फतेहाबाद। नगर परिषद अधिकारियों की प्लानिंग सिरे न चढ़ने के कारण शहर की स्वच्छता को दाग लग रहा है। नगर परिषद समय रहते 60 किलोमीटर क्षेत्र में सफाई का काम ठेके पर दे पाया है और न ही शौचालयों की सफाई का ठेका दिया जा सका है।
हालात ये है कि नगर परिषद के पास कहने को 143 सफाई कर्मचारी है लेकिन असलियत में 77 कर्मचारी ही पूरे शहर में सफाई कर रहे है। 30 कर्मचारी तो अफसरों और नेताओं की कोठियों पर काम कर रहे है। ये आंकड़ा खुद सफाई कर्मचारी संघ ने जारी किया है।
नगर परिषद फतेहाबाद में 31 पक्के और 112 पालिका रोल कर्मचारी हैं। इनमें से 30 कर्मचारी अधिकारियों और नेताओं की कोठियों पर कार्य कर रहे हैं। रोजाना 20 से 30 कर्मचारी छुट्टी पर रहते हैं बाकी 83 में से 6 दरोगा, 1 ड्राइवर और 3 कर्मचारी नगर परिषद ने कार्यालय के कार्य के लिए रखे हुए है। बाकी बचे 77 कर्मचारियों के जिम्मे शहर की सफाई और शौचालयों की सफाई का काम जिम्मे है।
10 दिन से नहीं हो रही है शौचालयों की सफाई
नगर परिषद ने पिछले साल दोगुना रेट पर करीब 43 लाख रुपये में शहर के सार्वजनिक शौचालयों की सफाई का ठेका दिया था। ये ठेका पूरे साल विवादों में रहा है लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता हुई। नगर परिषद ने इस बार निजी एजेंसी को ठेका न देकर स्वयं सहायता समूह को देने का फैसला लिया है। लेकिन 10 दिन बाद भी ये योजना सिरे नहीं चढ़ पाई है। शहर में 15 सार्वजनिक शौचालय है। इसमें पुराना बस स्टैंड और थाना रोड पर शौचालयों का हाल ही में निर्माण हुआ है। हालात ये है कि किसी भी शौचालयों में फिलहाल सफाई नहीं हो रही है। यहां तक पानी की व्यवस्था नहीं है।
नगर परिषद नहीं दे पाया ठेके पर सफाई काम
नगर परिषद ने शहर के 60 किलोमीटर क्षेत्र में सफाई का काम ठेके पर देने की योजना बनाई है। एजेंसी को 90 कर्मचारी रखने है। नगर परिषद ने पहले टेंडर लगाया था लेकिन सिरे नहीं चढ़ पाया। अब नगर परिषद ने दोबारा टेंडर लगा रखा है लेकिन अब आचार संहिता लग चुकी है। हालात ये है कि ढाई साल से नगर परिषद की बढ़ी सीमा में सफाई शुरू नहीं हो पाई है।
ये है शहर की स्थिति
नगर परिषद के वार्ड - 27
रोजाना शहर से निकल रहा कचरा - 30 से 35 टन
सफाई कर्मचारी - 143
चेकिंग टीम को खुश करने के लिए कर्मचारियों पर दबाव
नगरपालिका कर्मचारी संघ के ब्लॉक प्रधान नरेश राणा, सचिव ओम प्रकाश लोट, राज्य वरिष्ठ उपप्रधान रमेश तुषामड़ का कहना है कि नगर परिषद ने सफाई अभियान के नाम पर शहर में सफाई का बुरा हाल करवा रखा है। नगर परिषद अधिकारी रोड साफ दिखाकर झूठी वाहवाही लूट रहे हैं जबकि असलियत में शहर की कॉलोनियों में कचरे के अंबार लगे हैं। चेकिंग के लिए आई टीम को खुश करने और शहर में सफाई दिखाने के लिए कचरा प्वाइंट बंद किए जा रहे हैं। जिससे कर्मचारियों की परेशानी ओर बढ़ गई है। उनको कचरा एक किलोमीटर दूर डालने के लिए कहा जा रहा है।
डीएमसी से मांगी गई है अनुमति
नगर परिषद में सफाई कर्मचारियों की कमी है। शौचालयों और शहर की सफाई को लेकर कर्मचारी रखने के लिए डिमांड डीएमसी को भेजी गई है। अनुमति मिलने के बाद कर्मचारी रखे जाएंगे।
- सुरेंद्र कुमार, ईओ नगर परिषद