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सूलीखेड़ा के ग्रामीणों की दो टूक, पहले पुल बनाओं फिर करो फाटक बन्द

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अमर उजाला ब्यूरो
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भट्टूकलां।
गांव सूलीखेड़ा में रेलवे फाटक 119 बी को बंद करने का मुद्दा गरमा गया है। ग्रामीणों ने रेलवे विभाग व जिला प्रशासन को दो टूक जबाव देते हुए कहा कि गांव के बीच बनी इस रेलवे फाटक को बंद करने से पहले भूमिगत पुल बनाया जाए। रेलवे ने इस फाटक को बंद करने की कार्रवाई शुरू की तो ग्रामीणों ने इसे रोक दिया। जिस पर रेलवे पुलिस ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाया। लेकिन ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे। गांव सूलीखेड़ा के बीच में रेलवे द्वारा फाटक नंबर 119 बी बनाया हुआ है। गांव के लोगों को इसी फाटक से अपने खेतों व दूसरे अन्य कार्यों के लिए आवागमन करना पड़ता है। लेकिन रेलवे अब इस फाटक को बंद करने की तैयारी कर रहा है। रेलवे का कहना है कि दो फाटक नजदीक नहीं हो सकते। दोनों फाटकों के बीच की दूरी करीब 300 मीटर है। ऐसे में रेलवे विभाग बीकानेर मंडल फाटक नंबर 119 बी को बंद कर इसे फाटक नंबर 119 के साथ जोड़ने का प्रयास कर रहा है। इसके लिए विभाग ने बाकायदा दोनों फाटकों के बीच की दूरी में सड़क निर्माण के लिए कार्य भी शुरू करा दिया है।
लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यह फाटक गांव से दूर है। गांव के सरपंच प्रतिनिधि रामप्रकाश गोदारा व पंच राजेन्द्र माकड़ ने बताया कि गांव के लोग अपनी इस समस्या को लेकर जिला उपायुक्त से मिले और उपायुक्त को बताया कि गांव की आबादी रेलवे लाइनों के दोनों तरफ है। गांव के बीच बनी यह फाटक ही गांव को जोड़ती है। यहां जब से रेलवे लाइन बनी है, तब से अनमैन फाटक था। लेकिन रेलवे ने कुछ माह पहले इस फाटक को बंद करने का प्रयास किया था।
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लेकिन ग्रामीणों की जोरदार मांग के बाद रेलवे ने मानव रहित फाटक की जगह मानव युक्त फाटक बना दिया। अब रेलवे इस फाटक को बन्द करने का प्रयास कर रहा है, जिसे ग्रामीण किसी भी सूरत में सहन नही करेंगे। ग्राम पंचायत सूलीखेड़ा ने रेलवे के बीकानेर मंडल को प्रस्ताव भेजकर मांग रखी है कि इस रेलवे फाटक को बंद करने से पहले ढाई मीटर चौड़ाई का आरयूबी (भूमिगत पुल) बनाया जाए। जब तक भूमिगत पुल नहीं बनता, तब तक रेलवे फाटक बंद न किया जाए।
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