सुरेंद्र असीजा/अमित रूखाया
फतेहाबाद।
फतेहाबाद में एक ऐसा राइस शेलर है जहां पर धान का चावल बनाने के साथ बिजली भी बनाई जाती है। इतना ही नहीं, ये फैक्ट्री प्रतिमाह बिजली निगम को बिजली सप्लाई भी करती है। बात हो रही है फतेहाबाद की प्रसिद्ध जिंदल राइस इंडस्ट्री की। इतने बड़े पैमाने पर सोलर सिस्टम का उपयोग अपने आप में एक ऐतिहासिक पहल है। इससे पहले अभी तक छोटे छोटे सोलर पैनल रिहाइशी इलाकों या सरकारी दफ्तरों में ही लगे होते थे।
हिसार रोड़ पर स्थित जिंदल फैक्ट्री में लगे इस सौर सिस्टम के जरिये प्रतिवर्ष 25 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन होता है। इसके जरिये फैक्ट्री प्रबंधक प्रतिवर्ष पौने दो करोड़ के बचत का भी दावा करता है। जिंदल फैक्ट्री से मिली जानकारी के अनुसार इस फैक्ट्री में लगे मशीनों का लोड तकरीबन 650 किलोवाट का है। इसके अलावा 132 केवी सबस्टेशन से इस फैक्ट्री का सीधा कनेक्शन है। जिसके कारण इस फैक्ट्री को मिलने वाली बिजली का शहर की सप्लाई पर कोई असर नहीं पड़ता। इसके साथ ही इस फैक्ट्री में प्रतिदिन इस्तेमाल होने वाली बिजली का लगभग 75 फीसदी इस फैक्ट्री को सोलर सिस्टम से ही मिल जाती है।
साल में औसतन 300 दिन होता है बिजली उत्पादन, गर्मियों में बिजली निगम को मिलती है मदद
जिंदल फैक्ट्री में लगे सोलर सिस्टम में साल में औसतन 300 दिन बिजली उत्पादन होता है। फैक्ट्री मालिक अजय जिंदल की मानें तो बाकी 65 दिन धुंध, बादलवाही और बारिश के दिनों के चलते बिजली उत्पादन उतना असरदार नहीं रहता लेकिन 300 दिनों में उत्पादित होने वाली बिजली की मात्रा इन दो माह के कम उत्पादन को कवर कर लेती है। जिंदल के अनुसार गर्मियों में सूर्य की तपिश अधिक और ज्यादा देर तक रहने के चलते बिजली उत्पादन की मात्रा काफी अधिक हो जाती है और इन दिनों में बिजली निगम को अधिक बिजली सप्लाई की जाती है।
सालाना 2 लाख यूनिट से अधिक बिजली का ट्रांसफर
बिजली निगम से मिली जानकारी के अनुसार जिंदल राइस फैक्ट्री का फतेहाबाद के 132 केवी सबस्टेशन से हॉटलाइन है। इसमें नेट मीटिंग के जरिये बिजली का आदान प्रदान होता है। फैक्ट्री में लगे सोलर सिस्टम में जब बिजली सरप्लस होती है तो इसी हॉटलाइन के जरिये बिजली सीधा निगम के पूल में चली जाती है। इसके लिए बकायदा एक मीटर लगा है जो इस बात का संकेत देता रहता है कि बिजली निगम को फैक्ट्री की तरफ से कितनी बिजली भेजी गई है।
पौने चार करोड़ आई है लागत, लगभग प्रदूषण मुक्त रहता है वातावरण
जिंदल राईस मिल कई मायनों में अनेक अन्य फैक्ट्रियों के लिए आदर्श प्रस्तुत कर रही है। इस फैक्ट्री में लगे साढ़े 6 सौ किलोवाट के सोलर सिस्टम पर फैक्ट्री प्रबंधक को लगभग पौने चार करोड़ की लागत आई है लेकिन लागत से अधिक वो वसूल चुके हैं। लेकिन इस सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा ये हुआ है कि प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण बनने वाली बड़ी बड़ी चिमनियां अब फैक्ट्री से लगभग गायब हो चुकी हैं। एक अनुमान के मुताबिक पिछले एक साल में फैक्ट्री ने 319.86 टन कार्बन डाईऑक्साइड के उत्सर्जन को रोका है सोलर सिस्टम के इस्तेमाल से।
%फैक्ट्री काफी समय से चल रही है लेकिन प्रदूषण व बिजली की खपत को लेकर काफी चिंतित थे। इसी के चलते सोलर सिस्टम को अपनाया। पहले छोटा सिस्टम लगाया, उसमें कामयाबी मिलने पर लगभग छह सौ किलोवाट का सिस्टम लगाया है। शुरू में इसपर आई लागत अधिक लगती थी लेकिन अब लागत तो वसूल हो चुकी है और सालाना पौने दो करोड़ की बिजली भी बचा लेते हैं। निगम को भी बिजली बेची जाती है। ’
अजय जिंदल, संचालक, जिंदल राईस फैक्ट्री, फतेहाबाद ।
फैक्ट्री मालिकों को जिंदल राईस मिल से सीख लेते हुए सोलर सिस्टम को अपनाना चाहिए। इस फैक्ट्री से सालाना हजारों यूनिट बिजली निगम को मिलती है जिससे खासकर गर्मियों में शहर के अतिरिक्त लोड को संभालने में मदद मिलती है।
भजन सिंह कंबोज, एसडीओ, बिजली निगम ।