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डिपो होल्डर निगल गया था गरीब परिवारों का एक माह का निवाला, तीन साल बाद दर्ज हुआ मामला

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अमर उजाला ब्यूरो
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भूना।
गांव ढाणी सांचला के एक डिपो होल्डर द्वारा बीपीएल परिवारों का 75 क्विंटल 25 किलोग्राम गेहूं हड़पने के मामले में आखिरकार तीन साल के बाद पुलिस ने कार्रवाई की है। भूना पुलिस ने इस मामले में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निरीक्षक व जिला खाद्य एवं आपूर्ति का मिलीभगत की भी जांच शुरू कर दी है जबकि मुख्य आरोपी डिपो होल्डर रोहताश कुमार के खिलाफ धोखाधड़ी, सरकारी कागजों में हेराफेरी तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने उक्त कार्रवाई जिला पुलिस कप्तान के निर्देश के बाद की है। इस संदर्भ में ढाणी सांचला निवासी चंद्रभान एसपी दीपक सहारण को शिकायत सौंपकर जांच करने की गुहार लगाई थी।
एसपी फतेहाबाद को दी शिकायत में ढाणी सांचला निवासी चंद्रभान ने आरोप लगाया कि डिपो धारक रोहताश कुमार ने अक्तूबर 2014 में बीपीएल परिवारों के लिए सरकारी कोटे से आया 75.25 क्विंटल गेहूं गबन व भ्रष्टाचार की नीयत से खुर्द-बुर्द कर दिया तथा राशन कार्ड धारकों के बार-बार पूछने पर गलत जानकारी देते हुए बताया कि पीछे से ही गेहूं का वितरण नहीं हुआ है।
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आरटीआई में भी नहीं मिला संतोषजनक जवाब
शिकायतकर्ता चंद्रभान ने इस मामले का उजागर करने के लिए सूचना के अधिकार का सहारा लिया और जन सूचना अधिकार के तहत अक्तूबर 2014 में संबंधित डिपो को भेजी गई गेहूं सप्लाई की सूचना मांगी। सूचना में यह भी मांग की गई कि उक्त गेहूं को किन-किन राशन कार्डों पर वितरित किया गया है। छानबीन में पाया गया कि अक्तूबर 2014 में डिपो होल्टर को 75 क्विंटल 25 किलोग्राम गेहूं स्वीकृत होकर मिली थी। आरटीआई के बाद जब डिपो होल्डर के हाथ पांव फूल गए तो उसने आनन-फानन में लगभग 90 राशन कार्ड धारकों के फर्जी हस्ताक्षर दैनिक सेल रजिस्टर में दर्ज कर रिकार्ड उपलब्ध करवा दिया। शिकायतकर्ता ने जब दैनिक सेल रजिस्टर का राशन कार्ड धारकों के कार्डों से मिलान किया तो पाया गया कि लगभग 90 कार्ड धारकों के फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे तथा करीब 150 कार्ड धारकों को अक्तूबर 2014 में गेहूूं दी ही नहीं गई। इसी के चलते उपभोक्ताओं के राशन कार्डों के कालम भी खाली पाए गए।
सीएम विंडो में पहुंचा मामला
शिकायतकर्ता चंद्रभान को जब कोई कार्रवाई होती नहीं दिखी तो उसने पूरे मामले को सीएम विंडो में डाल दिया। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने मामले की जांच की तो जांच के दौरान 46 राशन कार्डधारकों के बयान दर्ज किए गए जिनको अक्तूबर 2014 की गेहूूं नहीं दी गई। जबकि लगभग 10 ऐसे राशन कार्ड धारकों ने बयान दिए कि दैनिक सेल रजिस्टर में दर्ज हस्ताक्षर उनके नहीं बल्कि फर्जी हैं। मामले में साफ तौर पर घपला सामने आने के बावजूद जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक फतेहाबाद ने आरोपी डिपो होल्डर रोहताश उर्फ लीलू के डिपो की पूर्ण प्रतिभूति राशि 1 हजार रुपये जब्त कर ली और कार्यवाही के नाम पर उसको चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।
एसडीएम दरबार तक पहुंचाया मामला, रिकवरी के आदेशों की नहीं हुई पालना
शिकायतकर्ता ने इसके बाद इस फर्जीवाड़े की शिकायत 13 फरवरी 2015 को एसडीएम टोहाना को दी तथा कार्रवाई न होने पर दूसरी शिकायत 29 जुलाई 2015 को फिर से एसडीएम टोहाना को दी। इसके बाद एसडीएम की जांच में भी घपला मिलने पर उन्होंने जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक को आरोपी डिपो धारक से रिकवरी के आदेश दिए। विभाग के अधिकारियों पर ये भी आरोप है कि एसडीएम के आदेशों के बावजूद उन्होंने आरोपी डिपो संचालक रोहताश से रिकवरी तक नहीं की।
20-25 हजार में समझौता करने के लिए शिकायतकर्ता पर बनाया दबाव
आरोपी डिपो संचालक रोहताश पर कार्रवाई नहीं होती देखकर शिकायतकर्ता चंद्रभान ने 1 सितंबर 2016 को एक बार फिर से सीएम विंडो पर शिकायत दी। इसके बाद जांच डीएफएसओ लेखराज के पास पहुंची तो आरोप है कि उन्होंने शिकायतकर्ता को अपने दफ्तर में बुलाकर 20-25 हजार रुपये लेकर राजीनामा करने का दबाव बनाया। चंद्रभान का ये भी आरोप है कि जब उसने राजीनामा करने से इंकार किया उपरोक्त अधिकारी ने उसे जान का खतरा होने की बात कहकर भी डराने का प्रयास किया। इसके बाद उसने इस मामले में एसपी फतेहाबाद को सारे मामले की शिकायत दी तो उन्होंने भूना थानाध्यक्ष को कार्रवाई के आदेश दिए। इसके बाद भूना थाने में आरोपी डिपो संचालक रोहताश के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया जबकि बाकी दोनों अधिकारियों के खिलाफ पुलिस जांच जारी है।
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वर्जन
चंद्रभान की शिकायत पर ढाणी सांचला के डिपो संचालक रोहताश के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है । जबकि इस मामले में उसकी शिकायत के आधार पर फूड सप्लाई विभाग के निरीक्षक राजेंद्र शर्मा व डीएफएसओ लेखराज कंबोज के खिलाफ जांच की जा रही है। अगर उनकी ओर से गलती दिखी तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
आत्माराम, भूना थाना प्रभरी
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