नगर परिषद में एक काम के लिए 10 महीने चक्कर कटवाने पर कर्मचारियों को सबक सिखाने का रोचक मामला सामने आया है। मकान के मूल्याकंन की रसीद लेने के लिए नगर परिषद कर्मचारियों ने टैक्स का पैसा मांग तो पीड़ित सबक सिखाने के मकसद से मंगलवार को थैले में 9 हजार के सिक्के लेकर नप कार्यालय पहुंच गया। उसके बाद कर्मचारी करीब 5 घंटे तक सिक्के गिनते रह गए। हालात यह हो गई कि सिक्कों को कई बार गिनने पड़े।
मामले के मुताबिक डीसी कॉलोनी निवासी सुनील कुमार की भाभी का मकान विचाराश्रम मंदिर के पास है और उसने इस मकान की असेसमेंट निकलवाने के लिए करीब दस माह पहले नगर परिषद कार्यालय में आवेदन दिया था, लेकिन कर्मचारियों ने उसे बार-बार चक्कर कटवाए। कहा कि 2019 का हाउस टैक्स भरने के बाद असेसमेंट दी जाएगी। सुनील ने बताया कि उसकी भाभी का मकान रिहायशी है, लेकिन नप कर्मचारियों ने इसे कमर्शियल बिल्डिंग में शामिल करके 2018 तक हाउस टैक्स सवा लाख रुपये बना दिया। जब उसका सर्वे कराया गया तो 80 हजार रुपये हाउस टैक्स बना, जिसे उसने जुलाई 2018 में भर दिया था। इसके बाद करीब 10 माह पहले असेसमेंट के लिए आवेदन किया, लेकिन कर्मचारी चक्कर कटवाते रहे। कभी सर्वर न चलने तो कभी सिस्टम बंद होने का बहाना बनाया गया। इसके बाद कहा गया कि 2019 का हाउस टैक्स भरने के बाद असेसमेंट दी जाएगी। इस बीच लॉकडाउन के दौरान जब वह दोबारा अपना आवेदन लेकर गया तो नगर परिषद कर्मचारियों ने उसे एक नोटिस थमा दिया, जिसमें साल 2020 का प्रॉपर्टी टैक्स के रूप में 9199 रुपये भरने के निर्देश थे, जबकि अभी साल 2020 खत्म ही नहीं हुआ है। इसके चलते उसने नगर परिषद कर्मचारियों को सबक सिखाने की सोची। उसने इधर उधर से एक-एक और दो-दो रुपये के सिक्के इकट्ठा किए और उसे एक थैले में भरकर नगर परिषद कार्यालय में पहुंच गया। जब नप कर्मचारियों ने उससे फीस मांगी तो उसने सिक्कों से भरा थैला नप कर्मचारियों की टेबल पर रख दिया। इतने सिक्के देखकर एकबारगी तो नप कर्मचारियों के पसीने छूट गए। सिक्कों की गिनती के लिए तीन कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई। तकरीबन पांच घंटे तक सिक्कों को गिनने के बाद सुनील की फीस जमा करवाई गई। सुनील कुमार का कहना था कि वह सामान्य रुपयों में भी फीस जमा करवा सकता था, लेकिन जिस तरह से बार-बार उसे चक्कर कटवाए गए, उससे परेशान होकर उसने ये कदम उठाया।
हाउस टैक्स भरने और रजिस्ट्री होने पर ही असेसमेंट की नकल दी जाती है। जो नियम हैं उसे तो पूरा करना ही पड़ेगा। - जितेंद्र कुमार, ईओ, नगर परिषद।