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पराली को लेकर गंभीर हुआ संकट, दस दिन पहले सरकार ने की थी तारीफ, अब सीएम दफ्तर से आया सख्त संदेश

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सुरेन्द्र असीजा
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फतेहाबाद। पराली जलाने पर पाबंदी के बावजूद लोग इससे बाज नहीं आ रहे हैं। इससे प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। दस दिन पहले प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव की ओर से इस मामले में धैर्य बरतने के लिए फतेहाबाद के किसानों की तारीफ की गई थी, वहीं अब उन्हीं के दफ्तर से जिले के अधिकारियों के पास इस मामले में सख्त कदम उठाने के निर्देश आए हैं। दरअसल फतेहाबाद जिला पूरे प्रदेश में पराली जलाने के मामले में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। हरसैक की रिपोर्ट के अनुसार अकेले वीरवार को पूरे प्रदेश में पराली जलाने की 255 घटनाएं सामने आई हैं जिसमें से 147 अकेले फतेहाबाद जिले की हैं। मुख्य सचिव के दफ्तर से निर्देश आने के बाद कृषि विभाग एवं जिला प्रशासन भी हरकत में आया और अभी तक 158 किसानों को चिह्नित कर नोटिस भेज दिए गए हैं।
पिछले साल के मुकाबले सुधरे हैं हालात, लेकिन फिलहाल चिंताजनक ही है स्थिति
कृषि विभाग के अधिकारियों की मानें तो पराली जलाने के मामले में फतेहाबाद जिले के हालात पहले से बेहतर हुए हैं। दरअसल पिछले साल इसी समय तक फतेहाबाद जिले में 1346 जगह पर पराली जलाई गई थी, जबकि इस साल अभी तक पराली जलाने की 946 घटनाएं अब तक सैटेलाइट की नजर में आ चुकी हैं। जिला प्रशासन डीसी डा. जेके आभीर की अगुवाई में लगातार प्रयास कर रहा है ताकि किसानों को जागरूक करके उन्हें पराली जलाने से रोका जा सके। इसके लिए डा. आभीर ने सक्षम युवाओं एवं ओडीएफ टीम को भी जिले के ग्रामीण तबकों में किसानों को जागरूक करने के लिए भेजा गया है।
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डीसी भी हुए व्यथित, सोशल मीडिया पर जारी की पीड़ा
पराली जलाने से रोकने के लिए भरसक प्रयत्न कर रहे फतेहाबाद के जिला उपायुक्त डॉ. जेके आभीर भी वीरवार को सैटेलाइट रिपोर्ट आने के बाद काफी व्यथित हुए। हरसैक द्वारा वीरवार रात की रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजी गई जिसमें पूरे प्रदेश में पराली जलाने की कुल 255 घटनाएं सामने आई थी, जिसमें सर्वाधिक 147 अकेले फतेहाबाद जिले से थी। फतेहाबाद के अलावा सिरसा जिले से भी पराली को लेकर स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई है। हरसैक की रिपोर्ट के आंकड़ों को विभिन्न व्हाट्सअप गु्रप्स में सांझा करते हुए किसानों से पराली ना जलाने की एक बार फिर अपील की।
ये है जुर्माना का प्रावधान
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों के अनुसार पराली को आग लगाने से पर्यावरण दूषित होता है। जिससे जहरीला धुआं मानव के शरीर को नुकसान पहुंचाता है। ट्रिब्युनल ने सरकार को निर्देश दे रखें हैं कि दो एकड़ में पराली जलाने वाले को 2500 रुपये, 5 एकड़ में आग लगाने वाले किसान को 5 हजार रुपये तथा 5 एकड़ से अधिक में आग लगाने वाले किसान को 15 हजार रुपये प्रति घटना जुर्माना वसूला जाए।
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वर्जन
पराली जलाने पर रोक के लिए प्रशासन हर संभव प्रयास कर रहा है। लेकिन जिले के कुछ किसान तमाम हिदायतों के बावजूद पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसे किसानों को चिह्नित किया जा रहा है। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डा. जेके आभीर, उपायुक्त, फतेहाबाद।
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