फतेहाबाद। फसल अवशेष जलाने वाले जिले के 62 किसान एमएसपी पर गेहूं की फसल नहीं बेच पा रहे हैं। रेड एंट्री के किसानों ने जिला कृषि एवं कल्याण विभाग के अधिकारियों से मिलकर गेहूं की खरीद करने की मांग की है।
किसानों ने बताया कि जब वह खरीद केंद्र पर गेहूं की फसल लेकर पहुंचे तो ऑनलाइन डाटा दर्ज नहीं हुआ है। धान के फसल अवशेष जलाने वाले किसानों के मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर रेड एंट्री वाले अनाज मंडियों व खरीद केंद्रों पहुंचे तो गेट पास काट रहे मार्केट कमेटी कर्मचारियों ने बताया कि आपका रिकॉर्ड शो नहीं हो रहा है। ऐसे में कुछ किसानों ने अपनी फसल को निजी खरीदारों को बेचा तो कुछ किसानों की फसल मंडी में रखी हुई है।
हालांकि इस बार मंडियों में किसानों को निजी खरीद पर भी एमएसपी के बराबर का भाव मिल रहा है। लेकिन कुछ मंडियों में निजी खरीदार गेहूं की खरीद नहीं कर रहे हैं। इससे उन किसानों के सामने फसल बेचना चुनौती बन हुआ है। बता दें कि इस बार प्रदेश सरकार की ओर से फसल अवशेष जलने को रोकने के लिए नियमों में बदलाव करते हुए पराली जलाने वाले किसान पर रेड एंट्री दर्ज की गई थी।
किसानों को बताया गया था, फसल अवशेष जलाने के बजाय पराली की गांठें बनाने और सुपर सीडर की सहायता से सीधी बिजाई करें। वहीं इसके लिए सरकार ओर से प्रति एकड़ हजार रुपये का अनुदान देने का आश्वासन दिया गया था। इसके बावजूद भी किसानों ने उनमें आग लगाई थी। हरसेक की सहायता से किसानों की रेड एंट्री की गई।
धान की कटाई का काम शुरू होते ही किसानों को फसल अवशेष जलाने के प्रति बनाए गए नियमों के बारे में बताया गया था। इसके बावजूद सरकार के आदेश नहीं मानने वाले किसानों की रेड एंट्री की गई है।
-डॉ. राजेश सिहाग, उपनिदेशक कृषि एवं कल्याण विभाग, फतेहाबाद।