फतेहाबाद। फतेहाबाद जिले में गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूल संचालकों व शिक्षा विभाग के अधिकारियों के बीच नूरा कुश्ती का खेल जारी है। अमूमन स्कूल संचालकों से हंस-हंस कर मिलने वाले शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पिछले तीन माह से बिना मान्यता प्राप्त वाले स्कूलों के एड्रेस ही नहीं मिल रहे। नतीजतन बिना मान्यता वाले स्कूलों की सूची अभी तक अटकी है। ये किसी एक खंड का हाल नहीं है बल्कि पूरे जिले के शिक्षा विभाग के अधिकारियों के यही हालात हैं। दरअसल शिक्षा विभाग ने बिना मान्यता वाले स्कूलों पर नकेल कसने के लिए नोटिस भेजने के आदेश जिलास्तर पर बैठे अधिकारियों को दिए थे। डीईईओ व डीईओ ने आगे खंड शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने इलाके के बिना मान्यता वाले स्कूलों की सूची बनाकर जिला मुख्यालय पर भेजने के निर्देश दिए थे ताकि इन स्कूलों को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा जा सके। ये प्रैक्टिस शुरू होनी थी फरवरी माह में। लेकिन चार माह बीतने के बावजूद अभी तक जिले का कोई भी खंड शिक्षा अधिकारी ये सूची जिला मुख्यालय को उपलब्ध नहीं करवा सका है। मजे की बात तो ये है कि बीते चार माह में लगभग रोजाना शिक्षा विभाग की टीम ऐसे स्कूलों की तलाश में घूमती रही है। लेकिन एक भी स्कूल ऐसा अभी तक नहीं मिला है। अब जिला शिक्षा अधिकारी दयानंद ने मंगलवार को इस संदर्भ में बैठक बुलाने की बात कही है।
जिले में 50 से अधिक स्कूलों के पास नहीं है मान्यता
शिक्षा विभाग के सूत्रों की मानें तो फतेहाबाद जिले में बिना मान्यता वाले स्कूलों की कुल संख्या 50 के करीब है। अकेले टोहाना और फतेहाबाद में ही इनकी संख्या 20 से 25 है। टोहाना में तो पिछले दिनों बिना मान्यता वाले स्कूलों को लेकर काफी हंगामा भी हुआ था। ज्यादातर स्कूलों के साथ ये दिक्कत है कि स्कूल के पास मान्यता अगर आठवीं तक की है तो उसने कक्षाएं दसवीं तक की लगा रखी हैं। जबकि नियमानुसार वो आठवीं कक्षा से आगे कक्षाएं स्कूल में नहीं लगा सकते।
ये होता है बिना मान्यता के स्कूल में एडमिशन की समस्या
आठवीं तक की मान्यता वाले स्कूल अक्सर अपने स्कूल में दसवीं तक के एडमिशन कर लेते हैं। कहने को बच्चे पढ़ रहे होते हैं अपने स्कूल में, लेकिन उनका दसवीं के छात्र के रूप में नाम किसी अन्य स्कूल में डलवाया जाता है जिसे मान्यता मिली होती है। लेकिन मान्यता वाले स्कूल से अभिभावकों का सीधा संपर्क नहीं होता। ऐसे में कल को बच्चों के रोल नंबर मिलने में आने वाली किसी भी समस्या पर बिना मान्यता वाले स्कूल संचालक पूरी तरह मान्यता वाले स्कूल संचालक पर निर्भर हो जाता है। कई बार ऐसी स्थिति में बच्चों के भविष्य पर संकट हो जाता है।
यह कहना है खंड शिक्षा अधिकारियों का
सभी सीआरसी को इस संदर्भ में कहा गया है, लेकिन अभी कुछ की लिस्ट बाकी है। सोमवार को एक बार फिर बिना मान्यता वाले स्कूलों की लिस्ट तैयार करने के आदेश दिए जाएंगे। जल्द ही डीईओ दफ्तर में सूची दाखिल कर दी जाएगी।
कुलदीप सिहाग, खंड शिक्षा अधिकारी, फतेहाबाद।
बिना मान्यता वाले स्कूलों की सूची के लिए सर्वे किया जा रहा है, कुछेक स्कूलों का सर्वे बाकी है। उन स्कूलों का सर्वे होने के बाद ही फाइनल सूची डीईओ दफ्तर में जमा करवा दी जाएगी।’
बलवान गिल, खंड मौलिक शिक्षा अधिकारी, टोहाना ।
सर्वे चल रहा है। कुछ लिस्ट भी तैयार की गई है। जल्द ही जिला शिक्षा मुख्यालय पर जमा करवा दी जाएगी।’
रमेश दहिया, खंड शिक्षा अधिकारी, रतिया ।
सर्वे चल रहा है। दरअसल पिछले दिनों सक्षम हरियाणा में डयूटियां लगे होने के चलते बिना मान्यता वाले स्कूलों की सूची तैयार नहीं हो सकी थी। लेकिन अब अधिकारियों को कह दिया गया है कि जल्द से जल्द सूची पूरी कर डीईओ दफ्तर भेजें।’
भागीरथ लाल पंवार, खंड शिक्षा अधिकारी भट्टू
-------------------
सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर बिना मान्यता वाले स्कूलों की सूची बनाने को कहा गया था, लेकिन इतने माह बीतने के बाद अभी तक सूची नहंी भेजी गई है। ये गंभीर लापरवाही है, जल्द ही सबको कहा जाएगा कि तुरंत सूची भेजें ताकि उसी अनुसार सबको नोटिस भेजे जा सकें। इसके लिए मंगलवार को सभी खंड शिक्षा अधिकारी बुलाए गए हैं ताकि बिना मान्यता वाले स्कूलों पर नकेल कसी जा सके।
- दयानंद सिहाग, जिला शिक्षा अधिकारी, फतेहाबाद ।