फतेहाबाद।
तहसील कार्यालय के अंदर चल रहे झोल का खुलासा करने वाली शिकायत की फाइल डीसी दफ्तर से गायब कर दी गई है। फाइल के अंदर तहसील कार्यालय के अंदर विभिन्न रजिस्ट्रियों में की गई गड़बड़ियों की पूरी डिटेल और आरटीआई के जवाब में खुद तहसील कार्यालय द्वारा उपलब्ध करवाई गई सूचनाएं थी जिन्हें एक फाइल का रूप दिया गया था।
ये फाइल खुद सीपीएस सीमा त्रिखा ने तत्कालीन उपायुक्त एनके सोलंकी को सौंपी थी और उनसे चार दिन में इस मामले की जांच रिपोर्ट भेजने को कहा था, लेकिन इससे पहले ही तत्कालीन उपायुक्त एनके सोलंकी सेवानिवृत्त हो गए और उनके जाने के बाद से संदिग्ध परिस्थितियों में डीसी दफ्तर से तहसील कार्यालय के कच्चे-चिट्ठे वाली फाइल का गायब होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
तत्कालीन डीसी ने कहा, एसडीएम को दी थी फाइल
उधर तत्कालीन डीसी एनके सोलंकी का कहना है कि उन्हें ठीक से तो याद नहीं, लेकिन शायद उन्होंने एसडीएम को ये फाइल सौंपी थी। वहीं एसडीएम सतबीर जांगू ऐसी किसी भी फाइल के बारे में कोई जानकारी होने से साफ इंकार कर रहे हैं। सीपीएस सीमा त्रिखा के निजी सचिव सतेंद्र का कहना है कि उन्होंने फाइल का फोलडर डीसी के मार्फत एसडीएम को सौंपी थी।
तहसील कार्यालय में भ्रष्टाचार को लेकर थे सबूत, सीपीएस ने दिए थे जांच के आदेश
डीसी दफ्तर से जो फाइल गायब हुई है, उसमें तहसील कार्यालय में कथित रूप से चल रहे भ्रष्टाचार की महत्वपूर्ण जानकारियां थी। इतना ही नहीं, उन जानकारियों को पुष्ट करने वाले सबूत भी उसी फाइल में थे। ऐसे में इतनी महत्वपूर्ण फाइल का यूं गायब होना अपने आप ही इस पूरे मामले को और भी संदिग्ध बना है। 29 मई को फतेहाबाद में जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक की अध्यक्षता करने पहुंची सीपीएस सीमा त्रिखा के सामने भूना रोड रेस्ट हाऊस में बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान सुशील बिश्रोई ने तहसील कार्यालय में भ्रष्टाचार की बात करते हुए औपचारिक शिकायत सीपीएस को सौंपी थी। सीपीएस त्रिखा ने इस बारे में उसी समय तहसीलदार नवजीत कौर बराड़ से भी जवाब-तलबी की थी। बाद में सीपीएस ने डीसी सोलंकी को इस मामले की जांच रिपोर्ट चार दिन में सौंपने को कहा था लेकिन 31 मई को ही डीसी सोलंकी अपने पद से सेवानिवृत्त हो गए थे और जांच अधर में ही लटक गई।
ये होता है शिकायत का औपचारिक रूट
मंत्री से जांच के आदेश आने के बाद फाइल को डीसी दफ्तर की शिकायत शाखा में इंट्री करवाना होता है। इस शाखा में इंट्री के बाद ही फाइल डीसी दफ्तर को वापस भेजी जाती है, या फिर उस अधिकारी को भेजी जाती है जिसके नाम डीसी ने शिकायत मार्क की होती है। इस मामले में पहले स्टेप को ही नहीं पूरा किया गया अर्थात डीसी दफ्तर की शिकायत शाखा में ही इस फाइल का कहीं कोई जिक्र नहीं है और न ही फाइल पहुंची है। यहां अगर वो फाइल आ जाती तो फाइल कम से कम सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो जाती। लेकिन अब ऐसा नहीं हुआ है तो निश्चित तौर पर इस मामले में सवाल खड़े लाजिमी हैं।
