फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पराली जलाने में पूरे प्रदेश में नंबर एक पर पहुंचा फतेहाबाद, अब सरकार खुद उतरेगी जिले के हालात सुधारने

विज्ञापन
विज्ञापन
अमित रूखाया
विज्ञापन

फतेहाबाद। 15 दिन पहले तक जहां एक ओर प्रदेश सरकार पराली मुद्दे पर फतेहाबाद जिला प्रशासन की पीठ थपथपा रही थी, लेकिन बीते 15 दिनों में हालात एकाएक बदल गए हैं। अब धान की पराली जलाने में फतेहाबाद जिला प्रदेश में नंबर एक पर पहुंच गया है। इसके बाद कैथल और करनाल जिले आ रहे हैं। जिले में धान की पराली को लेकर लगातार बिगड़ते हालातों को संभालने के लिए अब खुद प्रदेश सरकार हरकत में आ गई है। प्रदेश के मुख्य सचिव डीएस डेस्सी खुद फतेहाबाद का निरीक्षण करने आ रहे हैं। अपने निरीक्षण के दौरान वो ना केवल फतेहाबाद जिला प्रशासन से इस मुद्दे पर बैठक करेंगे, बल्कि कुछ गांवों का निरीक्षण भी करेंगे जहां पर पराली जलाने की सबसे अधिक घटनाएं सामने आई हैं।
प्रदूषण भी सबसे खतरनाक स्तर पर पहुंचा
जिला प्रशासन के लाख प्रयासों के बावजूद जिले के सैकड़ों किसानों ने पराली जलाने में तनिक भी देरी नहीं की। प्रशासन की सख्ती से डरे बैठे किसानों को दीवाली के मौके पर अपने खेत की पराली जलाने का मौका मिल गया। दीवाली और इसके आसपास पराली के साथ पटाखों का भी खूब प्रदूषण हुआ। इसी कारण से प्रदेश सरकार ने प्रदूषण को लेकर फतेहाबाद-सिरसा जिले में खास प्रबंध करने के निर्देश दिए हैं। वीरवार को फतेहाबाद शहर में प्रदूषण के पीएम 2.5 का स्तर जहां 374 के करीब था, वहीं शुक्रवार को ये बढ़कर 401 के स्तर को पार कर गया। इसी तरह पीएम 10 का स्तर तो इससे भी खतरनाक हो गया है। शुक्रवार को ये स्तर 559 तक पहुंचा है।
विज्ञापन

सोशल मीडिया से नोटिस तक सिमटी है प्रशासन की मुहिम
धान की पराली जलाने से रोकने के लिए जिला प्रशासन ने इस साल भी विभिन्न अधिकारियों की टीमें बनाई हैं। लेकिन प्रशासन की मुहिम सोशल मीडिया और नोटिसों तक सिमटी हुई है। पिछले साल भी यही स्थिति थी। ना तो पिछले साल और ना ही इस साल प्रशासन ने पराली जलाने के मामले में कोई एफआईआर करवाई है। जिला प्रशासन द्वारा सख्त कदम ना उठाने के चलते इस बार पराली जलाने की घटनाएं रूकने का नाम नहीं ले रही हैं।
सैटेलाइट ने ही पकड़े अधिकतर मामले, 11 सौ से अधिक किसानों की पहचान, ज्यादातर को भेजे गए हैं नोटिस
पराली को जलाने से प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। लेकिन इसके बावजूद डीसी डा. जेके आभीर के अलावा अन्य अधिकारी इस मामले में बहुत ज्यादा गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अभी तक पराली जलाने के 11 सौ से अधिक मामले सामने आ चुके हैं, इसमें से अधिकतर मामले सैटेलाइट की मदद से हरसैक ने पकड़े हैं।
विज्ञापन

वर्जन
सोमवार को प्रदेश के मुख्य सचिव फतेहाबाद-सिरसा के प्रदूषण व पराली की समस्या पर बातचीत करने के लिए आ रहे हैं। वो जिले के अधिकारियों के सामने सरकार का पक्ष रखेंगे और आवश्यक दिशा-निर्देश देंगे।
डा. जेके आभीर, जिला उपायुक्त, फतेहाबाद।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें