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कैसी सड़क सुरक्षा: खतरनाक कट, खराब हो चुके बलिंकर और सड़कों से गायब सफेद पट्टियां दे रही हादसों को न्यौता

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अमर उजाला ब्यूरो
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फतेहाबाद।
सर्दियों में धुंध का प्रकोप बढ़ जाता है। ऐसे में सड़क सुरक्षा का ध्यान रखना अति आवश्यक है। लेकिन फतेहाबाद में सड़क सुरक्षा का कोई महत्व नहीं रह गया है। अधिकतर सड़के खस्ताहाल हैं, हाईवे पर सफेद पट्टी धूमिल हो गई है तो कई स्थानों से गायब ही हो चुकी है। हाईवे पर लगाए गए अधिकतर ब्लिंकर खराब हो गए हैं, इनकी देख रेख की ओर कोई ध्यान नहीं।
हर साल सड़क सुरक्षा सप्ताह जरूर मनाया जाता है और इस दौरान मात्र लोगों को जागरूक करने की बात कहकर अपने उद्देश्य की पूर्ति कर ली जाती है, लेकिन सालभर इस पर कोई काम नहीं होता। जिले में हादसों की बात की जाए तो पिछले 3 सालों में हादसों की तादाद बढ़ी है और हादसों में काल का ग्रास बनने वालों की संख्या में भी बढ़ोतरी हो रही है। हालांकि ट्रैफिक पुलिस हर साल वाहनों के चलान काटती है, लेकिन सिस्टम के साथ-साथ वाहन चालक भी नियमों की अनदेखी कर हादसों को दावत देते हैं। इस साल जिले में करीब 48 हजार वाहन चालकों के चालान काटे गए हैं, लेकिन नियमों की अवहेलना बदस्तूर जारी है।
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सड़कों पर यातायात की बढ़ोतरी ने हादसों को न्यौता देना शुरू कर दिया है। हादसे होते हैं और सड़क पर अपनी जान गंवाने वाले लोगों के लिए मातम मना लिया जाता है। लेकिन इन हादसों को रोकने के लिए कोई ठोस शुरूआत कहीं से नहीं होती। सर्दी शुरू होते ही फतेहाबाद में फोग व स्मोग ने सड़कों को घेरा तो एकाएक कई हादसे घटित हो गए। चार या पांच दिन जब तक स्मोग व धुंध रही, नेशनल हाइवे पर एक के बाद एक वाहनों के टकराने की सिलसिला जारी रहा। हादसों का मुख्य कारण वाहन चालकों की लापरवाही रहा तो, सिस्टम की सुस्ती भी मुख्य भूमिका में रही। नेशनल हाइवे पर कई खतरनाक कट हैं, जहां सड़क सुरक्षा का कोई साधन दिखाई नहीं देता। नए बने फोरलेन हाइवे व बाइपास तथा पुलों पर भी सुरक्षित सफर करना आसान नहीं है। इस फोरलेन पर कई खतरनाक कट हैं, जहां अक्सर हादसे हो रहे हैं।
भूना रोड पर बना पुल दुर्घटना प्वाइंट बनकर रह गया है। यही हाल रतिया रोड पर स्थित पुल का है। हांसपुर रोड पर बने चौराहे पर सेफ्टी का कोई साधन नहीं है और यहां पर तेज रफ्तार से जाते वाहन अक्सर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। इस चौराहे पर तो शहर व गांवों के अनेक लोग फ्लाईओवर बनाने की डिमांड कर चुके हैं। यहां पर बना एक ब्लिंकर खराब हो चुका है। रतिया रोड पर बने पुल के नीचे दोनों ओर वाहन सचेतक तो लगाए गए हैं, लेकिन यहां पर फोग लाइट व ब्लिंकर नहीं है। इससे वाहन चालकों को धुंध के समय कुछ नहीं सुझता।
ये हैं हादसों के मुख्य कारण
किसी सड़क हादसे के पीछे कोई एक वजह नहीं हो सकती। वाहनों की फिटनेस में खामी, नशा और रफ्तार, ओवरलोडेड वाहन, ट्रैक्टर ट्राली और जुगाड़, सड़क में खामी, सड़कों पर आधे-अधूरे निर्माण कार्य, खराब ट्रैफिक सिग्नल, सड़क पर गलत पार्किंग, सड़क पर खड़े खराब वाहन, यातायात नियमों का उल्लंघन आदि अनेक कारण हैं।
तीन वर्षों में हादसे बढ़े तो घायलों की संख्या भी
जिले में पिछले तीन सालों से हादसों में बढ़ोतरी हुई है। 2015 में जहां जिले में 56 सड़क हादसे हुए तो 28 लोग काल का ग्रास बन गए। जबकि घायलों की संख्या 85 थी। इसी प्रकार 2016 में 61 सड़क हादसे हुए, 31 लोगों ने अपनी जान गंवाई तो 111 लोग घायल हुए। 2017 में अब तक 76 सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। 40 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और 80 लोग हादसों में घायल हो चुके हैं। हादसों का प्रमुख कारण बड़े वाहन अधिक बन हरे हैं। एक अनुमान के अजनुसार, ओवरस्पीड के कारण 70 फीसदी सड़क हादसे हो रहे हैं।
ट्रैफिक पुलिस सख्त, लेकिन फिर भी पस्त
यह नहीं है कि ट्रैफिक पुलिस इस मामले में सख्त नजर नहीं आती। इस साल अब तक ट्रैफिक पुलिस ने जिले में 48111 लोगों के चालान काटे हैं और तकरीबन सवा करोड़ रुपये का चालान वसूला है। इनमें 13 हजार के करीब चालान तो बिना हेल्मेट, 6 हजार चालान बिना सीट बेल्ट, 800 चालान ओवर स्पीड के भी शामिल हैं। नाबालिग बच्चों के भी 380 चालान काटे गए। सख्ती के बावजूद भी लोग यातायात नियमों को ठेंगा दिखा रहे हैं और इस नासमझी का कारण यह है कि अब हादसों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
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लोगों को किया जाता है जागरूक: ट्रैफिक इंचार्ज
ट्रैफिक इंचार्ज रिछपाल सिंह का इस मामले में कहना है कि यातायात पुलिस लोगों को इस मामले में हर प्रकार से जागरूक करती है। सप्ताह में दो बार स्कूलों में जाकर बच्चों को यातायात के नियमों का पाठ पढ़ाया जाता है। इसके अलावा ट्रक, कैंटर यूनियन व रोडवेज में लगने वाले सेमिनारों में भी यातायात नियमों की जानकारी दी जाती है। उन्होंने बताया कि हाइवे पर जहां भी सफेद पट्टी व ब्लिंकर नहीं हैं, उसके लिए लोक निर्माण विभाग को लिखा गया है।
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