्पताल में न तो
डॉक्टर हैं और न ही टेस्ट की सुविधा।
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