हर अफसर का दफ्तर छान चुका शिकायतकर्ता
इस मामले में सीपीएस सीमा त्रिखा को शिकायत सौंपने वाले बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान सुशील बिश्रोई ने इस फाइल के लिए जिला प्रशासन के सभी अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगा लिए हैं। इस मामले में वो डीसी दफ्तर, एडीसी दफ्तर, एसडीएम, सीटीएम और डीआरओ से भी मिल चुके हैं, लेकिन किसी भी अधिकारी ने फाइल के बारे में जानकारी होने से साफ इंकार ही किया है।
3 करोड़ रुपये का स्टांप महज 6 सौ में बेचा गया था
तहसील कार्यालय द्वारा फतेहाबाद न्यू टाऊन की जमीन पर किए गए एमओयू में नियमों की अवहेलना करके 3 करोड़ रुपये के रजिस्टर्ड स्टांप महज छह सौ रुपये में बेच दिए गए थे। इसके अलावा शहर के अंदर नप सीमा के भीतर मौजूद इंद्रपुरा मोहल्ले की जमीन को कृषि योग्य बताकर रजिस्ट्री की गई, जिसके रजिस्ट्रेशन में सरकार को 37 लाख का फटका लगा था। इस मामले की शिकायत बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान सुशील बिश्रोई ने सीपीएस सीमा त्रिखा के सामने की थी और बकायदा सबूतों की एक फाइल भी उन्हें सौंपी थी। वो फाइल ही अब गायब बताई जा रही है।
हर अधिकारी झाड़ रहा पल्ला
तहसील कार्यालय में भ्रष्टाचार के जांच वाली फाइल शायद मैने एसडीएम को दी थी या फिर मेरे कार्यालय में होनी चाहिए। मैं तो इसके बाद रिटायर हो गया था।
एनके सोलंकी, तत्कालीन डीसी, फतेहाबाद ।
मेरे पास ऐसी कोई फाइल नहीं है और ना ही मेरी जानकारी में ये मामला है। उस दिन सीपीएस मैडम के पास डीसी साहब ही थे।
सतबीर जांगू, एसडीएम, फतेहाबाद ।
तहसील कार्यालय में भ्रष्टाचार संबंधी कोई फाइल मेरे संज्ञान में नहीं आई है। इस बारे में कर्मचारियों से बात करूंगा, रूटीन के काम में भी ऐसी कोई फाइल नहीं आई है।
जेके अभीर, कार्यवाहक डीसी, फतेहाबाद ।
सीपीएस मैडम ने ये फाइल जांच के लिए डीसी सोलंकी के मार्फत एसडीएम सतबीर जांगू को दी थी। मैंने खुद वो फाइल उन्हें दी थी। आगे इस फाइल का क्या हुआ, ये मेरी जानकारी में नहीं है।
सतेंद्र, निजी सचिव, सीपीएस सीमा त्रिखा।
अमर उजाला एक्सक्लूसिव...
तहसीलदार पर घोटाले के आरोप की फाइल डीसी दफ्तर से गायब
अमर उजाला ने किया था मामले का खुलासा, सभी अधिकारी एक दूसरे के पाले में डाल रहे गेंद
भ्रष्टाचार के सबूत को समेटे थी फाइल
डीसी की रिटायरमेंट के बाद दफ्तर के कर्मचारी बोले, नहीं मिली फाइल
अमर उजाला ने किया था मामले का खुलासा
बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान ने सीपीएस को दी थी शिकायत
तत्कालीन डीसी बोले, एसडीएम को दी थी फाइल
एसडीएम जांगू का जवाब, ऐसी किसी फाइल के बारे में नहीं है कोई जानकारी
22एफटीबीपी07 : सचिवालय परिसर में स्थित तहसील कार्यालय ।
22एफटीबीपी08-09 : अमर उजाला द्वारा तहसील कार्यालय में कथित भ्रष्टाचार पर छापी गई खबरें ।